परिणाम का पूर्वानुमान (विश्लेषणात्मक संभावना)
बेगूसराय जिले की चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट पर महागठबंधन (RJD) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। हालांकि, 2020 के ऐतिहासिक जीत के अंतर और RJD के मजबूत कोर वोट बैंक को देखते हुए, महागठबंधन (RJD) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है।
- संभावित विजेता: महागठबंधन के उम्मीदवार (RJD के सुशील सिंह कुशवाहा)
- (RJD ने निवर्तमान विधायक राजवंशी महतो की जगह सुशील सिंह कुशवाहा को टिकट दिया है। NDA में यह सीट JD(U) के खाते में गई है, जिसने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के बेटे अभिषेक कुमार ‘न्यूटन’ को उतारा है।)
- NDA के मुख्य दावेदार: अभिषेक कुमार ‘न्यूटन’ (NDA – JD(U))।
प्रमुख दावेदार और जीत/हार का निर्णायक विश्लेषण
RJD उम्मीदवार की संभावित जीत के मुख्य कारण और अनुकूल तथ्य निम्नलिखित हैं:
- 2020 की भारी-भरकम जीत का अंतर (40,897 वोट):
- 2020 के चुनाव में RJD को 45.6% वोट मिले थे, जबकि JD(U) को मात्र 18.27% वोट मिले थे। यह 40,897 वोटों का अंतर RJD की अभूतपूर्व शक्ति को दर्शाता है, जिसे NDA के लिए पाटना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
- यादव-मुस्लिम (MY) कोर वोट बैंक:
- RJD का परंपरागत यादव और मुस्लिम वोट बैंक इस सीट पर लगभग 25% से 30% तक होने का अनुमान है, जो पार्टी के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। यह वोट एकमुश्त RJD को मिलने की संभावना है।
- कुशवाहा (महतो) कार्ड और RJD की ‘A to Z’ रणनीति:
- RJD ने निवर्तमान विधायक राजवंशी महतो (कुशवाहा) की जगह नए सुशील सिंह कुशवाहा को उतारा है। यह कुशवाहा वोट (जो पारंपरिक रूप से JD(U) का रहा है) को आकर्षित करने की RJD की रणनीति का हिस्सा है। बेगूसराय क्षेत्र में कुशवाहा मतदाताओं की अच्छी संख्या है और RJD इस वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।
- NDA वोट का संभावित बिखराव:
- 2020 में LJP ने लगभग 25,437 वोट काटकर NDA (JD(U)) को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। 2025 में NDA में LJP (रामविलास) शामिल है, लेकिन सीट JD(U) के पास रहने से JD(U) के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार या राजपूत-ब्राह्मण वोटों में आंतरिक असंतोष होने पर RJD को फायदा हो सकता है।
2. NDA (JD(U)) उम्मीदवार की हार के लिए चुनौतियाँ (कमजोर आधार और नए उम्मीदवार पर जोखिम)
JD(U) उम्मीदवार के लिए जीत हासिल करने में ये कारक बाधा उत्पन्न करेंगे:
- NDA उम्मीदवार की कमजोर व्यक्तिगत साख (पिछला प्रदर्शन):
- JD(U) उम्मीदवार अभिषेक कुमार ‘न्यूटन’ पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के बेटे हैं। मंजू वर्मा 2020 में बुरी तरह हारीं थीं और उनका चुनाव क्षेत्र में पिछला रिकॉर्ड विवादों के कारण काफी नकारात्मक रहा है। हालांकि, नया चेहरा होने का फायदा मिल सकता है, लेकिन एंटी-इनकंबेंसी का असर अभी भी JD(U) के ब्रांड पर पड़ सकता है।
- राजपूत-ब्राह्मण वोट का ध्रुवीकरण अपर्याप्त:
- इस सीट पर राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, जिसके बाद ब्राह्मण और यादवों का स्थान आता है। NDA मुख्य रूप से सवर्ण (राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार) और EBC (अति पिछड़ा वर्ग) के वोटों पर निर्भर करता है।
- RJD के मजबूत MY और कुशवाहा समीकरण को तोड़ने के लिए NDA को सवर्ण, EBC और SC वोटों के भारी ध्रुवीकरण की आवश्यकता होगी, जो 40,000 वोटों के अंतर को पाटने के लिए मुश्किल हो सकता है।
- लोकसभा बनाम विधानसभा का पैटर्न:
- भले ही NDA ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र में इस विधानसभा सेगमेंट में 9,957 वोटों की बढ़त हासिल की हो, चेरिया बरियारपुर का इतिहास रहा है कि यह लोकसभा और विधानसभा में अलग-अलग वोट करता है (2019 लोकसभा में भारी बढ़त के बावजूद 2020 विधानसभा में NDA की करारी हार हुई थी)।
निष्कर्ष
चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट का चुनाव सीधे तौर पर RJD के MY + कुशवाहा समीकरण बनाम NDA के सवर्ण + EBC + विकासवाद के बीच है।
2020 के चुनाव में RJD ने यहाँ एक असामान्य रूप से बड़ा अंतर स्थापित किया था। RJD द्वारा कुशवाहा उम्मीदवार उतारने की रणनीति, अगर MY वोटों के साथ सफलतापूर्वक जुड़ जाती है, तो पार्टी को जीत की ओर ले जाएगी। NDA के नए उम्मीदवार को अपनी माँ के पिछले प्रदर्शन के नकारात्मक असर को कम करते हुए सवर्णों और EBC के वोटों को पूरी तरह से एकजुट करना होगा, जो एक कठिन कार्य है।
अतः, चेरिया बरियारपुर सीट पर महागठबंधन (RJD) की जीत की संभावना अधिक है, लेकिन NDA एक मजबूत चुनौती पेश करेगी।
