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कहलगांव की रणभूमि 2025: क्या कांग्रेस का गढ़ ‘विद्रोही’ JDU और RJD की आपसी लड़ाई में BJP को फिर जिताएगा?

 

कहलगांव विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

कहलगांव सीट, जो कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह का गढ़ थी, 2020 में NDA के खाते में चली गई।1 2025 में, इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है, क्योंकि महागठबंधन (MGB) में विभाजन हो गया है और कांग्रेस, RJD तथा JDU (सदानंद सिंह के बेटे शुभानंद मुकेश के JDU में शामिल होने के कारण) अलग-अलग उम्मीदवार उतार रहे हैं।

वर्तमान परिदृश्य और विभाजनकारी राजनीति को देखते हुए, NDA गठबंधन (संभावित रूप से BJP) के लिए जीत दोहराने की अधिक संभावना है, खासकर तब जब महागठबंधन का वोट स्पष्ट रूप से विभाजित हो रहा हो।

संभावित विजेता उम्मीदवार (NDA/BJP या गठबंधन):

NDA गठबंधन के उम्मीदवार (या तो निवर्तमान विधायक पवन कुमार यादव या NDA का कोई अन्य उम्मीदवार) की जीत की अधिक संभावना है।

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. महागठबंधन के वोटों का भारी विभाजन (त्रिकोणीय संघर्ष): यह NDA के लिए सबसे बड़ा लाभ है। सदानंद सिंह के बेटे शुभानंद मुकेश (JDU), RJD के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण सिंह के अलग-अलग चुनाव लड़ने से MY (मुस्लिम-यादव) और कुर्मी वोटों में सीधा बँटवारा होगा। JDU (शुभानंद) सदानंद सिंह की विरासत और कुर्मी वोटों पर दावा करेंगे, RJD (रजनीश) शुद्ध MY वोटों पर, और कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक पर। इस विभाजन का सीधा लाभ NDA को मिलेगा।
2. 2020 की रिकॉर्ड तोड़ जीत: BJP के पवन कुमार यादव ने 2020 में कांग्रेस के शुभानंद मुकेश को 42,893 वोटों के विशाल अंतर से हराया था। यह अंतर इस सीट पर एक रिकॉर्ड है। यह आँकड़ा NDA की लहर और पवन यादव की व्यक्तिगत लोकप्रियता (या यादव वोट बैंक में सेंधमारी) को दर्शाता है।
3. मजबूत यादव वोट बैंक पर दावा (BJP): पवन कुमार यादव खुद यादव समुदाय से आते हैं। NDA के साथ रहने पर, वह RJD के पारंपरिक यादव वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी कर सकते हैं। यादव वोटरों का एक हिस्सा ‘विकास’ के नाम पर और ‘प्रधानमंत्री मोदी’ के चेहरे पर NDA को मिल सकता है।
4. कोर NDA वोट बैंक का एकीकरण: NDA का कोर वोट बैंक (सवर्ण, वैश्य, अति पिछड़ा वर्ग का बड़ा हिस्सा) एक मजबूत गठबंधन के तहत एक उम्मीदवार को वोट देगा। महागठबंधन में तीन उम्मीदवार होने से, NDA का एकजुट वोट एक बड़ा निर्णायक कारक बन जाएगा।
5. 2024 लोकसभा का रुझान: 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA (JDU) को इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पर 29,766 वोटों की बढ़त मिली थी, जो यह दर्शाता है कि NDA के लिए जमीन मजबूत है।

अन्य उम्मीदवार (महागठबंधन उम्मीदवार) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

इस सीट पर महागठबंधन की ओर से JDU (शुभानंद मुकेश), RJD (रजनीश भारती), और INC (प्रवीण सिंह) प्रमुख दावेदार हो सकते हैं।

महागठबंधन उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. वोटों का भयंकर बिखराव (हार की मुख्य वजह): RJD, JDU और INC के तीनों उम्मीदवारों के बीच MY (मुस्लिम-यादव) और कुर्मी-कोइरी वोटों का विभाजन होगा। यादव वोट पवन यादव (BJP) और रजनीश भारती (RJD) में; मुस्लिम वोट RJD और INC में (क्योंकि कांग्रेस ने भी उम्मीदवार दिया है); और कुर्मी-कोइरी वोट शुभानंद मुकेश (JDU) और अन्य में बँटेंगे। यह बिखराव उन्हें जीत के लिए आवश्यक कुल वोट से दूर कर देगा।
2. सदानंद सिंह की विरासत का विभाजन: पूर्व विधायक सदानंद सिंह (कांग्रेस) की विरासत के वोट उनके बेटे शुभानंद मुकेश (JDU) और कांग्रेस के प्रवीण सिंह के बीच बँटेंगे। पिता की विरासत एकमुश्त शुभानंद को नहीं मिल पाएगी, जिससे कांग्रेस का गढ़ भी कमजोर हो जाएगा।
3. 2020 की भारी हार को पलटने की चुनौती: महागठबंधन के उम्मीदवार को न केवल 2020 के 42,893 वोटों के विशाल अंतर को पाटना है, बल्कि विभाजनकारी राजनीति के कारण बँटते हुए वोटों को भी संभालना है। यह लगभग असंभव चुनौती है।
4. क्षेत्रीय असंतोष: चूँकि RJD ने मौजूदा विधायक (शुभानंद मुकेश) को दरकिनार करके एक नए उम्मीदवार (रजनीश भारती) को उतारा है (या JDU में शामिल होने के कारण), इससे स्थानीय MY वोट बैंक के एक हिस्से में असंतोष पैदा हो सकता है।

निष्कर्ष:

कहलगांव विधानसभा सीट पर 2025 का चुनाव महागठबंधन के आंतरिक संघर्ष के कारण NDA के लिए आसान हो सकता है। यदि RJD, JDU और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला बना रहता है, तो BJP के पवन कुमार यादव या NDA के किसी भी उम्मीदवार के लिए जीत दोहराने की संभावना सबसे अधिक है। महागठबंधन के नेताओं को अपनी हार टालने के लिए आपसी सामंजस्य बिठाकर किसी एक उम्मीदवार को मजबूत करना होगा, जो वर्तमान परिदृश्य में मुश्किल दिखता है।

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