छातापुर विधानसभा (सुपौल जिला) बिहार की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है, जिस पर पिछले तीन चुनावों से भाजपा (NDA) का कब्ज़ा रहा है। इस सीट पर नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’ का दबदबा रहा है, जो वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री भी हैं।
पिछला चुनावी परिणाम (2020) – निर्णायक जीत:
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| नीरज कुमार सिंह (विजेता) | BJP (NDA) | 93,755 | 20,635 वोट |
| विपिन कुमार सिंह | RJD (महागठबंधन) | 73,120 | – |
(2020 में जीत का अंतर काफी बड़ा (10.30%) था, जो छातापुर को NDA के लिए एक मज़बूत सीट बनाता है।)1
BJP/NDA उम्मीदवार (नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
भाजपा ने एक बार फिर वर्तमान विधायक और मंत्री नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’ पर भरोसा जताया है। उनकी जीत के प्रमुख कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| मज़बूत व्यक्तिगत जनाधार (ट्रिपल हैट्रिक) | नीरज कुमार सिंह 2010 (JDU), 2015 (BJP) और 2020 (BJP) में लगातार तीन बार इस सीट से विधायक रहे हैं। वह 2015 और 2020 में राजद के मजबूत उम्मीदवार को बड़े अंतर से हरा चुके हैं। यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और स्थानीय मज़बूती को दर्शाता है। |
| मंत्री के रूप में पहचान और विकास कार्य | मंत्री होने के नाते उन्होंने क्षेत्र में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई काम करवाए हैं। स्थानीय स्तर पर वे बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं और बड़े अस्पतालों के निर्माण का दावा करते हैं, जिसका सीधा लाभ उन्हें मिल सकता है। |
| NDA का कोर वोट बैंक | इस सीट पर ब्राह्मण (नीरज सिंह), मुस्लिम, यादव और अति-पिछड़ा वोट निर्णायक माने जाते हैं। सवर्णों (खासकर ब्राह्मणों) का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा है। साथ ही, PM मोदी और CM नीतीश कुमार के सामूहिक नेतृत्व का लाभ उन्हें मिलता है। |
| 2020 का बड़ा जीत का अंतर | 2020 में 20 हज़ार से अधिक वोटों का बड़ा अंतर यह संकेत देता है कि उन्हें हराने के लिए महागठबंधन को बड़े पैमाने पर वोटों का ध्रुवीकरण करना होगा, जो कठिन चुनौती है। |
| महागठबंधन में आंतरिक कलह का लाभ | ख़बरों के अनुसार, महागठबंधन में RJD के कई दावेदार (विपिन कुमार सिंह, बैद्यनाथ मेहता, जहूर आलम) सक्रिय हैं। यदि टिकट वितरण को लेकर आंतरिक कलह होती है, या कोई बड़ा नेता बागी होता है, तो इसका सीधा लाभ NDA को मिलेगा। |
RJD/महागठबंधन उम्मीदवार (संभावित विपिन कुमार सिंह) की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण
महागठबंधन की ओर से पूर्व उम्मीदवार विपिन कुमार सिंह को दोबारा टिकट मिल सकता है, या RJD किसी नए चेहरे को भी मौका दे सकती है।
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| स्थानीय ‘किंग मेकर’ का न होना | छातापुर सीट पर JDU/BJP गठबंधन लगातार जीतता रहा है, जिसका मतलब है कि RJD के पास कोई ऐसा स्थानीय नेता नहीं है जो नीरज बबलू के कद का हो और लगातार जीत दिला सके। |
| RJD के ‘MY’ समीकरण की अपर्याप्तता | छातापुर में मुस्लिम और यादव (M-Y) वोटरों की अच्छी संख्या है, जो RJD का आधार है। हालाँकि, यह आधार जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। JDU/BJP गठबंधन EBC, महादलित, और सवर्ण वोटों में सेंध लगाकर RJD के वोट बैंक के प्रभाव को कम कर देता है। |
| स्थानीय मुद्दों को न भुना पाना | विपक्ष (RJD) लगातार रोजगार की कमी, सीमावर्ती क्षेत्र की समस्याएं और स्थानीय विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाता रहा है, लेकिन 2020 में ये मुद्दे नीरज बबलू के व्यक्तिगत प्रभाव और NDA की लहर के सामने टिक नहीं पाए। |
| कमज़ोर चुनावी रणनीति | 2020 में 20 हज़ार वोटों से हारना यह दर्शाता है कि RJD की रणनीति, बूथ प्रबंधन और प्रचार में NDA से कहीं बड़ी कमी थी। 2025 में भी, यदि RJD अपनी रणनीति में सुधार नहीं करती है, तो हार का सिलसिला जारी रह सकता है। |
| अन्य पार्टियों की चुनौती | इस बार विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संजीव मिश्रा जैसे उम्मीदवार भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। यदि VIP चुनाव लड़ती है, तो यह महागठबंधन के अति-पिछड़ा वोट को काटकर परोक्ष रूप से NDA को लाभ पहुंचा सकती है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
छातापुर विधानसभा सीट पर नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’ की मजबूत पकड़, मंत्री के रूप में उनकी पहचान और NDA गठबंधन की संगठनात्मक शक्ति उन्हें 2025 के चुनाव में स्पष्ट बढ़त दिलाती है। महागठबंधन (RJD) को यह सीट जीतने के लिए जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर एक मजबूत सत्ता-विरोधी लहर पैदा करनी होगी और अपने सभी धड़ों को एकजुट करना होगा।
संभावित विजेता: नीरज कुमार सिंह (BJP – NDA)2
(लगातार चार बार (चौका) जीतने की प्रबल संभावना है, क्योंकि 2020 का जीत का अंतर काफी बड़ा था।)
