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गोपालगंज का निर्णायक महासंग्राम 2025: लालू की धरती पर भाजपा का गढ़ या बदलाव की लहर?

बिहार के उत्तर-पश्चिमी कोने में बसा गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 101) हमेशा से सत्ता की राजनीति का केंद्र माना जाता रहा है। यह वह ज़िला है जिसने बिहार की राजनीति को कई बड़े चेहरे दिए – जिनमें सबसे प्रमुख नाम हैं लालू प्रसाद यादव। लालू प्रसाद की राजनीतिक विरासत और प्रभाव के बावजूद, गोपालगंज विधानसभा सीट पर आरजेडी का दबदबा नहीं, बल्कि भाजपा का निरंतर वर्चस्व देखने को मिला है ।​


भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिचय

गोपालगंज विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र गोपालगंज जिले के मध्य भाग में स्थित है और यह गोपालगंज (आरक्षित) लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। विधानसभा में मुख्य रूप से गोपालगंज, पंचदेवरी और थावे जैसे नगर और ग्रामीण क्षेत्र सम्मिलित हैं।

2024 के आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता 3,44,890 हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। यहां का लिंग अनुपात 1021:1000 है, जो बिहार के औसत (918:1000) से काफी बेहतर है ।​

जनसंख्या विभाजन (2021 अनुमान अनुसार):

भाषाई रूप से यहां भोजपुरी भाषा 96% आबादी द्वारा बोली जाती है, जिसके अलावा हिंदी और उर्दू का भी सीमित प्रचलन है।


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विकास

गोपालगंज विधानसभा सीट बिहार के सबसे पुराने निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है, जहां 1951 में पहली बार चुनाव हुआ था। आरंभिक वर्षों में कांग्रेस का दबदबा रहा और 1952 से 1972 तक सात में से छह चुनाव कांग्रेस ने जीते। 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने इस सिलसिले को तोड़ा।

1977 के बाद भाजपा ने धीरे-धीरे अपनी जमीन मजबूत की। स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में यहां से दो उपचुनाव भी हुए: एक 1996 में और दूसरा 2022 में (भाजपा नेता सुभाष सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी कुसुम देवी के चुनाव जीतने पर) ।​

वर्ष विजेता पार्टी वोट शेयर अंतर
2022 उपचुनाव कुसुम देवी भाजपा 41.6% 1,794 वोट
2020 सुभाष सिंह भाजपा 43.49% 36,752 वोट
2015 सुभाष सिंह भाजपा 45.49% 5,074 वोट
2010 सुभाष सिंह भाजपा 46% 15,893 वोट
2005 डॉ. अशोक कुमार कांग्रेस 39% 15,791 वोट
2000 डॉ. अशोक कुमार कांग्रेस 34% 739 वोट
1995 जगदीश पासवान जनता दल 45% 22,983 वोट
1990 अशोक कुमार कांग्रेस 52% 25,279 वोट
1985 अशोक कुमार कांग्रेस 70% 35,339 वोट
1980 रामजतन पासवान सीपीआई 36% 3,054 वोट
1977 रामजतन पासवान सीपीआई 40% 888 वोट ​

प्रमुख राजनीतिक चेहरे

  1. सुभाष सिंह (भाजपा) – चार बार के विधायक, जिन्होंने गोपालगंज को भाजपा का गढ़ बना दिया। 2020 में 36,752 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। उनके निधन के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी को मैदान में उतारा।

  2. कुसुम देवी (भाजपा) – 2022 उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में विजय प्राप्त की। उनकी जीत भाजपा के महिला मतों में बढ़ती पैठ का उदाहरण बनी ।​

  3. अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव (बीएसपी) – लालू प्रसाद यादव के साले, जिन्होंने 2000 में आरजेडी के नाम पर जीत दर्ज की थी। 2020 में उन्होंने बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन 22% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे ।​

  4. मोहन प्रसाद गुप्ता (राजद) – 2022 उपचुनाव में मुख्य विरोधी के रूप में मैदान में थे। उन्हें 40.5% वोट मिले थे ।​


जातीय और सामाजिक समीकरण

गोपालगंज में सामाजिक और जातीय समीकरण अत्यंत प्रभावशाली हैं:

भाजपा का लाभ सवर्ण और पिछड़े मतदाताओं के व्यापक गठजोड़ में निहित है, जबकि राजद माई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मज़बूत कर अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश करता है।


2020 और 2022 के परिणामों का सारांश

2020 विधानसभा चुनाव:

2022 उपचुनाव:

यह उपचुनाव भाजपा के लिए चेतावनी साबित हुआ, क्योंकि भाजपा का जीत का अंतर घटकर पहले के 36 हजार से मात्र 1,794 पर आ गया।


प्रमुख मुद्दे: जनता की प्राथमिकताएं

1. बेरोजगारी और पलायन:
गोपालगंज की बड़ी आबादी खाड़ी देशों में प्रवासी मज़दूर के रूप में कार्यरत है। स्थानीय स्तर पर उद्योगों की कमी और कृषि का दबाव युवाओं को पलायन के लिए मजबूर करता है ।​

2. कृषि की दुर्दशा:
तीन गन्ना मिलों के संचालन में गिरावट, बिजली की अस्थिरता और सिंचाई संकट किसानों के मुख्य मुद्दे हैं।

3. पेयजल और स्वच्छता:
गंडक और सोन नहर व्यवस्था जर्जर होने के कारण जलापूर्ति बाधित होती है।

4. स्वास्थ्य व्यवस्था:
सदर अस्पताल गोपालगंज में डॉक्टर और उपकरणों की भारी कमी है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और भी खराब है।

5. शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा:
महिला सशक्तिकरण योजनाएं (जैसे जीविका डीजीपी योजना) लागू हैं, परंतु रोजगार से जुड़ी प्रगति धीमी है ।​


विकास योजनाएं और सरकारी प्रयास

पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने गोपालगंज में कई योजनाएं लागू की हैं:

विपक्ष का आरोप है कि यह विकास केवल कागजों तक सीमित है और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस परिणाम नहीं दिखते।


वर्तमान चुनावी परिदृश्य 2025

2025 के चुनाव में भी गोपालगंज में भाजपा और राजद के बीच सीधा मुकाबला है।

इसके अलावा, भाजपा के टिकट वितरण में असंतोष और बागियों की भूमिका सीट के परिणाम को प्रभावित कर सकती है ।​


मतदान और परिणाम

पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर 2025 को होगा। परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे ।​


संभावित विश्लेषण 2025

  1. भाजपा के पास मजबूत संगठन और केंद्र की उपलब्धियों का सहारा है।

  2. राजद स्थानीय असंतोष और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जनता को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

  3. यदि मुस्लिम और यादव वोट एकजुट रहते हैं, तो मुकाबला त्रिकोणीय से द्विपक्षीय हो सकता है।

  4. ग्रामीण वोट बैंक की गतिशीलता से यह तय होगा कि अंतर बड़ा होगा या परिवर्तन संभव है।


निष्कर्ष

गोपालगंज की राजनीति बिहार की राजनीति का प्रतिबिंब मानी जाती है। यह सीट दिखाती है कि विकास, जातीय समीकरण और जनभावनाओं का संगम कैसे परिणाम तय करता है।
2025 का चुनाव यह तय करेगा कि क्या गोपालगंज में भाजपा की लगातार छठी जीत दर्ज होगी या राजद इस लालू की धरती पर अपना खोया गढ़ फिर से जीत पाएगा ।

 

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