रोहतास जिले की करगहर विधानसभा सीट (संख्या-209) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सबसे दिलचस्प और चर्चित सीट बन चुकी है। यह क्षेत्र न केवल अपने राजनीतिक उतार-चढ़ाव के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की जनता के “हर बार नए परिवर्तन” के रुझान ने इसे एक अनोखी पहचान दी है। 2010 से लेकर 2020 तक हर बार किसी नई पार्टी ने जीत दर्ज की — और 2025 में भी इस रोमांच का नया अध्याय लिखा जा रहा है ।
क्षेत्र का भूगोल और सामाजिक संरचना
करगहर प्रखंड पूरी तरह ग्रामीण इलाका है, जो सासाराम अनुमंडल के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र में कुल 257 गांव हैं, जिनमें से लगभग 198 आबाद और 59 निर्जन हैं। यह सीट सामान्य श्रेणी की है और सासाराम लोकसभा क्षेत्र (अनुसूचित जाति) में आती है ।
2020 के चुनाव तक इसकी मतदाता संख्या 3,24,906 थी, जो 2025 में बढ़कर 3,29,466 हो गई है।
2020 में 59.85% मतदान हुआ था। अनुसूचित जातियों की जनसंख्या लगभग 20.41%, जबकि मुस्लिम मतदाता करीब 6.4% हैं ।
यहाँ की सामाजिक संरचना में यादव, कुशवाहा, राजपूत, भूमिहार, पासवान और मुस्लिम मतदाता प्रभावशाली माने जाते हैं। इसके अलावा गाँवों में कोइरी और कुर्मी समुदाय का वोट भी निर्णायक भूमिका निभाता है ।
राजनीतिक यात्रा: हर बार बदलते समीकरण
करगहर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। तब से लेकर अब तक, यहाँ कांग्रेस, जदयू और बसपा हर किसी को जीत का स्वाद मिल चुका है।
यह सीट हर बार बदलाव का प्रतीक रही है:
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2010: जदयू के रामधनी सिंह ने जीत दर्ज की।
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2015: जदयू के बशिष्ठ सिंह ने पुनः विजय प्राप्त की।
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2020: कांग्रेस के संतोष कुमार मिश्रा ने नया इतिहास रचा और सीट छीन ली।
हर बार का परिणाम दर्शाता है कि करगहर की जनता किसी एक दल या व्यक्ति को स्थायी समर्थन नहीं देती, बल्कि उम्मीदवार की छवि, स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों को प्राथमिकता देती है ।
2020 का चुनाव परिणाम
2020 में कांग्रेस ने यहां अप्रत्याशित जीत हासिल की। युवा चेहरे संतोष कुमार मिश्रा ने जनता दल (यूनाइटेड) के बशिष्ठ सिंह को मात्र 4,083 वोटों से हराया।
यह जीत करगहर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पल थी क्योंकि लगातार दो बार जीतने वाले जदयू प्रत्याशी को जनता ने नकार दिया।
| उम्मीदवार का नाम | दल | प्राप्त वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| संतोष कुमार मिश्रा | कांग्रेस | 59,763 | 30.76% |
| बशिष्ठ सिंह | जदयू | 55,680 | 28.66% |
| उदय प्रताप सिंह | बसपा | 47,321 | 24.35% |
| राकेश कुमार सिंह | लोजपा | 16,988 | 8.74% |
कांग्रेस की जीत के प्रमुख कारण रहे —
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स्थानीय उम्मीदवार की साफ छवि,
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जदयू के प्रति जनता की नाराजगी,
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रोजगार और कृषि को लेकर जमीनी अभियान ।
करगहर का 2025 चुनाव — युवा बनाम अनुभव की टक्कर
2025 में करगहर विधानसभा का माहौल पहले से कहीं अधिक गर्म है।
यहाँ अब कांग्रेस के मौजूदा विधायक संतोष कुमार मिश्रा पुनः मैदान में हैं, जो शिक्षा व महिला सशक्तिकरण पर अपने कार्यों के दम पर जनता से वोट मांग रहे हैं।
जदयू ने एक बार फिर बशिष्ठ सिंह को तीसरी बार उम्मीदवार बनाया है — जो कोशिश कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार-विरोधी और विकासवादी छवि से पुरानी पकड़ वापस हासिल करें ।
इसके अलावा भोजपुरी स्टार और जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार रितेश पांडे ने राजनीतिक मुकाबले को और भी रोचक बना दिया है। उन्होंने अपने प्रभावशाली जनसंपर्क और युवा अपील से पूरा माहौल बदल दिया है।
उनके शपथ पत्र के अनुसार, उनकी संपत्ति लगभग 2 करोड़ 29 लाख रुपये है और वे तीन शानदार गाड़ियों के स्वामी हैं ।
भाजपा फिलहाल इस सीट पर जदयू के साथ गठबंधन में है और स्वतंत्र प्रत्याशी नहीं उतारा है।
जातीय समीकरण और वोट बैंक
करगहर का चुनाव पूरी तरह जातीय और सामाजिक समीकरणों से प्रभावित होता है।
यहाँ किसी एक जाति का पूर्ण प्रभुत्व नहीं है, जिससे हर दल को संतुलन साधने की आवश्यकता होती है।
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ओबीसी (यादव, कुशवाहा, कोइरी): लगभग 42%
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उच्च जातियाँ (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण): 25%
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दलित (मुख्यतः पासवान और रविदास समुदाय): 20%
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मुस्लिम मतदाता: 6–7%
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अन्य: 5%
2020 में यादव और मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस के पक्ष में गया था।
2025 में संभावना है कि कुशवाहा और पासवान समुदाय का बड़ा हिस्सा जनसुराज पार्टी की ओर जा सकता है, क्योंकि रितेश पांडे की लोकप्रियता गाँव–गाँव में तेजी से बढ़ी है।
स्थानीय मुद्दे: जनता की प्राथमिकताएँ
करगहर विधानसभा पूरी तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित है। स्थानीय स्तर पर प्रमुख मुद्दे हैं:
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कृषि के लिए नहर और सिंचाई व्यवस्था का अभाव
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टूटी-फूटी सड़कें और परिवहन की कठिनाइयाँ
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युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी
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महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता
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बिजली आपूर्ति की अनियमितता
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शिक्षा संस्थानों की गिरती स्थिति
2025 में सभी दल इन मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस “ग्राम शिक्षा मिशन” और “महिला रोजगार योजना” को प्रचारित कर रही है, जबकि जदयू “हर खेत तक पानी” योजना पर बल दे रही है।
जनसुराज पार्टी युवाओं को आकर्षित करने के लिए “स्थानीय उद्योग और फिल्म सिटी” का वादा कर रही है ।
2025 के प्रमुख प्रत्याशी
| पार्टी | प्रत्याशी | विशेषता |
|---|---|---|
| कांग्रेस | संतोष कुमार मिश्रा | वर्तमान विधायक, स्वच्छ छवि, विकास पर केंद्रित |
| जदयू | बशिष्ठ सिंह | वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक, संगठनात्मक पकड़ मजबूत |
| जनसुराज पार्टी | रितेश पांडे | फिल्म स्टार, युवा अपील और नई ऊर्जा का चेहरा |
| बसपा | उदय प्रताप सिंह | पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व |
| लोजपा (राम विलास) | राकेश कुमार सिंह | गरीब और मजदूर वर्ग पर फोकस |
ऐतिहासिक चुनावी रिकॉर्ड (1977–2020)
| वर्ष | विजेता | दल | मत | उपविजेता | दल | अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | संतोष कुमार मिश्रा | कांग्रेस | 59,763 | बशिष्ठ सिंह | जदयू | 4,083 |
| 2015 | बशिष्ठ सिंह | जदयू | 57,018 | बीरेंद्र सिंह | बीएलएसपी | 12,907 |
| 2010 | रामधनी सिंह | जदयू | 54,190 | शिवशंकर सिंह | लोजपा | 13,197 |
| 2005 | सीता सुंदरी देवी | बसपा | 41,938 | रामधनी सिंह | जदयू | 12,273 |
| 2000 | लालू प्रसाद | राजद | 64,085 | रामानंद यादव | भाजपा | 17,555 |
| 1995 | लालू प्रसाद | जनता दल | 49,840 | विजय सिंह यादव | भाजपा | 23,860 |
| 1990 | विजेंद्र राय | जनता दल | 56,479 | अभय कुमार सिंह | भाजपा | 22,955 |
| 1985 | बिजेंद्र राय | निर्दलीय | 29,757 | पृथ्वीराज सिन्हा | कांग्रेस | 12,808 |
| 1980 | बुधदेव सिंह | कांग्रेस (I) | 21,575 | सुखसागर सिंह | कांग्रेस (U) | 1,970 |
| 1977 | रामलखन सिंह यादव | कांग्रेस | 33,989 | छबिला सिंह | जनता पार्टी | 4,697 |
महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका
2020 के चुनाव में करगहर के महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 59% था, जबकि पुरुषों का 62%।
इस बार महिला वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि कांग्रेस सरकार के ‘महिला स्वावलंबन कार्यक्रम’ और सरकारी नौकरियों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने इसे एक नया एजेंडा बना दिया है।
वहीं, रितेश पांडे का फैनबेस युवाओं को आकर्षित कर रहा है, जिससे कांग्रेस और जदयू दोनों को चुनौती मिल रही है ।
2025 का चुनावी परिदृश्य
चुनाव आयोग के अनुसार, करगहर सीट पर दूसरे चरण (11 नवंबर) को मतदान होगा और 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
नामांकन 13 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 का करगहर चुनाव बिहार का “ट्रेंड सेटिंग” परिणाम साबित हो सकता है।
यहाँ सत्ता परिवर्तन की परंपरा, जातीय गतिशीलता, और युवाओं की बढ़ती भागीदारी—तीनों मिलकर एक ऐसा परिणाम ला सकते हैं जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई देगी।
निष्कर्ष
करगहर विधानसभा सीट बिहार की उन विरासत सीटों में से है जो हर चुनाव में स्थायी सोच को तोड़ती है।
यहाँ मतदाता न जाति पर, न परंपरा पर अंध भरोसा करते हैं — बल्कि मुद्दे, चेहरे और काम के आधार पर फैसला देते हैं।
2025 में करगहर की धरती पर पुरानी राजनीति और नई पीढ़ी का जो टकराव दिख रहा है, वह समूचे बिहार के लोकतांत्रिक संक्रमण की कहानी कहता है।
चाहे संतोष मिश्रा अपनी प्रतिष्ठा बचा पाएं, या बशिष्ठ सिंह पुनरागमन कर जाएँ, या रितेश पांडे नया चेहरा बनकर उभरें — एक बात निश्चित है कि करगहर 2025 में बिहार की सियासत का सबसे रोमांचक पृष्ठ लिखेगा ।
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