बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुजफ्फरपुर जिले की गायघाट सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है। 2020 के चुनाव में यह सीट महागठबंधन (RJD) ने जीती थी, लेकिन जीत का असली कारण NDA के भीतर वोटों का बँटवारा था।
मौजूदा राजनीतिक समीकरण, खासकर NDA की वापसी और मजबूत एकजुटता को देखते हुए, गायघाट विधानसभा सीट पर NDA गठबंधन (JDU) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है, हालांकि मुकाबला कड़ा रहेगा।
संभावित विजेता: कोमल सिंह (जनता दल यूनाइटेड – JDU) – NDA (यदि JDU, राजपूत उम्मीदवार, कोमल सिंह को मैदान में उतारता है, जैसा कि खबरों में है)
कोमल सिंह (JDU-NDA) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:
- NDA की एकजुटता और वोटों का समायोजन (Vote Transfer):
- 2020 में JDU के महेश्वर प्रसाद यादव (यादव) और LJP की कोमल सिंह (राजपूत) दोनों के चुनाव लड़ने के कारण NDA का उच्च जाति (राजपूत) और यादव वोट बँट गया था।
- 2020 में RJD को 59,778 वोट मिले थे, जबकि JDU और LJP के वोटों को मिला दें तो यह 89,063 (52,212 + 36,851) होता है।
- 2025 में, यदि कोमल सिंह NDA की उम्मीदवार (JDU के टिकट पर) बनती हैं और LJP (रामविलास) गठबंधन में है, तो यह राजपूत, भूमिहार और लोजपा के दलित/पासवान वोटों को एकजुट करेगा। JDU का पारंपरिक EBC और कुर्मी वोट भी निर्णायक साबित होगा।
- 2020 में JDU के महेश्वर प्रसाद यादव (यादव) और LJP की कोमल सिंह (राजपूत) दोनों के चुनाव लड़ने के कारण NDA का उच्च जाति (राजपूत) और यादव वोट बँट गया था।
- मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि और स्थानीय प्रभाव:
- कोमल सिंह वैशाली से लोजपा (आर) सांसद वीणा देवी की बेटी हैं और MLC दिनेश प्रसाद सिंह की पुत्री हैं। इस मजबूत राजनीतिक और सामाजिक रसूख का उन्हें व्यापक फायदा मिलेगा, जो उन्हें दलीय सीमाओं से परे भी वोट दिलवा सकता है।
- राजपूत समुदाय की चुनौती:
- गायघाट में यादव समुदाय की आबादी अधिक है, लेकिन राजपूत मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। 2020 में राजपूत वोटों के बँटवारे के बावजूद, कोमल सिंह ने LJP उम्मीदवार के रूप में 36 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। NDA की ओर से एकल राजपूत उम्मीदवार होने पर यह वोट बैंक एकजुट होकर निर्णायक साबित हो सकता है।
- एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर का लाभ:
- वर्तमान विधायक निरंजन राय (RJD) के खिलाफ स्थानीय स्तर पर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, जनता से दूरी, अनुमंडल और डिग्री कॉलेज की पुरानी मांगें पूरी न होने जैसे मुद्दे हैं। NDA इन एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी) फैक्टर का फायदा उठा सकती है।
निरंजन राय (RJD) की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:
यदि महागठबंधन एक बार फिर निरंजन राय (RJD) (यादव उम्मीदवार) को मैदान में उतारता है, तो उनके सामने निम्नलिखित प्रतिकूल कारक होंगे:
- 2020 की जीत का ‘आधार’ समाप्त:
- निरंजन राय की 2020 की जीत मुख्य रूप से NDA वोटों के बँटवारे (JDU और LJP की अलग-अलग उम्मीदवारी) के कारण हुई थी, न कि RJD के पक्ष में एकतरफा लहर के कारण। 2025 में NDA के एकजुट होने पर RJD के लिए यह जीत दोहराना बेहद मुश्किल होगा।
- यादव वोटों के बंटवारे का खतरा:
- JDU द्वारा राजपूत उम्मीदवार (कोमल सिंह) को उतारने के कारण, RJD की तरफ से महेश्वर प्रसाद यादव (पूर्व JDU नेता, जो अब RJD/अन्य दल में जा सकते हैं) के निर्दलीय या किसी छोटे दल से चुनाव लड़ने की अटकलें हैं। अगर यादव वोटों का बंटवारा होता है, तो इसका सीधा नुकसान RJD को होगा।
- विकास बनाम जाति का मुद्दा:
- गायघाट क्षेत्र में बाढ़, टूटी सड़कें, और सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दे हैं। यदि RJD विधायक इन समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं कर पाए हैं, तो स्थानीय मतदाता सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर वोट नहीं करेंगे।
- त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना:
- जन सुराज पार्टी ने भी यहां से अशोक कुमार सिंह को मैदान में उतारा है, जो राजपूत और अन्य सवर्ण वोटों को थोड़ा बाँट सकते हैं, लेकिन यह RJD के लिए बड़ा खतरा नहीं है। इसके बजाय, NDA के वोटों का समायोजन RJD पर भारी पड़ सकता है।
निष्कर्ष और पूर्वानुमान:
गायघाट सीट एक हाई-वोल्टेज मुकाबला देखेगी। राजद का पारंपरिक ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) आधार मजबूत है, लेकिन NDA की ‘सवर्ण+EBC+दलित’ की व्यापक सोशल इंजीनियरिंग भारी पड़ सकती है। 2020 के परिणामों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि एक मजबूत और एकजुट NDA उम्मीदवार RJD को आसानी से हरा सकता है।
इसलिए, कोमल सिंह (JDU-NDA) के लिए यह सीट जीतना सबसे अधिक संभावित है, क्योंकि NDA गठबंधन 2020 की अपनी गलती को नहीं दोहराएगा और वोटों का समायोजन सफलतापूर्वक कर लेगा।