1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार

गठबंधन पार्टी उम्मीदवार (संभावित) पिछला प्रदर्शन (2020)
महागठबंधन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) अजय कुमार सिंह (वर्तमान विधायक) 4432 वोटों से विजयी
NDA जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) नचिकेता मंडल (पूर्व सांसद के पुत्र) (JDU के शैलेश कुमार 4432 वोटों से हारे)
निर्दलीय निर्दलीय शैलेश कुमार (JDU के पूर्व मंत्री) JDU से निष्कासित होने के बाद निर्दलीय मैदान में।

2️⃣ 🏆 NDA (JDU) उम्मीदवार नचिकेता मंडल की जीत के संभावित कारण (अनुकूल तथ्य)

JDU ने इस बार लंबे समय से विधायक रहे शैलेश कुमार का टिकट काटकर जिलाध्यक्ष नचिकेता मंडल पर भरोसा जताया है, जो पूर्व सांसद ब्रह्मानंद मंडल के पुत्र हैं।

  • सिटिंग विधायक के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी का फायदा: वर्तमान विधायक (कांग्रेस के अजय कुमार सिंह) के खिलाफ स्थानीय लोगों में विकास कार्यों के ठप रहने की नाराजगी है। कई रिपोर्टों में सड़कों की खराब हालत और बाढ़ की समस्या पर विधायक की कथित निष्क्रियता का उल्लेख है। NDA नए चेहरे को मैदान में उतारकर इस सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठा सकती है।
  • कुर्मी-धानुक-अतिपिछड़ा समीकरण: जमालपुर में यादव, कुर्मी और धानुक जाति की आबादी निर्णायक है। नचिकेता मंडल को कुर्मी/धानुक समाज से जोड़कर JDU अतिपिछड़ा वोटों को मजबूत करना चाहती है। उनके पिता पूर्व सांसद ब्रह्मानंद मंडल का प्रभाव भी इस वोट बैंक पर पड़ सकता है।
  • NDA का मजबूत आधार: 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान NDA उम्मीदवार को इस विधानसभा क्षेत्र से बढ़त मिली थी। यह इस बात का संकेत है कि राष्ट्रीय नेतृत्व और ‘डबल इंजन’ सरकार के प्रति मतदाताओं का झुकाव मौजूद है।
  • शैलेश कुमार का निर्दलीय चुनाव लड़ना (वोट विभाजन): JDU से टिकट कटने के बाद पूर्व मंत्री शैलेश कुमार ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वे JDU के पारंपरिक कुर्मी-धानुक वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे, लेकिन इससे JDU की हार की संभावना बढ़ने के बजाय महागठबंधन को नुकसान हो सकता है।

3️⃣ ❌ महागठबंधन (कांग्रेस) उम्मीदवार अजय कुमार सिंह की हार के संभावित तथ्य (प्रतिकूल तथ्य)

वर्तमान विधायक अजय कुमार सिंह के लिए 2025 का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण है।

  • स्थानीय स्तर पर एंटी-इनकम्बेंसी:
    • कई स्थानीय रिपोर्टों में यह आरोप है कि विधायक अजय कुमार सिंह ने 5 साल में क्षेत्र में विकास कार्य नहीं किए और जनता से दूरी बनाए रखी। स्थानीय लोग विधायक को “नहीं देखने” की शिकायत कर रहे हैं।
    • सड़क पर धान रोपने जैसी घटनाएँ विकास की कमी और स्थानीय असंतोष को दर्शाती हैं, जो उनकी हार का मुख्य कारण बन सकती हैं।
  • ‘MY’ समीकरण पर निर्भरता:
    • कांग्रेस की जीत 2020 में MY (मुस्लिम+यादव) समीकरण और सवर्ण मतदाताओं के कुछ समर्थन के कारण हुई थी। हालांकि, कांग्रेस बिहार में एक कमजोर सहयोगी रही है, और यदि MY समीकरण में बिखराव होता है (उदाहरण के लिए, किसी तीसरे पक्ष द्वारा मुस्लिम वोटों में सेंधमारी), तो विधायक की जीत की राह मुश्किल हो जाएगी।
  • त्रिकोणीय/बहुकोणीय मुकाबला:
    • JDU से नचिकेता मंडल और निर्दलीय शैलेश कुमार के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, जो चार बार इस सीट से विधायक रहे हैं, के पास एक व्यक्तिगत वोट बैंक है। शैलेश कुमार JDU/NDA के वोट काटेंगे, जिससे कांग्रेस को लाभ हो सकता है, लेकिन स्थानीय एंटी-इनकम्बेंसी इतनी प्रबल है कि निर्दलीय उम्मीदवार की मजबूत उपस्थिति कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

4️⃣ निर्णायक फैक्टर: बागी शैलेश कुमार का असर

जमालपुर सीट का परिणाम मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्दलीय शैलेश कुमार किसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं:

  • अगर शैलेश कुमार JDU के पारंपरिक वोट (कुर्मी, धानुक) और सवर्णों के एक बड़े हिस्से को काटते हैं, तो महागठबंधन (कांग्रेस) के अजय कुमार सिंह को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
  • लेकिन, अगर अजय कुमार सिंह के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी बहुत मजबूत है, और शैलेश कुमार JDU के वोटों को विभाजित करके खुद एक मजबूत दावेदार बनते हैं, तो NDA (नचिकेता मंडल) को सवर्णों (भूमिहार/राजपूत) और अतिपिछड़ा वर्ग का एकजुट वोट मिलने से वे त्रिकोणीय मुकाबले में बाजी मार सकते हैं।

वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए, NDA के नचिकेता मंडल को एंटी-इनकम्बेंसी और नए चेहरे का लाभ मिल सकता है, जिससे यह सीट NDA के लिए अनुकूल दिखती है, बशर्ते वह अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने में सफल रहें।

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