खजौली विधानसभा (सीट क्रम संख्या 33) बिहार के मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो पड़ोसी देश नेपाल की सीमा से सटा हुआ है।1 यह सीट यादव, मुस्लिम और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र होने के कारण महागठबंधन (RJD) के लिए एक पारंपरिक गढ़ रही है, लेकिन 2020 में NDA (BJP) ने यहां बड़ी जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था।2
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| अरुण शंकर प्रसाद (विजेता) | BJP (NDA) | 83,161 | 22,689 वोट |
| सीताराम यादव | RJD (महागठबंधन) | 60,472 | – |
अरुण शंकर प्रसाद/NDA (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| रिकॉर्ड तोड़ जीत का अंतर | 2020 के चुनाव में BJP उम्मीदवार अरुण शंकर प्रसाद ने RJD के मजबूत नेता सीताराम यादव को 22,689 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह अंतर RJD के M-Y समीकरण के गढ़ में NDA की अप्रत्याशित और ऐतिहासिक सफलता को दर्शाता है। यह अंतर बताता है कि BJP को सवर्ण, वैश्य, और गैर-यादव पिछड़े वर्गों का ठोस एकमुश्त समर्थन मिला था। |
| NDA का मजबूत गठबंधन आधार | इस सीट पर NDA को ब्राह्मण, वैश्य और अति-पिछड़ी जातियों (EBCs) का मजबूत कोर वोट बैंक प्राप्त है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मतदाताओं को प्रभावित करता है। |
| RJD के ‘M-Y’ गढ़ में सेंध | 2020 के परिणाम ने दर्शाया कि RJD उम्मीदवार के खिलाफ यादव वोट बैंक में भी दरार आई थी। एक निर्दलीय यादव उम्मीदवार (ब्रज किशोर यादव) ने 13,589 वोट काटकर RJD को बड़ा नुकसान पहुँचाया था। यदि 2025 में M-Y वोट में कोई भी बिखराव होता है, तो NDA की जीत आसान हो जाएगी। |
| सीमावर्ती क्षेत्र का महत्व | नेपाल सीमा से सटा यह क्षेत्र तस्करी और अन्य स्थानीय समस्याओं से ग्रसित है। राष्ट्रीय सुरक्षा और सख्त प्रशासन जैसे मुद्दों पर NDA का रुख मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को आकर्षित करता है। |
सीताराम यादव/महागठबंधन (RJD) की जीत की राह और BJP उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (BJP की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| कोर ‘M-Y’ वोट बैंक का प्रभाव | खजौली में यादव (16.40%) और मुस्लिम (14.40%) मतदाता सबसे बड़े जातीय समूह हैं। यदि सीताराम यादव अपने कोर M-Y समीकरण को 100% एकजुट कर पाते हैं, और तेजस्वी यादव के रोजगार के वादे पर युवा वोट आकर्षित होता है, तो 2020 का अंतर पाटा जा सकता है। |
| एंटी-इनकम्बेंसी और स्थानीय मुद्दे | विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष (Anti-Incumbency) है। स्थानीय लोगों ने शिक्षा (डिग्री कॉलेज का अभाव), स्वास्थ्य (अस्पताल में डॉक्टर/उपचार की कमी), और भ्रष्टाचार (ब्लॉक/थाना स्तर पर) जैसे मूलभूत मुद्दों पर निराशा व्यक्त की है। इसके अलावा, हर साल बाढ़ की समस्या भी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा है। |
| वोटर लिस्ट से नाम हटना | स्थानीय चौपालों पर यह मुद्दा भी उठा है कि लगभग 34,000 मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। यदि ये मतदाता महागठबंधन के कोर वोट बैंक से संबंधित हैं और वे इस प्रक्रिया से असंतुष्ट हैं, तो यह गुस्सा भी NDA के खिलाफ जा सकता है। |
| BJP उम्मीदवार की छवि पर सवाल | कुछ स्थानीय लोगों ने विधायक के “पहुँच से बाहर” रहने की शिकायत की है। यदि विधायक की निष्क्रियता की धारणा मतदाताओं के बीच मजबूत होती है, तो यह उन्हें चुनाव हरवा सकती है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
खजौली की सीट एक पेचीदा और हाई-प्रोफाइल मुकाबला है। यह सीट एक तरफ जातीय समीकरणों (M-Y + SC) पर महागठबंधन के पारंपरिक दावे को दर्शाती है, तो दूसरी तरफ मोदी-नीतीश फैक्टर और गैर-यादव/गैर-मुस्लिम वोट बैंक पर NDA के बढ़ते वर्चस्व को दिखाती है।
2025 के चुनाव में, BJP के अरुण शंकर प्रसाद (NDA) की स्थिति मजबूत दिखती है, खासकर 2020 के बड़े जीत के अंतर को देखते हुए।3 हालांकि, यह सीट कांटे की टक्कर वाली बनी रहेगी, क्योंकि RJD का कोर M-Y समीकरण किसी भी समय पलटवार कर सकता है। NDA की जीत मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने कोर वोटों को कितना एकजुट रखती है और क्या RJD के यादव और मुस्लिम वोटों में कोई बिखराव होता है।
संभावित विजेता: अरुण शंकर प्रसाद (BJP – NDA)। (विशाल जीत का अंतर, NDA गठबंधन की ताकत और RJD के कोर वोट में बिखराव की संभावना उन्हें मजबूत स्थिति में रखती है।4 RJD की जीत तभी संभव है जब वह सभी विपक्षी वोटों को पूरी तरह से एकजुट करने में सफल हो।)
