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कुम्हरार का किला: ‘कायस्थ’ फैक्टर से फंसी BJP या 35 साल की विरासत दिलाएगी जीत?

 

1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और चुनावी समीकरण

गठबंधन/पार्टी संभावित/वर्तमान उम्मीदवार प्रमुख जाति/पहचान स्थिति और टिप्पणी
NDA (BJP) संजय कुमार गुप्ता (नए उम्मीदवार) वैश्य निवर्तमान विधायक अरुण कुमार सिन्हा (कायस्थ) का टिकट कटने के बाद नए चेहरे।
महागठबंधन (RJD) धर्मेंद्र कुमार (संभावित) यादव 2020 में उपविजेता रहे। RJD का परंपरागत MY आधार।
जन सुराज (PK) प्रोफेसर केसी सिन्हा कायस्थ मशहूर गणितज्ञ। बीजेपी से नाराज़ कायस्थ वोट बैंक को साधने की कोशिश।

 

2️⃣ 🌟 NDA (BJP) की संभावित जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)

बांकीपुर की तरह, कुम्हरार भी BJP का एक पारंपरिक गढ़ है, जिसके कारण NDA की जीत की संभावनाएँ मज़बूत रहती हैं:


 

3️⃣ 📉 अन्य उम्मीदवारों की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े)

विपक्ष के लिए कुम्हरार सीट जीतना अत्यंत कठिन है, हालांकि इस बार BJP के सामने एक नई चुनौती है:


निष्कर्ष:

कुम्हरार सीट पर BJP के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती महागठबंधन से नहीं, बल्कि कायस्थ वोट बैंक की नाराज़गी और जन सुराज के प्रोफेसर केसी सिन्हा से है, जो उनके कोर वोट में सेंध लगा सकते हैं।

यदि कायस्थ वोटों का बड़ा बिखराव नहीं होता है और वैश्य-ब्राह्मण वोट NDA के साथ एकजुट रहते हैं, तो NDA (BJP) उम्मीदवार संजय कुमार गुप्ता के जीतने की प्रबल संभावना है। हालाँकि, यदि कायस्थों की नाराज़गी बड़े पैमाने पर प्रो. केसी सिन्हा के पक्ष में जाती है, तो मुकाबला अप्रत्याशित रूप से करीबी हो सकता है, पर फिर भी NDA के गढ़ को तोड़ना महागठबंधन के लिए अत्यंत कठिन रहेगा।

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