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काराकाट विधानसभा: बिहार की कम्युनिस्ट शक्ति और बहुजातीय राजनीति का संघर्ष – चुनाव 2025 की सम्पूर्ण जानकारी

काराकाट विधानसभा बिहार के रोहतास जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह विधानसभा क्षेत्र राजनीति में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन) का गढ़ माना जाता रहा है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के संदर्भ में काराकाट की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों की विस्तृत व्याख्या इस लेख में की गई है। पिछले चुनावों और वर्तमान स्थिति का विश्लेषण यह समझने में मदद करेगा कि काराकाट की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में किस दिशा का चुनाव करेगी और इसका राज्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।​


काराकाट विधानसभा क्षेत्र का भूगोल और सामाजिक संरचना

काराकाट विधानसभा रोहतास जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है, जो काराकाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे कृषि के लिए उपयुक्त बनाती है लेकिन यहां औद्योगिक विकास सीमित रहा है। सोन नदी के पास होने के कारण जलसंधारण और सिंचाई में सुविधा है।
यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण है जहाँ विभिन्न जातीय मंच मौजूद हैं, जिनमें यादव, कुशवाहा, ब्राह्मण, राजपूत, दलित समुदाय और मुसलमान शामिल हैं। इसी जातीय विविधता ने यहां की राजनीति को जटिल और गतिशील बनाया है।​


राजनीतिक इतिहास

काराकाट की राजनीति 1967 से शुरू हुआ करती है। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (सं.सो.) के तुलसी यादव ने पहली बार इस सीट को जीता था। इसके बाद कई बार कांग्रेस, जनसंघ, जनता दल और कम्युनिस्ट पार्टियों के प्रतिनिधियों ने यहां पद हासिल किया।
कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन) के अरुण सिंह ने 4 बार यहां जीत देखी है, जो इस सीट का महत्वपूर्ण चेहरा हैं। 2020 की विधानसभा चुनाव में भी अरुण सिंह ने भाजपा के राजेश्वर राज को भारी वोट मार्जिन से हराया था।
2015 में राजद के संजय कुमार सिंह की जीत ने भी इस क्षेत्र में राजद के प्रभाव को दर्शाया।
काराकाट विधानसभा सीट पर भाजपा ने अब तक कभी जीत हासिल नहीं की है, जो इस क्षेत्र की कम्युनिस्ट और अन्य विपक्षी राजनीतिक जेन्डर की ताकत को दर्शाता है।​


पिछले चुनावों का विश्लेषण और 2020 का परिणाम

2020 का चुनाव काराकाट के लिए महत्वपूर्ण मोड़ था, जब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन) से अरुण सिंह ने भारी बहुमत से चुनाव जीता। उन्होंने भाजपा के राजेश्वर राज को लगभग 18,189 वोटों के अंतर से हराया।
इस चुनाव में वोट प्रतिशत 48.19% था, जो चुनावी भागीदारी के संदर्भ में अच्छा माना गया।
2015 और 2010 के चुनावों में राजद और जदयू के बीच कड़ी टक्कर थी, लेकिन 2020 ने इस सीट को कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सुरक्षित क्षेत्र बना दिया।​


2025 चुनावी माहौल और संभावनाएँ

2025 के बिहार चुनावों में काराकाट सीट पर पहली बार भाजपा के खिलाफ सीपीआई (एमएल)(एल) और राजद का मुकाबला होगा।
अरुण सिंह इस बार फिर सीपीआई(एमएल)(एल) के टिकट पर मैदान में हैं, जिन्होंने यहां की जनता के बीच मजबूती कायम कर रखी है।
राजद की ओर से संजय कुमार सिंह संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं, जो क्षेत्र में अपने प्रतिस्पर्धी नेता के रूप में देखे जाते हैं।
भाजपा भी इस सीट पर गतिविधियां बढ़ा रही है, हालांकि पिछले चुनाव में उनकी हार ने स्थानीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
राजनीतिक समीकरण जातीय और विकास मुद्दों पर आधारित हैं, खासकर दलित, पिछड़ा वर्ग और युवा वोटरों की भूमिका निर्णायक होगी।​


जातीय समीकरण और सामाजिक प्रभाव

काराकाट की राजनीति में जाति और समुदायों का बड़ा प्रभाव है। यादव, कुशवाहा, दलित वर्ग, मुसलमान और उच्च जाति के वर्ग यहां संतुलित ताकत रखते हैं।
कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव यहां की ग्रामीण आबादी, खासकर दलितों और गरीब किसानों में अधिक है। चुनावी दंगल में जातीय गठजोड़ यहाँ के समीकरण को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं।
मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी चुनाव परिणामों पर प्रभाव डालती है, जो सत्ता के समीकरण को और विंदित करती है।​


स्थानीय मुद्दे और चुनावी प्राथमिकताएँ


महिला तथा युवा मतदाता

काराकाट विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है, जो चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बनाए रखना चुनावी राजनीति की प्राथमिकता बनता जा रहा है।
युवा मतदाता मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा, और नई टेक्नोलॉजी से जुड़ी नीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। राजनीतिक दल इसी को ध्यान में रखकर युवा नीति और परियोजनाएं लेकर आते हैं।​


चुनाव कार्यक्रम

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में काराकाट विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान 11 नवंबर 2025 को होगा।
नामांकन की प्रक्रिया 13 से 20 अक्टूबर तक चलेगी और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।​


निष्कर्ष

काराकाट विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में खास स्थान रखता है।
यहाँ की राजनीति बहुआयामी, जातिगत और सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी हुई है।
2025 का चुनाव यहां के मतदाताओं के लिए विकास, न्याय, और सामाजिक भागीदारी का फैसला होगा।
अरुण सिंह और अन्य राजनीतिक दिग्गजों के बीच मुकाबला इस सीट को बिहार चुनावों का एक निर्णायक मोर्चा बनाता है।
काराकाट का यह चुनाव बिहार में कम्युनिस्ट विचारधारा और व्यापक सामाजिक मतदान के बीच का संग्राम है, जो लोकतंत्र और जनप्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक परीक्षा है।

 

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