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ढाका विधानसभा: ‘जयसवाल बनाम रहमान’ की जंग, क्या 10,000 वोटों का अंतर पाट पाएगी RJD?

पूर्वी चंपारण जिले की ढाका विधानसभा सीट (Dhaka Assembly Seat) की पहचान बीजेपी और आरजेडी के बीच एक निर्णायक चुनावी अखाड़े के रूप में होती है। इस सीट पर परिणाम हमेशा करीबी रहे हैं, और पवन कुमार जायसवाल (BJP) और फैसल रहमान (RJD) के बीच कड़ा मुकाबला तय है।

प्रमुख संभावित उम्मीदवार (2025 के विश्लेषण के आधार पर):


पवन कुमार जायसवाल (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
निरंतर चुनावी उपस्थिति और जीत पवन कुमार जायसवाल इस क्षेत्र के जाने-पहचाने चेहरे हैं। उन्होंने 2010 में निर्दलीय के रूप में, और फिर 2020 में BJP के टिकट पर जीत हासिल की है। यह उनकी मजबूत व्यक्तिगत पैठ और पार्टी समर्थन दोनों को दर्शाता है।
NDA का संगठनात्मक आधार ढाका में BJP का संगठनात्मक आधार मजबूत है। यह सीट शिवहर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां NDA गठबंधन को पारंपरिक रूप से अच्छी बढ़त मिलती रही है, जिसका सीधा लाभ जायसवाल को मिलता है।
करीबी मुकाबले में जीत का रिकॉर्ड 2020 के चुनाव में, जायसवाल ने RJD के फैसल रहमान को 10,114 वोटों के अंतर से हराया था। यह अंतर भले ही छोटा हो, लेकिन 2,04,875 कुल वोटों में से 4.90% की बढ़त निर्णायक साबित हुई।
गैर-मुस्लिम वोट का एकीकरण जायसवाल सवर्ण (ब्राह्मण/कायस्थ/भूमिहार) और वैश्य मतदाताओं के बड़े हिस्से को एकजुट करने में सफल रहे हैं, साथ ही NDA के जरिए EBC और दलित वोटों का एक बड़ा हिस्सा भी अपनी ओर खींचते हैं।
AIMIM की एंट्री का लाभ AIMIM ने 2025 के चुनाव में ढाका सीट से गैर-मुस्लिम उम्मीदवार (राणा रणजीत सिंह) को उतारा है। हालाँकि, AIMIM की उपस्थिति, विशेषकर सीमांचल के बाहर, RJD के मुस्लिम-यादव (M-Y) कोर वोट में सेंध लगा सकती है, जिससे फैसल रहमान (मुस्लिम उम्मीदवार) के वोट कटेंगे, और BJP की जीत की राह आसान हो सकती है।

फैसल रहमान (RJD) के लिए संभावित प्रतिकूल तथ्य और आँकड़े

प्रतिकूल तथ्य/आँकड़े विवरण
वोट विभाजन का खतरा (AIMIM और अन्य) ढाका में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी संख्या है। RJD के उम्मीदवार फैसल रहमान मुस्लिम हैं, और AIMIM के उम्मीदवार की उपस्थिति मुस्लिम वोटों में विभाजन ला सकती है, जो RJD की हार का मुख्य कारण बन सकता है।
करीबी हार का पिछला रिकॉर्ड 2020 में 10,114 वोटों से मिली हार यह बताती है कि RJD अपनी M-Y समीकरण की पूरी ताक़त झोंकने के बावजूद NDA की मजबूत नींव को ध्वस्त नहीं कर पाई। जीत के लिए उसे EBC और अति-पिछड़ी जातियों से और अधिक समर्थन की आवश्यकता है।
स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की चुनौती ढाका का चुनावी इतिहास अस्थिर रहा है, यह दर्शाता है कि यहाँ मतदाता किसी एक पार्टी के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं हैं (2010 में निर्दलीय की जीत, 2015 में RJD की जीत, 2020 में BJP की जीत)। RJD को केवल कोर वोट बैंक पर निर्भर न रहकर स्थानीय विकास और एंटी-इनकम्बेंसी जैसे मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना होगा।
व्यक्तिगत बनाम पार्टी की ताकत पवन कुमार जायसवाल की व्यक्तिगत पकड़ RJD के लिए चुनौती है। रहमान को जीतने के लिए केवल अपने समुदाय के वोटों पर नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के चेहरे और महागठबंधन की सामूहिक शक्ति पर निर्भर रहना होगा।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

ढाका सीट पर मुकाबला हमेशा की तरह गले तक का होगा, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और 2020 के परिणामों के विश्लेषण के आधार पर NDA (BJP) के पवन कुमार जायसवाल का पलड़ा भारी दिख रहा है।

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