गरखा (Garkha) विधानसभा सीट (संख्या 119) सारण जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है।1 यह सीट हाल के वर्षों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधे मुकाबले का केंद्र रही है। वर्तमान में (2020 के परिणाम के आधार पर) यह सीट महागठबंधन के पास है।2
यहां 2025 के चुनाव परिणाम का विश्लेषण, प्रमुख उम्मीदवार (संभावित) और जीतने के कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
संभावित विजेता: सुरेन्द्र राम (राष्ट्रीय जनता दल – RJD) / महागठबंधन
(यह भविष्यवाणी RJD के मजबूत M-Y समीकरण और पिछले चुनाव में सीमित जीत के अंतर के बावजूद निर्णायक बढ़त पर आधारित है।)
जीत के मुख्य कारण और विश्लेषण (फेवर में जाने वाले तथ्य)
| तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| RJD का मजबूत M-Y (मुस्लिम-यादव) बेस | गरखा सीट पर RJD का पारंपरिक यादव और मुस्लिम वोट बैंक बेहद मजबूत है। सारण जिले में यह समीकरण RJD को एक ठोस आधार प्रदान करता है। 2020 के चुनाव में भी RJD की जीत इसी समीकरण की ताकत को दर्शाती है। |
| वर्तमान विधायक की पकड़ और एंटी-इनकम्बेंसी का कम प्रभाव | सुरेन्द्र राम (RJD) मौजूदा विधायक हैं। 2020 में उन्होंने BJP के उम्मीदवार को लगभग 10,000 वोटों के अंतर से हराया था। यदि विधायक ने पिछले पाँच वर्षों में ज़मीनी काम किया है, तो उनकी व्यक्तिगत पकड़ (पर्सनल वोट) RJD के आधार को और मजबूत करेगी। |
| SC आरक्षण और उप-जातीय समीकरण | यह सीट SC के लिए आरक्षित है, जहाँ मांझी, पासवान और रविदास समुदाय के वोट महत्वपूर्ण हैं। RJD का दावा है कि इन समुदायों के भीतर एक बड़ा हिस्सा अब महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़ा है, विशेषकर तेजस्वी यादव के युवा नेतृत्व और सामाजिक न्याय के संदेश के कारण। |
| NDA खेमे में विभाजित दलित वोट | यदि NDA (भाजपा + लोजपा-रामविलास + हम) अपने SC वोटों को एकजुट नहीं कर पाता है (जैसे चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के कारण उपजे उप-जातीय मतभेद), तो इसका सीधा फायदा RJD को मिलेगा, जिसके पास पहले से ही एक मजबूत कोर वोट बैंक है। |
| NDA की जीत का अंतर सीमित रहा है | गरखा में 2005 और 2010 में BJP की जीत का अंतर काफी कम था (क्रमशः 5,184 और 1,817 वोट)। वहीं, RJD की जीत का अंतर (2015 में 39,883 और 2020 में 9,937) तुलनात्मक रूप से अधिक रहा है, जो क्षेत्र में RJD की पैठ की गहराई को दिखाता है। |
अन्य उम्मीदवार (संभावित रूप से BJP/NDA) के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य
| प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| NDA का पिछड़ा/सवर्ण और ‘मोदी फैक्टर’ पर अत्यधिक निर्भरता | BJP/NDA का मुख्य वोट आधार उच्च जातियों (ब्राह्मण, राजपूत) और गैर-यादव पिछड़ी जातियों (OBC) पर निर्भर करता है। यदि इन वर्गों में कोई बड़ा दरार (जैसे राजपूतों की नाराजगी) आती है, तो यह RJD के लिए निर्णायक साबित होगा। |
| जातीय अंकगणित में SC आबादी का कम प्रतिशत | गरखा में SC आबादी लगभग 13.69% ही है, जबकि यह सीट उन्हीं के लिए आरक्षित है। इसका मतलब है कि गैर-आरक्षित मतदाता (OBC, सवर्ण, मुस्लिम) ही विजेता तय करते हैं। यदि गैर-RJD ओबीसी वोट (जैसे वैश्य) और सवर्ण वोट NDA के लिए एकजुट नहीं होते हैं, तो जीत मुश्किल होगी। |
| स्थानीय उम्मीदवार का मुद्दा | 2020 में उपविजेता रहे ज्ञानचंद मांझी (BJP) जैसे अनुभवी नेता के बावजूद, यदि NDA एक कमज़ोर या बाहरी उम्मीदवार उतारता है, तो स्थानीय विरोध RJD की राह आसान कर देगा। सारण में उम्मीदवारों की टिकट वितरण को लेकर आंतरिक कलह अक्सर NDA को नुकसान पहुँचाती है। |
| एंटी-इनकम्बेंसी का दोहरा वार | यदि राज्य स्तर पर नीतीश कुमार के एनडीए में वापस आने के बाद भी सरकार के खिलाफ कोई मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी है, तो यह NDA के सवर्ण और कुछ ओबीसी वोटों को घर बैठा सकता है, जिसका सीधा असर कम मतदान और RJD की जीत के रूप में होगा। |
| उपचुनावों में कमजोर प्रदर्शन | सारण लोकसभा सीट के तहत आने वाली गरखा में हाल के उपचुनावों (यदि कोई हुए हैं) और 2024 के लोकसभा परिणामों में NDA के प्रदर्शन का विश्लेषण भी महत्वपूर्ण होगा। यदि लोकसभा में NDA को बड़ी बढ़त नहीं मिली है, तो विधानसभा में जीत की संभावना कम हो जाती है। |
निष्कर्ष:
गरखा (SC) विधानसभा सीट पर मुकाबला हमेशा की तरह RJD के ‘आधार वोट’ और NDA के ‘विकास व सामाजिक गठबंधन’ के बीच होगा। RJD के लिए मौजूदा विधायक की मजबूत पकड़ और M-Y समीकरण को साधकर जीत दोहराने का प्रयास होगा। वहीं, NDA के लिए सवर्ण और गैर-यादव ओबीसी वोटों का पूर्ण ध्रुवीकरण और राज्य/केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को भुनाना एकमात्र रास्ता होगा।
वर्तमान रुझानों और जातीय अंकगणित को देखते हुए, RJD उम्मीदवार (सुरेन्द्र राम) की जीत की संभावनाएँ थोड़ी अधिक बनी हुई हैं, बशर्ते NDA अपने सभी पारंपरिक वोट बैंक को लामबंद करने में विफल रहे।
