Site icon winapoll.com

एकमा का निर्णायक संग्राम: क्या NDA की ‘एकजुट ताकत’ तोड़ पाएगी RJD का ‘यादव दुर्ग’?

एकमा विधानसभा सीट सारण जिले (छपरा) की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कब्जे में है।1 2020 में यह सीट RJD के श्रीकांत यादव ने जीती थी।2 हालांकि, 2025 के चुनाव के समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं, खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों में NDA की भारी बढ़त के बाद। यह सीट इस बार महागठबंधन के लिए बचाना सबसे मुश्किल साबित हो सकता है।

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

वर्तमान राजनीतिक माहौल और 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार नतीजों के आधार पर, जनता दल (यूनाइटेड) / NDA के उम्मीदवार के लिए यह सीट जीतने की संभावना अधिक (Higher) है। 2020 में विरोधी वोट के बिखराव से RJD को मिली जीत, इस बार NDA की एकता के कारण पलट सकती है।


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (JD(U) / NDA)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
लोकसभा 2024 में निर्णायक बढ़त 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA उम्मीदवार (BJP/JDU) ने एकमा विधानसभा क्षेत्र में 16,574 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की, जिससे उनका वोट शेयर 52.53% तक पहुँच गया। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश मतदाता आधार (यादव को छोड़कर) NDA के साथ मजबूती से खड़ा है।
2020 के वोटों का बिखराव समाप्त 2020 में RJD की जीत का मुख्य कारण NDA गठबंधन में दरार थी। उस चुनाव में NDA के खिलाफ BJP के बागी उम्मीदवार कामेश्वर सिंह (LJP) ने 29,992 वोट काटकर JDU की सीता देवी को नुकसान पहुँचाया था। चूंकि अब लोजपा (रामविलास) और JDU/BJP NDA के साथ हैं, यह विभाजित वोट वापस NDA के खाते में जाने की प्रबल संभावना है, जिससे NDA की जीत का अंतर काफी बढ़ जाएगा।
सीट का पारंपरिक समीकरण एकमा विधानसभा सीट पर ब्राह्मण-राजपूत (सवर्ण) और यादव वोटरों का दबदबा माना जाता है। मनोरंजन सिंह (JDU – राजपूत) ने 2010 और 2015 में लगातार दो बार यह सीट जीती थी। यदि NDA राजपूत या ब्राह्मण उम्मीदवार उतारता है, तो इन दोनों समुदायों का मजबूत समर्थन और 2020 का कटा हुआ वोट मिलाकर जीत सुनिश्चित हो सकती है।
RJD के लिए कम वोट शेयर 2020 में RJD के श्रीकांत यादव ने केवल 35.1% वोट प्राप्त करके जीत हासिल की थी, जो एक मजबूत जनादेश नहीं था। बहुमत के खिलाफ वोटों के बंटने का सीधा फायदा RJD को मिला था, जो 2025 में उपलब्ध नहीं होगा।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (RJD / महागठबंधन)

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
वोट-कटवा फैक्टर का खत्म होना RJD की जीत पूरी तरह से LJP के ‘वोट-कटवा’ फैक्टर पर निर्भर थी, जिसने JDU उम्मीदवार सीता देवी को हार दिलाई। 2025 में NDA की एकजुटता के कारण यह फैक्टर खत्म हो गया है, जिससे RJD के लिए यादव और मुस्लिम (M-Y) वोट बैंक के भरोसे जीतना असंभव हो सकता है।
वर्तमान विधायक के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) विधायक श्रीकांत यादव के खिलाफ स्थानीय मुद्दों (जैसे सड़क, सिंचाई की कमी) और संभावित सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से स्पष्ट होता है।
कम मतदान प्रतिशत एकमा में मतदान प्रतिशत लगातार कम रहा है (2020 में केवल 50.71%)। निम्न मतदान प्रतिशत अक्सर उस दल को नुकसान पहुंचाता है जो अपने आधार वोट को निर्णायक रूप से बूथ तक नहीं ला पाता है। यदि RJD अपने M-Y वोट बैंक को पूरी तरह से सक्रिय नहीं कर पाती है, तो NDA की बढ़त को कम करना मुश्किल होगा।
अन्य प्रमुख जाति समूहों का ध्रुवीकरण सीट पर ब्राह्मण, राजपूत और अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) के मतदाता (जो 2020 में बंटे थे) इस बार NDA उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं। RJD के यादव उम्मीदवार के सामने, गैर-यादव OBC और सवर्ण मतदाता NDA को एक मजबूत विकल्प मानकर पूरी तरह से ध्रुवीकृत हो सकते हैं।

यह विश्लेषण उपलब्ध चुनावी डेटा, जातीय समीकरणों और हालिया राजनीतिक रुझानों पर आधारित है। 2020 में RJD की जीत का मुख्य आधार NDA का अंदरूनी कलह था। 2025 में NDA की एकता और लोकसभा चुनाव की बड़ी बढ़त एकमा सीट पर RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

Exit mobile version