जीरादेई, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मभूमि, सीवान जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है। यह सीट हाल के वर्षों में वामपंथी राजनीति का एक मजबूत गढ़ बन गई है। यह निर्वाचन क्षेत्र जीरादेई, नौतन और मैरवा प्रखंडों को मिलाकर बना है। यह मुकाबला मुख्य रूप से महागठबंधन (CPI(ML)L) और NDA के बीच केंद्रित रहेगा।
जीत की संभावना (पूर्वानुमान)
जीरादेई सीट पर वर्तमान विधायक और CPI(ML)L के अमरजीत कुशवाहा की स्थिति मजबूत मानी जा सकती है। 2020 में उनकी बड़ी जीत (25,510 वोटों का अंतर) और महागठबंधन के यादव-मुस्लिम-वाम समीकरण को देखते हुए, अमरजीत कुशवाहा (CPI(ML)L / महागठबंधन) को इस सीट पर आगे माना जा सकता है।
विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (अमरजीत कुशवाहा – CPI(ML)L / महागठबंधन)
अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (NDA उम्मीदवार – संभावित JDU/BJP)
निष्कर्ष:
जीरादेई सीट पर अमरजीत कुशवाहा (CPI(ML)L) का पलड़ा भारी दिख रहा है, जिसका मुख्य कारण 2020 की बड़ी जीत और यादव-मुस्लिम-वाम वोट बैंक का मजबूत समीकरण है। NDA (संभावित रूप से JDU या BJP) के लिए यह सीट जीतना एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर तब जब उन्हें CPI(ML)L की संगठनात्मक शक्ति का सामना करना पड़े। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव की बढ़त और उच्च-जाति तथा NDA के कुशवाहा-अतिपिछड़ा वर्ग के वोटों का ध्रुवीकरण इस मुकाबले को कड़ा बना सकता है। यदि NDA 2024 की लीड को बरकरार रखने में कामयाब रहती है, तो अप्रत्याशित परिणाम भी आ सकता है।
(अस्वीकरण: यह विश्लेषण मौजूदा राजनीतिक डेटा, जातीय समीकरणों और पिछले चुनावों के रुझानों पर आधारित एक अनुमान है। अंतिम परिणाम चुनावी दिन के मतदान, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा।)
