परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)
खगड़िया विधानसभा सीट पर इस बार भी महागठबंधन (MGB) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है। यह सीट यादव-मुस्लिम बहुल होने के साथ-साथ हाल के चुनावों में महागठबंधन के पक्ष में रही है।
- संभावित विजेता: डॉ. चंदन यादव (महागठबंधन – कांग्रेस) (महागठबंधन के मौजूदा विधायक छत्रपति यादव के स्थान पर)
- NDA के मुख्य दावेदार: बबलू कुमार मंडल (NDA – JDU)
- अन्य दावेदार: जयंती पटेल (जन सुराज)
जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण (अनुकूल और प्रतिकूल तथ्य)
खगड़िया सीट पर यादव और मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग 1$20\%$ से अधिक है, जबकि कुर्मी (लव-कुश) और दलित 2$(13.56\%)$ मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।3 2020 में, कांग्रेस (MGB) के छत्रपति यादव ने JDU की पूनम देवी यादव को मात्र 3,000 वोटों के अंतर से हराया था, जिसका मुख्य कारण LJP उम्मीदवार द्वारा 20 हज़ार से अधिक वोट काटकर JDU को हुए नुकसान को माना गया था।4
| उम्मीदवार/पार्टी | वर्तमान स्थिति | 2020 चुनाव परिणाम | मुख्य राजनीतिक आधार (2025) |
| डॉ. चंदन यादव (MGB – कांग्रेस) | पार्टी के राष्ट्रीय सचिव। | छत्रपति यादव 3,000 वोटों से विजेता (कांग्रेस) | यादव और मुस्लिम (MY) वोटों का मजबूत आधार। युवा चेहरा होने का संभावित लाभ। |
| बबलू कुमार मंडल (NDA – JDU) | JDU के उम्मीदवार। | पूनम देवी यादव 3,000 वोटों से उपविजेता (JDU) | कुर्मी और कोइरी (लव-कुश) मतदाताओं पर पकड़, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का समर्थन और पूनम देवी के नामांकन वापस लेने से NDA का वोट एकजुट होने की संभावना। |
| जयंती पटेल (जन सुराज) | प्रशांत किशोर की पार्टी की उम्मीदवार। | – | जातीय समीकरणों को तोड़ने की क्षमता, स्वच्छ छवि और एंटी-इन्कम्बेंसी वोटों में सेंधमारी। |
1. महागठबंधन (कांग्रेस) उम्मीदवार की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)
डॉ. चंदन यादव (कांग्रेस/MGB) की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:
- ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) वोट का ध्रुवीकरण: खगड़िया में यादव और मुस्लिम वोटरों की बड़ी संख्या (लगभग 20% से अधिक) है, जो पारंपरिक रूप से RJD/कांग्रेस के महागठबंधन को जाता है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व और जातीय जनगणना के मुद्दे ने इस वोट बैंक को और मजबूत किया है।
- 2020 की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ: पिछली बार कांग्रेस ने यह सीट जीती थी, जो इस बार के MGB उम्मीदवार के लिए एक सकारात्मक गति प्रदान करता है।
- JDU के वोट बैंक का अस्थिर होना: JDU को पारंपरिक रूप से समर्थन देने वाली कुर्मी/लव-कुश और दलित जातियों का एक हिस्सा चिराग पासवान और जन सुराज के कारण बँट सकता है, जिससे JDU का आधार कमजोर होगा।
- NDA के आंतरिक मतभेद का लाभ: JDU की पिछली उम्मीदवार पूनम देवी यादव ने, जिन्हें पहले पशुपति पारस की पार्टी ने टिकट दिया था, बाद में नामांकन वापस ले लिया, जिससे NDA खेमे में असमंजस और गुटबाजी का संदेश गया। इसका सीधा लाभ MGB को मिलेगा।
2. NDA (JDU) उम्मीदवार की हार/चुनौती के पक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी)
NDA उम्मीदवार (बबलू कुमार मंडल) की राह में आने वाली मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
- 2020 का ‘वोट विभाजन’ इतिहास:
- सांख्यिकी: 2020 में, JDU उम्मीदवार को 3,000 वोटों से हार मिली थी, जबकि LJP उम्मीदवार ने 20,719 वोट हासिल किए थे।5
- प्रतिकूल तथ्य: इस बार चिराग पासवान का LJP(RV) भले ही NDA का हिस्सा है, लेकिन पूनम देवी यादव के नामांकन वापस लेने और पशुपति पारस गुट के अलग होने से राजग का वोट एकजुट नहीं हो पाएगा। JDU के अपने कोर वोट (कुर्मी) पर भी पिछली बार की विधायक पूनम देवी यादव का व्यक्तिगत प्रभाव था।
- JDU के प्रति ‘एंटी-इन्कम्बेंसी’: नीतीश कुमार सरकार के प्रति सत्ता विरोधी लहर का असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। खगड़िया जैसे बाढ़ प्रभावित और कृषि प्रधान क्षेत्र में विकास और रोजगार के मुद्दे पर असंतोष NDA के खिलाफ जा सकता है।
- त्रिकोणीय मुकाबले का नुकसान: जन सुराज की उपस्थिति से EBC/सवर्ण के कुछ वोट बँट सकते हैं, जो NDA को मिल सकते थे।
निष्कर्ष
खगड़िया विधानसभा सीट पर महागठबंधन (कांग्रेस) के डॉ. चंदन यादव की जीत की संभावना अधिक है।
जीत का कारण: महागठबंधन का यादव-मुस्लिम आधार इस सीट पर निर्णायक है। NDA के उम्मीदवार को पिछले चुनाव की तरह ही गठबंधन के भीतर के मतभेद और वोटों के विभाजन का नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे MGB आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। NDA के लिए एकमात्र उम्मीद कुर्मी-कोइरी और गैर-यादव EBC वोटों के पूर्ण ध्रुवीकरण पर टिकी है।
