परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)
उजियारपुर विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या-134) पर वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का कब्ज़ा है और यहाँ महागठबंधन एक बार फिर मजबूत स्थिति में दिख रहा है। हालांकि, इस सीट पर कुशवाहा समुदाय के उम्मीदवारों की बहुलता के कारण NDA के लिए भी वापसी का अवसर बन सकता है।
- संभावित विजेता (रुझानों के आधार पर): महागठबंधन के उम्मीदवार (RJD के आलोक कुमार मेहता)।
RJD के आलोक कुमार मेहता की जीत की संभावना उनके मजबूत यादव आधार और 2020 की बड़ी जीत के अंतर पर टिकी है।
प्रमुख दावेदार और जीत के लिए मुख्य विश्लेषण
| उम्मीदवार/पार्टी | वर्तमान स्थिति | 2020 चुनाव परिणाम | मुख्य राजनीतिक आधार |
| आलोक कुमार मेहता (RJD) | मौजूदा विधायक (लगातार दो बार) | 90,601 वोट (जीत) | यादव (RJD का कोर) |
| NDA उम्मीदवार (RLM/BJP) | राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रशांत कुमार पंकज (उपेंद्र कुशवाहा के करीबी) या BJP के शील कुमार राय। | शील कुमार राय (BJP) 67,333 वोट (हार) | सवर्ण, अति पिछड़ा वर्ग, लव-कुश (बिखराव की संभावना) |
1. आलोक कुमार मेहता (RJD) की जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन की मजबूती)
आलोक कुमार मेहता की जीत का आधार निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेगा:
- मजबूत MY समीकरण (यादव+मुस्लिम):
- उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में यादव वोटों की संख्या अधिक है। विधानसभा क्षेत्र में यादव और मुस्लिम वोट (लगभग 10%) मिलकर RJD का सबसे मजबूत आधार बनाते हैं। आलोक कुमार मेहता के नाम और RJD की विचारधारा के कारण यह वोट बैंक एकतरफा उनके पक्ष में लामबंद होता है।
- बड़ा जीत का अंतर (2020):
- 2020 के चुनाव में आलोक कुमार मेहता ने BJP के शील कुमार राय को 23,268 वोटों (12.60%) के बड़े अंतर से हराया था।1 यह अंतर इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र में उनका निजी प्रभाव और RJD का कोर वोटबैंक काफी मजबूत है।
- कुशवाहा वोटों का बिखराव (NDA के लिए चुनौती):
- इस बार उजियारपुर सीट पर चार-चार कुशवाहा उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें जनसुराज से पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह और भाजपा के बागी उपेंद्र कुशवाहा (निर्दलीय) भी शामिल हैं। कुशवाहा (लव) वोट NDA का पारंपरिक हिस्सा माना जाता है, लेकिन इतने उम्मीदवारों के मैदान में होने से यह वोट बुरी तरह बँटेगा, जिसका सीधा फायदा RJD उम्मीदवार को मिलेगा।
- एंटी-इनकम्बेंसी का कम प्रभाव:
- 2015 और 2020 में लगातार जीतने के बावजूद, उनका जीत का अंतर 2020 में बढ़ा (2015 में 29% अंतर से जीत)। इससे पता चलता है कि स्थानीय मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है।
2. NDA उम्मीदवार की जीत के लिए मुख्य चुनौतियाँ (हार के कारक)
NDA उम्मीदवार, चाहे वह RLM से प्रशांत कुमार पंकज हों या BJP से शील कुमार राय, उन्हें निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जो उनकी हार का कारण बन सकती हैं:
- कुशवाहा वोट का टूटना (सबसे बड़ी चुनौती):
- NDA के घटक राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता उपेंद्र कुशवाहा स्वयं इस क्षेत्र से आते हैं। NDA के लिए कुशवाहा वोट सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन इस सीट पर कई कुशवाहा उम्मीदवारों (RLM/JSP/निर्दलीय) के बीच सीधा विभाजन NDA की जीत की संभावनाओं को सबसे ज्यादा कम कर देगा।
- RJD के मजबूत कोर वोट बैंक में सेंध न लगा पाना:
- RJD का यादव (Y) और मुस्लिम (M) वोट लगभग 60% मतदान तक पहुंचने पर 90% से अधिक एकजुट हो जाता है। NDA का उम्मीदवार RJD के इस मजबूत आधार में पर्याप्त सेंध नहीं लगा पाता है।
- स्थानीय जातीय समीकरण की जटिलता:
- उजियारपुर विधानसभा में ब्राह्मण और राजपूत वोट भी प्रभावी हैं। इन सवर्ण वोटों को RLM उम्मीदवार के लिए पूरी तरह से एकजुट करना एक चुनौती होगी, क्योंकि BJP के कोर समर्थकों में इस सीट को RLM को दिए जाने को लेकर असंतोष हो सकता है।
निष्कर्ष
उजियारपुर विधानसभा सीट पर RJD के आलोक कुमार मेहता अपनी मजबूत सामाजिक आधार (MY समीकरण), 2020 की भारी जीत के अंतर और सबसे महत्वपूर्ण, NDA के विरोधी कुशवाहा वोटों के बिखराव के कारण स्पष्ट रूप से बढ़त बनाए हुए हैं।
NDA की जीत की एकमात्र उम्मीद यह है कि वह सभी कुशवाहा वोटों को एकजुट कर पाए (जो कि कई कुशवाहा उम्मीदवारों के कारण असंभव सा है), साथ ही अति पिछड़ा वर्ग (EBC), सवर्ण और गैर-यादव OBC वोटों को भी 2020 के मुकाबले कहीं अधिक बड़े पैमाने पर एकमुश्त अपने पक्ष में लामबंद कर सके। वर्तमान विश्लेषण के अनुसार, आलोक कुमार मेहता (RJD) की जीत की संभावना अधिक है।