बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुजफ्फरपुर जिले की औराई सीट पर मुकाबला इस बार ऐतिहासिक होने जा रहा है। यह सीट दशकों तक यादव समुदाय का गढ़ रही है, लेकिन 2025 में NDA और महागठबंधन (INDIA) दोनों ने ही मल्लाह (निषाद) समुदाय के उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर बड़ा उलटफेर किया है।
मौजूदा राजनीतिक समीकरण, 2020 के रिकॉर्ड जीत के अंतर और नए जातीय समीकरणों को देखते हुए, औराई विधानसभा सीट पर NDA गठबंधन (BJP) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है, हालांकि ‘मल्लाह बनाम मल्लाह’ का मुकाबला कांटे का होगा।
संभावित विजेता: रमा निषाद (भारतीय जनता पार्टी – BJP) – NDA (यदि BJP, पूर्व विधायक रामसूरत राय का टिकट काटकर अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद को उतारती है, जैसा कि खबरों में है)
रमा निषाद (BJP-NDA) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:
- यादव गढ़ में ‘मल्लाह’ को टिकट: NDA की सोशल इंजीनियरिंग:
- औराई सीट पर सबसे बड़ी आबादी यादव समुदाय की है, जिसके बाद मुस्लिम () और अनुसूचित जाति () के मतदाता हैं।
- BJP ने यहां से मल्लाह (निषाद) समुदाय की उम्मीदवार रमा निषाद को टिकट देकर एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। यह कदम यादव वोटों को काटने और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। निषाद (मल्लाह) एक बड़ा और मुखर EBC समूह है।
- 2020 की प्रचंड जीत का आधार (Ram Surat Ray का प्रदर्शन):
- 2020 के चुनाव में, BJP के राम सूरत कुमार (राय/यादव, जो अब निषाद समुदाय से नहीं हैं) ने CPI(ML) के मो. आफताब आलम को 47,866 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया था। यह इस सीट के इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी।
- यह जीत दर्शाती है कि NDA के पक्ष में उच्च जाति (सवर्ण), वैश्य और EBC का मजबूत ध्रुवीकरण था, जिसने यादव और मुस्लिम वोटों के दबदबे को भी तोड़ दिया। रमा निषाद को भी इसी ध्रुवीकरण का फायदा मिलेगा।
- विकास का मुद्दा और केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव:
- 2020 के बड़े जनादेश के बाद, BJP उम्मीदवार और पूर्व मंत्री रामसूरत राय के पक्ष में किए गए विकास कार्यों और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पड़ने वाले वोटों का सीधा लाभ रमा निषाद को मिलेगा।
- महागठबंधन के वोट बँटवारे का फायदा:
- RJD का परंपरागत यादव वोट बैंक इस बार मुख्य मुकाबले से बाहर है, जिससे यादव मतदाता असमंजस में हैं। कुछ यादव वोट निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे गणेश यादव के पुत्र को जा सकते हैं, जिससे महागठबंधन (VIP) उम्मीदवार के यादव वोटों में कमी आएगी।
भोगेंद्र सहनी (VIP) की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
यदि महागठबंधन इस बार विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के भोगेंद्र सहनी (मल्लाह उम्मीदवार) को मैदान में उतारता है, तो उनके सामने निम्नलिखित प्रतिकूल कारक होंगे:
- यादव मतदाता का ‘बाहर’ होना:
- औराई की राजनीतिक जमीन को यादवों का गढ़ माना जाता है। RJD ने यह सीट VIP को देकर अपने कोर यादव (और संभावित मुस्लिम) मतदाता को अप्रसन्न कर दिया है। यह मतदाता या तो चुनाव से दूर रह सकता है, या निर्दलीय उम्मीदवार (यदि कोई मजबूत यादव नेता मैदान में हो) की ओर जा सकता है, जिससे VIP उम्मीदवार को कमजोर करेगा।
- VIP की बदलती निष्ठा:
- VIP और उसके प्रमुख मुकेश सहनी की गठबंधन के प्रति बदलती निष्ठा (पहले NDA में, फिर महागठबंधन में) मतदाताओं के बीच विश्वास की कमी पैदा कर सकती है।
- NDA की तुलना में कमजोर ‘ध्रुवीकरण’:
- 2020 में महागठबंधन के पास RJD, कांग्रेस और CPI(ML) जैसे मजबूत दल थे, फिर भी जीत का अंतर वोटों का रहा था। 2025 में, महागठबंधन के पास यादव उम्मीदवार न होने के कारण, वह EBC और सवर्ण वोटों में सेंध लगाने की स्थिति में नहीं होगा, जबकि NDA का ध्रुवीकरण बरकरार रहने की संभावना है।
- मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण का बिखराव:
- औराई में MY समीकरण मजबूत है, लेकिन यादव उम्मीदवार न होने पर यादव वोट निर्दोष हो सकता है। यदि मुस्लिम वोट भी आंशिक रूप से CPI(ML) या अन्य मुस्लिम उम्मीदवार की ओर मुड़ता है, तो VIP उम्मीदवार की जीत की संभावना खत्म हो जाएगी।
निष्कर्ष और पूर्वानुमान:
औराई सीट पर इस बार की लड़ाई मल्लाह (निषाद) बनाम मल्लाह (निषाद) होने के कारण जाति की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। हालांकि, यह मुकाबला मल्लाह समुदाय के वोटों से नहीं, बल्कि बाकी बचे हुए सवर्ण, EBC, दलित, और यादव वोटों के ध्रुवीकरण से तय होगा।
NDA की रमा निषाद (BJP) अपने साथ NDA का मजबूत सवर्ण, वैश्य और EBC आधार लेकर चल रही हैं, जबकि महागठबंधन के भोगेंद्र सहनी (VIP) को अपने परंपरागत यादव वोट को एकजुट करने में भारी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
इसलिए, रमा निषाद (BJP-NDA) के लिए यह सीट जीतना सबसे अधिक संभावित है, क्योंकि NDA का सामाजिक आधार और 2020 की प्रचंड जीत का विश्वास उन्हें बढ़त दिलाएगा।
