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चुनावी प्रक्रिया में SIR का ऐलान: 12 राज्यों में मतदाता सूची का व्यापक संशोधन

चुनाव आयोग ने अगले साल होने वाले चुनावों को देखते हुए देश के 12 राज्यों में SIR (Systematic Information Revision) की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है।

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) ने अगले वर्ष होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों की तैयारी में एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने देश के 12 राज्यों में एसआईआर (SIR- Systematic Information Revision) यानी व्यवस्थित सूचना संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। यह पहल मतदाता सूची को अधिक सटीक, त्रुटिरहित और अद्यतन (Updated) बनाने के लिए की गई है, ताकि आगामी चुनावों में अधिक से अधिक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

SIR का उद्देश्य और महत्व

SIR, मतदाता सूची में व्यापक सुधार और सटीकता लाने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

  1. त्रुटियाँ दूर करना: मतदाता सूची से दोहरे पंजीकरण (Duplicate Entries), स्थानांतरित मतदाताओं के नाम (Migrated Voters), और मृत मतदाताओं के नाम हटाना।
  2. पात्र नागरिकों को जोड़ना: 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे सभी पात्र नागरिकों को पंजीकृत करना जिनके नाम अभी तक सूची में शामिल नहीं हुए हैं।
  3. विवरणों का सत्यापन: मतदाताओं के नाम, पता और अन्य व्यक्तिगत विवरणों का सत्यापन करना ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न हो।
  4. फोटो की गुणवत्ता सुधारना: मतदाता फोटो पहचान पत्रों (EPIC) में लगे तस्वीरों की गुणवत्ता को सुधारना।

इस प्रक्रिया से मतदाता सूची की ‘पवित्रता’ (Sanctity) बनी रहती है और चुनावी धांधली की संभावना कम होती है।

किन राज्यों पर होगा फोकस?

यह विशेष संशोधन अभियान देश के उन 12 राज्यों पर केंद्रित है जहाँ अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं या जहाँ की मतदाता सूची में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। हालांकि सटीक सूची समय-समय पर बदल सकती है, यह पहल आमतौर पर ऐसे राज्यों में शुरू की जाती है जहाँ मतदाता आधार में बड़ा बदलाव आया हो या जहाँ चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक हो। इस अभियान से संबंधित राज्य इकाइयों को मतदाता सूची में ‘शून्य त्रुटि’ (Zero Error) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मतदाताओं के लिए प्रक्रिया

यह SIR अभियान मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मौका है:

ECI का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय लोकतंत्र का आधार – मतदाता सूची – हर चुनाव से पहले मजबूत और विश्वसनीय बनी रहे।

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