जाले विधानसभा: क्या भाजपा लगा पाएगी जीत की ‘चौथी हैट्रिक’? समीकरण, मुद्दे और महामुकाबले का विश्लेषण

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा जिले की जाले सीट NDA के लिए एक महत्वपूर्ण गढ़ है। यह सीट लगातार तीन बार (2010, 2015, 2020) भाजपा के खाते में गई है। 2020 में, बीजेपी के उम्मीदवार ने एक बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, जो इस सीट पर पार्टी की मजबूत पकड़ को दर्शाती है।

वर्तमान राजनीतिक और जातीय समीकरणों को देखते हुए, जाले विधानसभा सीट पर NDA गठबंधन (BJP) के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है।

संभावित विजेता: जीवेश कुमार (भारतीय जनता पार्टी – BJP) – NDA (मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री, यदि NDA उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाती है)


जीवेश कुमार (BJP) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:

  1. लगातार जीत और बड़ा मार्जिन (2020):
    • जीवेश कुमार लगातार दो बार (2015 और 2020) जाले से विधायक रहे हैं। 2020 में, उन्होंने कांग्रेस के मशकूर अहमद उस्मानी को 21,796 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर (लगभग 13.20%) यह दर्शाता है कि यह सीट अब एकतरफा रूप से भाजपा के पक्ष में झुकी हुई है, और महागठबंधन के लिए इसे पलटना एक बड़ी चुनौती है।
  2. जातिगत समीकरण में मज़बूत पकड़:
    • जाले सीट पर मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, भूमिहार, रविदास और पासवान मतदाताओं का खासा प्रभाव है।
    • जीवेश कुमार ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, जिनका एक बड़ा और एकजुट वोट उन्हें मिलता है।
    • NDA गठबंधन के कारण उन्हें सवर्ण (ब्राह्मण/भूमिहार), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दलित (रविदास/पासवान) वोटों का एक मजबूत आधार मिलता है। 2024 के लोकसभा चुनावों में NDA की मजबूत पकड़ इस समीकरण को और बल देती है।
  3. सरकारी कार्य और मंत्री पद का लाभ:
    • विधायक जीवेश कुमार ने श्रम संसाधन मंत्री और बाद में नगर विकास व आवास मंत्री के रूप में कार्य किया है। मंत्री पद पर रहने के कारण क्षेत्र में सड़कों का पक्कीकरण, पावर सब-स्टेशन का निर्माण और नगर परिषदों/नगर पंचायतों का गठन जैसे कई विकास कार्य हुए हैं, जिसका लाभ उन्हें मिलेगा।
  4. NDA की एकजुटता:
    • वर्तमान में JDU और LJP (रामविलास) जैसे दलों के NDA में होने से EBC, कुर्मी, और पासवान जैसे महत्वपूर्ण वोट बैंक पूरी तरह से भाजपा उम्मीदवार के साथ रहने की उम्मीद है, जो महागठबंधन के ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण को कमजोर करता है।

महागठबंधन/कांग्रेस उम्मीदवार की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:

यदि महागठबंधन एक बार फिर कांग्रेस के मशकूर अहमद उस्मानी (या कोई अन्य उम्मीदवार) को मैदान में उतारता है, तो उनके सामने निम्नलिखित प्रतिकूल कारक होंगे:

  1. भारी हार का आंकड़ा (2020):
    • कांग्रेस/महागठबंधन उम्मीदवार को 2020 में 21,796 वोटों के भारी अंतर से हार मिली थी। इस बड़े अंतर को पाटना महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर जब NDA गठबंधन 2025 में और मजबूत दिख रहा है।
  2. MY समीकरण का सीमित प्रभाव:
    • जाले में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या अच्छी होने के बावजूद, 2020 में मुस्लिम उम्मीदवार को हार मिली थी। यह इंगित करता है कि ब्राह्मण, भूमिहार और NDA के EBC/दलित वोट की एकजुटता महागठबंधन के पारंपरिक ‘MY’ समीकरण पर भारी पड़ती है।
  3. गैर-मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण:
    • महागठबंधन द्वारा मुस्लिम उम्मीदवार को बार-बार उतारने की रणनीति, भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में गैर-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को बढ़ा सकती है, जिससे जीत का अंतर और बढ़ सकता है।
  4. स्थानीय मुद्दों की अनदेखी:
    • जाले में बाढ़, बागमती नदी पर पुल निर्माण और भरवाड़ा नगर पंचायत में जलसंकट जैसे स्थानीय मुद्दे हैं। यदि महागठबंधन इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाया और केवल जातीय गणित पर निर्भर रहा, तो वह स्थानीय मतदाताओं को आकर्षित करने में विफल रहेगा।

निष्कर्ष और पूर्वानुमान:

जाले विधानसभा सीट पर NDA के उम्मीदवार जीवेश कुमार को उनकी व्यक्तिगत अपील, लगातार विकास कार्यों, और सबसे महत्वपूर्ण, NDA गठबंधन के मजबूत और एकजुट जातिगत आधार का सीधा लाभ मिलेगा। महागठबंधन (कांग्रेस/RJD) के लिए यह सीट जीतना तब तक लगभग असंभव है, जब तक कि वह गैर-MY समीकरण में एक बड़ी सेंध न लगा पाए। इसलिए, यह संभावना है कि जीवेश कुमार (BJP-NDA) जाले सीट पर अपनी चौथी लगातार जीत दर्ज कर सकते हैं।

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