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झारखंड में भयावह लापरवाही: थैलेसीमिया पीड़ितों को HIV संक्रमित रक्त

झारखंड के एक अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित कई बच्चों को कथित तौर पर HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस बड़ी लापरवाही के बाद सिविल सर्जन समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में एक अत्यंत गंभीर और भयावह लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह आरोप लगाया गया है कि एक सरकारी अस्पताल में थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित कई मासूम बच्चों को इलाज के दौरान कथित तौर पर एचआईवी (HIV) संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया। यह घटना न केवल चिकित्सा प्रणाली में गंभीर चूक को दर्शाती है, बल्कि कई परिवारों के भविष्य को भी अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है।

मामले की गंभीरता और पीड़ित बच्चे

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें रोगी को जीवित रहने के लिए नियमित रूप से रक्त आधान (Blood Transfusion) की आवश्यकता होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये बच्चे महीनों या सालों से नियमित रूप से सरकारी अस्पताल में रक्त ले रहे थे। हाल ही में किए गए परीक्षणों में, इनमें से कुछ बच्चों में एचआईवी संक्रमण पाया गया है।

चिकित्सा लापरवाही और प्रशासनिक कार्रवाई

किसी भी रक्त आधान से पहले, यह अनिवार्य होता है कि दान किए गए रक्त की हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी और सिफलिस जैसी गंभीर बीमारियों के लिए पूरी तरह से जांच (Screening) की जाए। इस मामले में, यह स्पष्ट है कि या तो रक्त की जांच ठीक से नहीं की गई, या फिर जांच के परिणामों को नजरअंदाज करते हुए संक्रमित रक्त को उपयोग में लाया गया।

इस गंभीर चूक के बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आए:

भविष्य की चुनौतियाँ और आवश्यकताएँ

इस घटना ने झारखंड की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है:

  1. पीड़ितों का उपचार: सबसे बड़ी चुनौती अब संक्रमित बच्चों के लिए मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण एंटी-रेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) सुनिश्चित करना है, साथ ही उनके थैलेसीमिया का भी इलाज जारी रखना है।
  2. काउंसलिंग और सहयोग: पीड़ित परिवारों को मानसिक आघात से उबरने के लिए मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता (Counselling) की सख्त आवश्यकता है।
  3. स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए, सभी सरकारी और निजी रक्त बैंकों में रक्त जांच की प्रक्रियाओं को स्वचालित (Automated) और अत्यधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है। कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ाना अनिवार्य है।

यह मामला पूरे देश में स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है और यह मांग करता है कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ नागरिकों के जीवन के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनें।

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