1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला
| गठबंधन/पार्टी | संभावित उम्मीदवार | स्थिति और पृष्ठभूमि |
| महागठबंधन (RJD) | राकेश कुमार रौशन (वर्तमान विधायक) | 2020 के विजेता। यादव समुदाय से आते हैं। इनके पिता भी कई बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। |
| NDA (JD(U)) | रुहेल रंजन (संभावित) | 2020 के उपविजेता चंद्रसेन प्रसाद की जगह पूर्व विधायक राजीव रंजन के पुत्र को टिकट मिल सकता है। कुर्मी समुदाय से आते हैं। |
2️⃣ 🏆 राकेश कुमार रौशन (RJD/महागठबंधन) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)
वर्तमान विधायक राकेश कुमार रौशन (RJD) के पक्ष में निम्नलिखित कारक हैं:
- मजबूत ‘माई’ समीकरण (MY Factor): इस्लामपुर सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। RJD का परंपरागत MY समीकरण यहाँ उसकी सबसे बड़ी ताकत है। राकेश कुमार रौशन के यादव समुदाय से होने के कारण यह वोट बैंक मजबूती से उनके साथ खड़ा रहता है।
- पिछली बार की जीत का अंतर: 2020 में, जब NDA मजबूत स्थिति में था, राकेश कुमार रौशन ने JD(U) उम्मीदवार को 3,698 वोटों के करीबी अंतर से हराया था।1 यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर उनकी और RJD की पकड़ मजबूत है।
- एंटी-इनकम्बेंसी का बंटवारा: इस सीट को परंपरागत रूप से JD(U) का गढ़ माना जाता था (सर्वाधिक 5 बार जीत)। 2020 में यह सीट पहली बार RJD ने जीती।2 यदि नीतीश कुमार के खिलाफ कोई एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) है, तो उसका सीधा लाभ महागठबंधन के वर्तमान विधायक को मिल सकता है।
- विरासत की राजनीति: राकेश कुमार रौशन एक राजनीतिक परिवार से आते हैं (पिता भी विधायक रहे हैं), जिससे उन्हें अपने समुदाय और परंपरागत वोटरों का निरंतर समर्थन मिलता है।
3️⃣ ❌ JD(U)/NDA की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)
NDA उम्मीदवार (रुहेल रंजन या कोई अन्य JD(U) चेहरा) की राह में निम्नलिखित चुनौतियाँ हैं:
- कोर वोट बैंक में सेंध: इस सीट पर यादव (RJD) और कुर्मी (JD(U)) निर्णायक भूमिका में हैं। 2020 में, RJD ने JD(U) के कुर्मी वोट बैंक में सेंध लगाते हुए, कुर्मी उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी।3 यदि कुर्मी-कोइरी वोटों का ध्रुवीकरण पूरी तरह से JD(U) के पक्ष में नहीं हो पाता है, तो हार सुनिश्चित है।
- बहुत कम अंतर से हार: 2020 में JD(U) केवल 2.30% वोटों के मामूली अंतर से हारी थी।4 यह बताता है कि RJD यहाँ कड़े मुकाबले में बढ़त बनाने में सफल रही थी और इस बढ़त को खत्म करना NDA के लिए बड़ी चुनौती होगी।
- स्थानीय बनाम विरासत की जंग: यदि JD(U) किसी युवा और कम अनुभवी चेहरे (जैसे रुहेल रंजन) को टिकट देती है, तो उन्हें वर्तमान विधायक राकेश रौशन (जो खुद दूसरी पीढ़ी के नेता हैं) की मौजूदा पहचान और अनुभव का सामना करना पड़ेगा।
- जन सुराज की चुनौती: इस क्षेत्र में जन सुराज पार्टी ने भी अपनी सक्रियता दिखाई है।5 यद्यपि टिकट घोषणा के बाद पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है, लेकिन यदि वह कुर्मी या अति पिछड़ा वोटों के एक छोटे से हिस्से को भी काटती है, तो इसका सीधा नुकसान NDA को होगा।
4️⃣ निर्णायक फैक्टर: कुर्मी-यादव संतुलन
- कुर्मी बनाम यादव: इस्लामपुर का चुनाव पूरी तरह से कुर्मी (JD(U)) बनाम यादव (RJD) के वर्चस्व का मुकाबला है। जिस गठबंधन को EBC, रविदास, पासवान और कोइरी जैसे अन्य महत्वपूर्ण समुदायों का निर्णायक समर्थन मिल जाएगा, उसकी जीत पक्की होगी।
- तेजस्वी का ‘जॉब’ फैक्टर: तेजस्वी यादव द्वारा रोजगार और सरकारी नौकरियों के वादे का प्रभाव यहाँ के युवा और अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं पर पड़ सकता है, जो RJD के पक्ष में माहौल बना सकता है।
- NDA का ‘विकास’ मॉडल: नीतीश कुमार के गृह जिले में हुए बुनियादी ढाँचे के विकास को NDA अपने प्रचार का मुख्य आधार बनाएगी। यदि स्थानीय मतदाता इस विकास को स्वीकारते हैं, तो JD(U) वापसी कर सकती है।
निष्कर्ष:
इस्लामपुर में मुकाबला बेहद करीबी रहने की उम्मीद है, जैसा कि 2020 में था। हालाँकि, RJD उम्मीदवार राकेश कुमार रौशन की पकड़ मजबूत ‘माई’ (MY) समीकरण और वर्तमान विधायक होने के नाते है। NDA (JD(U)) के लिए अपनी जीत की विरासत को वापस लाना मुश्किल होगा, क्योंकि उन्हें RJD के मजबूत यादव आधार में सेंध लगाने और अपने कुर्मी-कोइरी वोटों को पूरी तरह एकजुट रखने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
वर्तमान राजनीतिक रुझानों को देखते हुए, महागठबंधन (RJD) के लिए इस सीट पर अपनी जीत बरकरार रखने की संभावनाएँ थोड़ी अधिक हैं।
