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कुचायकोट विधानसभा चुनाव 2025: JD(U) और कांग्रेस के बीच गरमाई सियासत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में गोपालगंज जिले की कुचायकोट विधानसभा सीट (क्रमांक 102) राजनीतिक रूप से सबसे चर्चित क्षेत्रों में से एक है। विधानसभा क्षेत्र में इस बार जदयू और कांग्रेस के प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, जिसमें मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र 2008 के पार्टी परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया है, इससे पहले इसे कटेया कहा जाता था और वर्ष 1972 तक यह क्षेत्र इसी नाम से जाना जाता था। इस सीट पर अब तक कुल 8 बार चुनाव हुए हैं, जिनमें कांग्रेस ने 4 बार, जदयू ने 3 बार, जनता पार्टी और एक निर्दलीय को एक-एक बार जीत मिली है। वर्तमान में यह सीट जदयू के हाथों में है। 2020 का चुनाव जदयू के अमरेंद्र कुमार पांडेय के नाम रहा जिन्होंने कांग्रेस के काली पांडेय को 20,630 वोटों के अंतर से हराया था ।​


क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और विकास

कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र गोपालगंज जिले के कुचायकोट और पंचदेवरी प्रखंडों की सभी ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना है। यह क्षेत्र अधिकतर ग्रामीण है, जहां कुल बूथों की संख्या 346 है। इसके अंतर्गत कोई शहरी क्षेत्र नहीं आता। कुचायकोट का विकास कृषि पर आधारित है, जहां धान, गेहूं और गन्ना प्रमुख फसलें हैं। गंडक नदी की नहर प्रणाली यहां के किसानों के लिए सिंचाई का मुख्य स्रोत है। हालांकि, क्षेत्र में सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से विकास हुआ है, परंतु स्थानीय लोग अब भी बेहतर रोजगार अवसरों की मांग कर रहे हैं। गुजरे वर्षों में कई सुविधाएं पहुंची हैं जिससे विकास की गति में वृद्धि हुई ।​


चुनावी इतिहास और राजनीतिक प्रतिनिधि

कटेया विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन के पूर्व, कुचायकोट सीट 1972 तक इसी नाम से अस्तित्व में थी। वहां से 2008 के बाद कुचायकोट के नाम से सीट बनी। सीट पर अब तक कांग्रेस, जदयू और जनता पार्टी जैसे दलों ने जीत दर्ज की है। वर्तमान विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय हैं, जो जदयू के हैं और 2020 में यह सीट कांग्रेस के काली पांडेय को कड़ी टक्कर देते हुए जीती थी।

राजनीति में इसका खास महत्त्व है, क्योंकि यह गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां कई प्रमुख नेता सक्रिय हैं। अमरेंद्र पांडेय कुचायकोट की जदयू की मजबूत छवि हैं, जिनके पास लगातार दूसरी बार जीत का अनुभव है।

वर्ष विजेता पार्टी वोट अंतर
2020 अमरेंद्र कुमार पांडेय जदयू 20,630
2015 अमरेंद्र कुमार पांडेय जदयू 3,562
2010 अमरेंद्र कुमार पांडेय जदयू
2005 विभिन्न उम्मीदवार विविध

सामाजिक-जातीय समीकरण

कुचायकोट की राजनीति में जातीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कुल मतदाताओं में मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण समुदाय एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत रखते हैं। ये तीनों मिलाकर लगभग 35% वोट बैंक बनाते हैं जो चुनाव के परिणाम को सीधा प्रभावित करता है।

जातिगत मतदाता समीकरण के कारण इस सीट पर वोट बैंक राजनीति बहुत सशक्त है और पार्टियां इन्हें ध्यान में रखकर रणनीति बनाती हैं।


मुख्य राजनीतिक मुद्दे

  1. बेरोजगारी और पलायन:
    कुचायकोट में रोजगार की कमी युवाओं के लिए चिंता का विषय है, और कई लोग बाहर पलायन कर गए हैं। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के बाद भी यहाँ उद्योग का अभाव है।

  2. सड़क और संचार:
    क्षेत्रीय स्तर पर सड़क नेटवर्क और परिवहन सुविधाएं अभी भी कमजोर मानी जाती हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास बाधित होता है।

  3. कृषि और सिंचाई:
    गंडक नदी की नहर सिंचाई व्यवस्था पर क्षेत्र के किसानों की निर्भरता है, लेकिन जल आपूर्ति और कटाव की समस्या रहती है।

  4. शिक्षा और स्वास्थ्य:
    प्राथमिक शिक्षा सुविधाओं में सुधार की मांग है। स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी और आधारभूत सुविधाओं का अभाव है।

  5. महिला सशक्तिकरण:
    महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ रही है, परंतु महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए और योजनाएं चाहिए।


2025 का चुनावी समीकरण और संभावित परिणाम

2025 के विधानसभा चुनाव में कुचायकोट सीट पर मुख्य मुकाबला जदयू और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार यदि जदयू मुस्लिम और यादव मतदाताओं को प्रभावित कर पाती है तो उनकी जीत पक्की मानी जाएगी। वहीं कांग्रेस के लिए ब्राह्मण और कुछ पिछड़ा वर्ग महत्वपूर्ण होगा।

चुनाव आयोग ने कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र को पहले चरण (6 नवंबर 2025) में चुनाव के लिए रखा है, परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।


निष्कर्ष

कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र बिहार की सियासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जातीय समीकरण और विकास की दूरगामी मांगें जुड़ी हैं। 2025 का चुनाव यहां के मतदाताओं की राजनीतिक समझ और बदलाव की ललक को प्रदर्शित करेगा।
पारंपरिक मतों का संरक्षण और नई पीढ़ी की उम्मीदों को समेटते हुए कुचायकोट चुनाव में जदयू और कांग्रेस के बीच सशक्त मुकाबला देखा जाएगा, जो तय करेगा कि विकास और जनसमर्थन में किसका पलड़ा भारी है।

यह चुनाव बिहार की उत्तर-पश्चिमी राजनीति, विशेषकर गोपालगंज जिले के भविष्य का निर्धारण करेगा ।

 

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