कटिहार जिले की कोढ़ा (सुरक्षित) विधानसभा सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच एक कांटे की लड़ाई का मैदान रही है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल की थी, लेकिन 2025 में मुकाबला फिर से रोमांचक होने की उम्मीद है।
गहन विश्लेषण के आधार पर, एनडीए (भाजपा) उम्मीदवार के फिर से यह सीट जीतने की संभावना अधिक है, हालांकि महागठबंधन (कांग्रेस) कड़ी टक्कर देगी।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA – कविता देवी, भाजपा)
संभावित विजेता: कविता देवी (भाजपा)
1. 2020 की निर्णायक जीत और मजबूत जनादेश:
- बड़ा जीत का अंतर: मौजूदा विधायक कविता देवी ने 2020 में कांग्रेस की पूनम पासवान को 28,943 वोटों (लगभग 15% अंतर) के बड़े अंतर से हराया था। यह जीत भाजपा के पक्ष में एक मजबूत लहर का संकेत देती है।
- वोट प्रतिशत में भारी उछाल: भाजपा उम्मीदवार को 2020 में 1 लाख से अधिक वोट मिले थे, जो यह दर्शाता है कि भाजपा ने अपने कोर वोट बैंक (सवर्ण, वैश्य, और कुछ अति पिछड़ा/दलित) के साथ-साथ अन्य जातियों का भी समर्थन प्राप्त किया।
2. प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभाव:
- बिहार में भाजपा की चुनावी रणनीति केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (आवास, गैस कनेक्शन, मुफ्त राशन आदि) पर बहुत अधिक निर्भर करती है। कोढ़ा एक ग्रामीण क्षेत्र है, जहाँ इन योजनाओं का सीधा लाभ दलित और अति पिछड़ा वर्ग को मिलता है, जो NDA के पक्ष में वोट मजबूत करता है।
- साफ छवि और लोकप्रियता: यदि मौजूदा विधायक कविता देवी ने अपने कार्यकाल में अच्छा प्रदर्शन किया है और उनकी छवि साफ है, तो यह उन्हें सत्ता विरोधी लहर से बचाएगा और उनकी जीत को आसान बनाएगा।
3. SC वोट बैंक में सेंधमारी:
- कोढ़ा सीट आरक्षित है। भाजपा अपने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे और पासवान समुदाय में मजबूत पकड़ के जरिए दलित वोटों का एक बड़ा हिस्सा अपने पक्ष में रखने में सफल रही है, जो महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – पूनम पासवान, कांग्रेस)
मुख्य चुनौती/संभावित उपविजेता: पूनम पासवान (कांग्रेस)
1. 2020 की हार का बड़ा अंतर:
- पूनम पासवान (कांग्रेस) को 2020 में लगभग 28,943 वोटों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इस अंतर को केवल सत्ता विरोधी लहर के आधार पर पाटना बहुत मुश्किल होगा।
- वोटों का ध्रुवीकरण कमजोर: पूनम पासवान 2015 में महेश पासवान (भाजपा) को 5,426 वोटों से हराकर जीती थीं, लेकिन 2020 में महागठबंधन के बावजूद वह बड़ा समर्थन हासिल नहीं कर पाईं, जो यह दर्शाता है कि उनके पक्ष में MY (मुस्लिम-यादव) और SC वोटों का अपेक्षित ध्रुवीकरण नहीं हो पाया था।
2. पूर्णिया लोकसभा चुनाव का पेच:
- 2024 के लोकसभा चुनाव में यह विधानसभा क्षेत्र पूर्णिया लोकसभा सीट का हिस्सा था, जहाँ निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव (राजेश रंजन) ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भाजपा इस क्षेत्र में 51,020 वोटों से पीछे रही थी।
- नकारात्मक तथ्य: यह आंकड़ा महागठबंधन के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन यह कांग्रेस के लिए एक चेतावनी भी है। पप्पू यादव की व्यक्तिगत अपील और उनके समर्थन के कारण भाजपा को नुकसान हुआ था, न कि सीधे तौर पर कांग्रेस या RJD की लहर के कारण। यदि पप्पू यादव का समर्थन 2025 में महागठबंधन को नहीं मिला, तो 2020 की तरह NDA आसानी से जीत सकती है।
3. जातीय समीकरण की जटिलता (कांग्रेस का पारंपरिक वर्चस्व):
- कोढ़ा सीट का एक लंबा इतिहास रहा है, जहाँ कांग्रेस ने 14 में से 7 बार जीत दर्ज की है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री भी शामिल थे। हालांकि, हाल के वर्षों में यह इतिहास भाजपा के मजबूत संगठन और मोदी लहर के सामने फीका पड़ता जा रहा है।
- महागठबंधन का MY समीकरण भी यहाँ निर्णायक नहीं: यह आरक्षित सीट है। यहाँ केवल मुस्लिम-यादव समीकरण जीत की गारंटी नहीं दे सकता। SC, ब्राह्मण, कोइरी, कुर्मी जैसे अन्य वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जहाँ NDA (भाजपा) की पैठ मजबूत है।
निष्कर्ष
कोढ़ा (सु.) सीट पर भाजपा की कविता देवी को बढ़त हासिल है क्योंकि 2020 में उनकी जीत का अंतर बहुत बड़ा था। NDA की संगठनात्मक ताकत और केंद्र की योजनाओं का लाभ उन्हें दोबारा जीत दिला सकता है। कांग्रेस की पूनम पासवान को जीतने के लिए 2020 की तुलना में लगभग 30,000 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे, जो तभी संभव है जब सत्ता विरोधी लहर मजबूत हो और महागठबंधन के सभी घटक दल (RJD, INC) अपने पारंपरिक वोट बैंक (MY और SC का एक हिस्सा) को पूरी तरह एकजुट कर पाएं।
यदि पूनम पासवान 2015 के अपने प्रदर्शन को दोहरा पाती हैं, तो मुकाबला करीबी होगा, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कविता देवी (BJP) के अपनी सीट बरकरार रखने की संभावना अधिक है।
