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अमरपुर: क्या ‘राज’ बरकरार रख पाएंगे JDU के कुशवाहा मंत्री? या 3114 वोटों का अंतर पाटकर कांग्रेस-RJD करेगी वापसी?

अमरपुर विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

अमरपुर विधानसभा सीट पर 2025 में मुकाबला मुख्य रूप से जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) या राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बीच होने की प्रबल संभावना है, जो महागठबंधन का हिस्सा हैं। यह सीट 2020 में JDU ने केवल 3,114 वोटों के मामूली अंतर से जीती थी, जो इसे 2025 के सबसे संवेदनशील सीटों में से एक बनाता है।

वर्तमान विश्लेषण के आधार पर, JDU के उम्मीदवार की जीत की संभावना थोड़ी अधिक है, लेकिन यह मुकाबला अत्यंत करीबी रहेगा।

संभावित विजेता उम्मीदवार: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उम्मीदवार (जयंत राज)

JDU के उम्मीदवार और वर्तमान मंत्री जयंत राज (कुशवाहा) की जीत की मजबूत संभावना है, क्योंकि उनके पक्ष में कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं।

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. सत्ता और कुशवाहा वोट बैंक का संयोजन: जयंत राज कुशवाहा समुदाय से आते हैं, जो JDU/NDA का एक मजबूत आधार है। उनका बिहार सरकार में मंत्री होना उन्हें सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को सीधे क्षेत्र में पहुँचाने की शक्ति देता है।
2. स्थिर NDA वोट आधार और पिछली तीन जीत: अमरपुर सीट पर 2010, 2015 और 2020 से लगातार JDU का कब्जा रहा है। यह लगातार तीन जीत NDA गठबंधन के पक्ष में एक स्थिर वोट बैंक (अत्यंत पिछड़ा वर्ग, सवर्ण, महादलित) को दर्शाती है, जिसका लाभ उन्हें फिर से मिलेगा।
3. विकास कार्यों का प्रचार: JDU सरकारी योजनाओं और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों (जैसे मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति, बाइपास निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण) के भरोसे चुनाव लड़ रही है। मंत्री के रूप में किए गए कार्य सत्ता-समर्थक लहर बनाने में सहायक हो सकते हैं।
4. महागठबंधन के वोटों में संभावित बिखराव: यदि महागठबंधन में RJD (यादव उम्मीदवार) और कांग्रेस (सवर्ण उम्मीदवार) के बीच टिकट को लेकर असमंजस होता है, तो RJD के पुराने यादव समर्थक और कांग्रेस के सवर्ण समर्थक वोटों का संतुलन बिगड़ सकता है।

विपक्षी उम्मीदवार (कांग्रेस/RJD) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

महागठबंधन उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. 2020 में लोजपा के कारण हुई हार: 2020 के चुनाव में LJP के उम्मीदवार मृणाल शेखर ने लगभग 24% (40,000+) वोट लाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था। इन वोटों का एक बड़ा हिस्सा (विशेषकर सवर्ण और गैर-कुशवाहा ओबीसी) NDA से कटा था। 2025 में LJP(रामविलास) के NDA में वापस आ जाने से, ये वोट NDA के पक्ष में पुनः एकजुट हो सकते हैं, जिससे महागठबंधन की राह कठिन हो जाएगी।
2. यादव-मुस्लिम (MY) वोट की सीमित निर्णायक क्षमता: अमरपुर एक ग्रामीण बहुल सीट है, जहाँ मुस्लिम मतदाता लगभग 10.5% और अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 12.88% हैं। RJD का कोर MY वोट बैंक अन्य सीटों की तरह यहाँ उतना निर्णायक नहीं है।
3. 1985 के बाद कांग्रेस की कमजोरी: कांग्रेस ने अमरपुर सीट पर अपनी आखिरी जीत 1985 में दर्ज की थी। इसके बाद इस सीट पर RJD और JDU का ही दबदबा रहा है। यह तथ्य दर्शाता है कि कांग्रेस उम्मीदवार को अपने दम पर जीत दर्ज करने के लिए एक असाधारण प्रयास करना होगा।
4. विधायक के खिलाफ सीमित एंटी-इंकम्बेंसी: स्थानीय जनता में गुड़ उद्योग के ठप होने और रोजगार को लेकर असंतोष है, लेकिन विधायक द्वारा किए गए विकास कार्यों (सड़क, मेडिकल कॉलेज) के प्रचार से यह सत्ता विरोधी लहर कमजोर पड़ सकती है।

निष्कर्ष:

अमरपुर विधानसभा सीट पर NDA गठबंधन (JDU) के उम्मीदवार जयंत राज की जीत की संभावना अधिक है।4 उनकी जीत का मुख्य आधार उनका कुशवाहा समुदाय का वोट बैंक, मंत्री पद का लाभ और 2020 में NDA से कटे वोटों का LJP के NDA में लौटने से पुन: एकजुट होना होगा। महागठबंधन (कांग्रेस/RJD) के लिए 2020 के 3,114 वोटों के अंतर को पाटना एक कठिन चुनौती होगी, क्योंकि पिछली बार का LJP फैक्टर इस बार NDA के पक्ष में काम कर सकता है। मुकाबला बेहद करीबी होगा, लेकिन वर्तमान विधायक का पलड़ा थोड़ा भारी दिखता है।

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