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आरजेडी ने 143 उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की: तेजस्वी यादव राघोपुर से लड़ेंगे चुनाव, ‘MY’ के साथ ‘A to Z’ समीकरण साधने की कोशिश

पटना, 23 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने आखिरकार अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देते हुए 143 उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। यह घोषणा दूसरे चरण के नामांकन की आखिरी तारीख को की गई, जिसने महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर चल रहे गतिरोध को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। पार्टी के सबसे बड़े चेहरे और मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी प्रसाद यादव वैशाली जिले की अपनी पारंपरिक सीट राघोपुर से ही चुनावी मैदान में उतरेंगे।

यह सूची न केवल आरजेडी के चुनावी एजेंडे को दर्शाती है, बल्कि गठबंधन के ‘बड़े भाई’ के रूप में उसने सहयोगियों (कांग्रेस, वाम दल, वीआईपी) के लिए 100 सीटें छोड़कर अपनी प्रमुख भूमिका को भी स्थापित किया है।

1. तेजस्वी का राघोपुर से चुनावी रण

तेजस्वी यादव का राघोपुर से चुनाव लड़ना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन यह सीट हमेशा चर्चा में रही है।

2. आरजेडी की ‘A to Z’ रणनीति: जातिगत विश्लेषण

आरजेडी ने इस बार ‘MY (मुस्लिम-यादव)’ समीकरण को मजबूत करते हुए ‘A to Z’ (सभी वर्गों) को साधने की कोशिश की है। 143 उम्मीदवारों की सूची का जातिगत विश्लेषण पार्टी की चुनावी गणित को स्पष्ट करता है:

जाति समूह टिकटों की संख्या (लगभग) कुल टिकटों का प्रतिशत चुनावी निहितार्थ
यादव (Y) 51-53 $\approx 36\%$ अपनी सबसे मज़बूत रीढ़ को और मज़बूत किया।
मुस्लिम (M) 19-20 $\approx 14\%$ अपने दूसरे सबसे बड़े आधार को टिकटों में उचित प्रतिनिधित्व दिया।
कुशवाहा (OBC) 15-17 $\approx 11\%$ गैर-यादव ओबीसी (कुशवाहा, कुर्मी) को साधने का प्रयास।
वैश्य/बनिया (OBC) 10-12 $\approx 7\%$ पहली बार शहरी और व्यापारिक समुदायों पर ध्यान केंद्रित किया।
दलित/अति पिछड़ा (SC/EBC) 25-30 $\approx 17-20\%$ आरक्षित सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर सामाजिक न्याय का संदेश दिया।
सवर्ण (ऊँची जातियाँ) 10-12 $\approx 7\%$ ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार को टिकट देकर ‘A to Z’ के दावे को पुष्ट किया।
महिलाएँ 24 $\approx 16.7\%$ महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सीटों में इज़ाफ़ा।

निष्कर्ष: आरजेडी ने अपनी कोर वोट बैंक (यादव और मुस्लिम) पर भरोसा जताया है, जिन्हें 50% से अधिक टिकट मिले हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (कुशवाहा, वैश्य) और सवर्णों को भी टिकट देकर यह बताने की कोशिश की है कि अब यह पार्टी केवल दो जातियों की नहीं है।

3. प्रमुख और विवादित उम्मीदवार: बाहुबली से लेकर ‘शहाबुद्दीन’ तक

आरजेडी की इस सूची में कई ऐसे नाम हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोर रहे हैं:

4. टिकट काटा गया और बगावत की चुनौती

आरजेडी ने ‘नए चेहरों’ को मौका देने और जीतने की संभावनाओं को प्राथमिकता देने के लिए कई मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है।

5. महागठबंधन में टकराव: कांग्रेस से सीधी भिड़ंत

आरजेडी की 143 उम्मीदवारों की सूची ने आधिकारिक तौर पर उन 6 से 7 सीटों पर सीधा टकराव पैदा कर दिया है, जहाँ कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इन ‘दोस्ताना लड़ाइयों’ से महागठबंधन को चुनावी नुकसान होने की आशंका है।

निष्कर्ष

आरजेडी की 143 उम्मीदवारों की सूची बिहार की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई है। एक ओर, इसने तेजस्वी यादव को महागठबंधन के निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित किया है और पार्टी के पारंपरिक ‘MY’ समीकरण के साथ अन्य जातियों को जोड़कर ‘A to Z’ का संदेश देने का प्रयास किया है। दूसरी ओर, गठबंधन के सहयोगी दलों, विशेषकर कांग्रेस के साथ टकराव, आरजेडी के टिकट वितरण से असंतुष्ट बागी नेताओं का विद्रोह, और आपराधिक पृष्ठभूमि के कुछ उम्मीदवारों को टिकट देने के फैसले ने एनडीए को हमलावर होने का मौका दे दिया है।

यह चुनाव आरजेडी के लिए केवल सत्ता में वापसी का नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व की अंतिम परीक्षा है, जिसमें उन्हें अपने सामाजिक समीकरण को मज़बूत करते हुए गठबंधन को एकजुट रखने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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