पूर्वी चंपारण जिले की चिरैया विधानसभा सीट (Chiraia Assembly Seat) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक मज़बूत गढ़ रही है, जिसने इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद से लगातार जीत हासिल की है। यह NDA के उम्मीदवार और वर्तमान विधायक लाल बाबू प्रसाद गुप्ता और महागठबंधन (RJD) के बीच एक कांटे की टक्कर का क्षेत्र है।
प्रमुख संभावित उम्मीदवार (2025 के विश्लेषण के आधार पर):
- NDA (BJP): लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (वर्तमान विधायक और दो बार के विजेता)1
- महागठबंधन (RJD): लक्ष्मी नारायण प्रसाद / अच्छेलाल प्रसाद (संभावित)
लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| मजबूत राजनीतिक इतिहास | यह सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और तब से अब तक हुए तीनों चुनावों (2010, 2015, 2020) में बीजेपी ने जीत हासिल की है। यह BJP के लिए एक मजबूत गढ़ और उसके कैडर की ज़मीनी पकड़ को दर्शाता है। |
| हालिया चुनावी प्रदर्शन | 2020 के विधानसभा चुनाव में लाल बाबू प्रसाद गुप्ता ने RJD के अच्छेलाल प्रसाद को 16,874 वोटों के बड़े अंतर (लगभग $10.20\%$ वोट शेयर का अंतर) से हराया था। यह एक निर्णायक और सुरक्षित जीत मानी जाती है। |
| कोर वोट बैंक की मज़बूती | चिरैया एक ग्रामीण क्षेत्र है, जहाँ सवर्ण, वैश्य और अति-पिछड़ी जातियाँ (EBC) निर्णायक भूमिका में हैं। NDA, विशेष रूप से BJP, इन वर्गों के एक बड़े हिस्से पर अपनी पकड़ रखती है, जो हर चुनाव में जीत की नींव रखता है। |
| सामूहिक इस्तीफे का लाभ (RJD में कलह) | 2025 चुनाव से पहले, चिरैया विधानसभा क्षेत्र में RJD में टिकट वितरण को लेकर सामूहिक इस्तीफे और कार्यकर्ताओं की नाराजगी की खबरें आई हैं। यह RJD के आंतरिक कलह को दर्शाता है, जिसका सीधा फायदा BJP को मिल सकता है। |
| बेहतर गठबंधन की स्थिति | लोकसभा चुनावों में भी, जब JDU-BJP साथ थे (2019), NDA को इस क्षेत्र में 54,972 वोटों की भारी बढ़त मिली थी, जो गठबंधन की ताक़त को दिखाता है। |
| विकास के कार्य | स्थानीय लोगों के अनुसार, विधायक द्वारा सड़क, बिजली और पुल-पुलिया पर किए गए कार्यों ने क्षेत्र की तस्वीर बदली है, जिससे एक हद तक एंटी-इनकम्बेंसी कम हो सकती है। |
महागठबंधन (RJD) के लिए संभावित प्रतिकूल तथ्य और आँकड़े
| प्रतिकूल तथ्य/आँकड़े | विवरण |
| वोटों का विभाजन | 2020 के चुनाव में, RJD का वोट शेयर ($27.78\%$) बीजेपी ($37.97\%$) से काफी कम था। इसके अलावा, निर्दलीय उम्मीदवार लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव को $9.9\%$ वोट मिले थे, जो गैर-बीजेपी वोटों को विभाजित कर गए। RJD के लिए चुनौती है कि वह इन सभी वोटों को एकजुट करे। |
| ‘यादव’ बनाम ‘गुप्ता’ की लड़ाई | RJD ने लगातार यादव समुदाय के उम्मीदवारों (जैसे अच्छेलाल प्रसाद/लक्ष्मी नारायण प्रसाद) को टिकट दिया है। बीजेपी के वैश्य (गुप्ता) उम्मीदवार को हराने के लिए RJD को अपने कोर M-Y (मुस्लिम-यादव) के साथ-साथ EBC और सवर्ण के बड़े हिस्से का समर्थन चाहिए, जो मुश्किल रहा है। मुस्लिम मतदाता ($14.60\%$) और SC मतदाता ($12.78\%$) RJD के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन निर्णायक नहीं। |
| स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराज़गी | टिकट वितरण पर हुई हालिया नाराजगी से RJD का जमीनी कैडर चुनाव में कमज़ोर पड़ सकता है, जिससे उनकी जीत की संभावनाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। |
| एंटी-इनकम्बेंसी का अभाव (NDA के खिलाफ) | राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर NDA गठबंधन की मज़बूत स्थिति के कारण, चिरैया में एक निर्णायक सत्ता विरोधी लहर का अभाव रहा है, जो महागठबंधन को जीत दिलाने के लिए आवश्यक है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
चिरैया विधानसभा सीट पर NDA (BJP) के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता सबसे मज़बूत स्थिति में हैं।
- लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (NDA/BJP): यह सीट BJP के लिए एक ‘सुरक्षित किला’ है, और विधायक का लगातार तीन बार जीतना उनके स्थानीय प्रभुत्व और कोर वोट बैंक की स्थिरता को दर्शाता है। RJD के आंतरिक कलह और वोटों के विभाजन के कारण BJP की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है।
- महागठबंधन (RJD): RJD की राह में आंतरिक कलह, वोटों का विभाजन और भाजपा के मज़बूत गढ़ को भेदने की चुनौती सबसे बड़ी बाधा है। जब तक कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर या व्यापक सत्ता-विरोधी लहर नहीं आती, तब तक RJD के लिए यह सीट जीतना बेहद मुश्किल होगा।
