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कदवा का किला: क्या डॉ. शकील अहमद खान (कांग्रेस) हैट्रिक लगाएंगे, या एनडीए का ‘गोस्वामी दांव’ बागी फैक्टर को खत्म कर देगा?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कटिहार जिले की कदवा सीट एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प मुकाबला पेश कर रही है। यह सीट वर्तमान में महागठबंधन (कांग्रेस) के मजबूत नेता डॉ. शकील अहमद खान के पास है, जिन्होंने लगातार दो बार (2015 और 2020) जीत दर्ज की है। एनडीए इस बार पूर्व सांसद दुलाल चंद्र गोस्वामी (JDU/NDA) को उतारकर इस सीट को वापस पाने के लिए बड़ी रणनीति बना रही है।

ऐतिहासिक और जातीय समीकरणों के गहन विश्लेषण के आधार पर, मुकाबला कड़ा है, लेकिन डॉ. शकील अहमद खान के जीतने की संभावना अधिक है।


विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन – डॉ. शकील अहमद खान)

संभावित विजेता: डॉ. शकील अहमद खान (कांग्रेस)

1. “MY” (मुस्लिम-यादव) समीकरण पर मजबूत पकड़:

2. 2020 की निर्णायक जीत और “एंटी-इनकम्बेंसी” का अभाव:

3. निषाद समुदाय में भी घुसपैठ की संभावना:


अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (NDA – दुलाल चंद्र गोस्वामी)

संभावित उपविजेता: दुलाल चंद्र गोस्वामी (JDU/NDA)

1. कमजोर जातीय समीकरण और ‘गोस्वामी दांव’ का जोखिम:

2. मुख्य आधार वोट का बिखराव (EBC/OBC):

3. स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा:


निष्कर्ष

कदवा सीट पर डॉ. शकील अहमद खान (कांग्रेस) की जीत की संभावना अधिक है, जिसका मुख्य आधार उनका मजबूत मुस्लिम जनाधार और महागठबंधन का MY समीकरण है। उन्हें 2020 में एनडीए के वोट विभाजन से भारी बढ़त मिली थी। एनडीए के लिए यह सीट जीतना तब तक मुश्किल होगा जब तक कि वह अपने पारंपरिक वोट बैंक (EBC, सवर्ण) को पूरी तरह एकजुट नहीं कर लेता और साथ ही मुस्लिम वोट में एक बड़ी सेंध नहीं लगा लेता। एनडीए के दुलाल चंद्र गोस्वामी के लिए सबसे बड़ी चुनौती एनडीए के भीतर के बागियों को साधने और डॉ. शकील अहमद खान के भारी व्यक्तिगत जनाधार को भेदने की होगी।

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