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गोविंदगंज का सियासी संग्राम: $NDA$ की ‘डबल इंजन’ रणनीति या कांग्रेस का ‘गढ़ वापसी’ का सपना? राजू तिवारी बनाम शशि भूषण राय

गोविंदगंज (पूर्वी चंपारण) विधानसभा सीट की राजनीति हमेशा से ‘दबंगई और अपनत्व’ के मिश्रण वाली रही है, जहाँ मतदाता हर बार ‘बदलाव’ को प्राथमिकता देते हैं।

परिणाम की भविष्यवाणी:

गोविंदगंज विधानसभा सीट पर इस बार $NDA$ गठबंधन के भीतर बड़ा बदलाव हुआ है, जहाँ पिछली बार की विजेता $BJP$ ने यह सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए छोड़ दी है। इस सीट पर LJP(R) के राजू तिवारी (जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं) की जीत की संभावना अधिक है।

$NDA$ की संयुक्त ताकत और राजू तिवारी की व्यक्तिगत चुनावी सफलता के इतिहास के कारण, उन्हें महागठबंधन के उम्मीदवार पर स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है।


I. LJP(R) के राजू तिवारी की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)

राजू तिवारी ($LJP(R)$) की जीत को मज़बूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:

1. $NDA$ की संगठनात्मक शक्ति और वोटों का हस्तांतरण

2. जातिगत समीकरण में पकड़

3. ‘डबल इंजन’ सरकार पर फोकस


II. कांग्रेस के शशि भूषण राय @ गप्पू राय की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)

महागठबंधन (कांग्रेस) के उम्मीदवार शशि भूषण राय @ गप्पू राय की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:

1. महागठबंधन के भीतर कमजोर प्रदर्शन

2. व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति का जोखिम

निष्कर्ष: गोविंदगंज सीट पर $NDA$ गठबंधन की समग्र संगठनात्मक ताकत और राजू तिवारी का $2015$ का जीत का अनुभव उनके पक्ष में मज़बूती से काम करता है। कांग्रेस के लिए शशि भूषण राय @ गप्पू राय को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें $NDA$ के व्यापक और हस्तांतरित वोट बैंक को तोड़ने के लिए एक अभूतपूर्व लहर की आवश्यकता होगी। इसलिए, LJP(R) के राजू तिवारी की जीत की संभावना सबसे अधिक है।

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