Site icon winapoll.com

तरैया का महासंग्राम: क्या ‘मोदी-मैजिक’ के सामने टिक पाएगा RJD का M-Y समीकरण? – 2025 में किसकी होगी जीत!

तरैया विधानसभा सीट सारण जिले की एक अत्यंत कांटे की टक्कर वाली सीट रही है। यहाँ का चुनावी इतिहास स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मतदाता हर चुनाव में गठबंधन और स्थानीय उम्मीदवार के चेहरे पर अपना फैसला बदलते रहे हैं। यह सीट वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास है।

वर्तमान विधायक: जनक सिंह (BJP)1

NDA ने जहाँ वर्तमान विधायक जनक सिंह (BJP) को फिर से मौका दिया है, वहीं महागठबंधन ने अपने पिछले उम्मीदवार को बदलकर शैलेंद्र प्रताप सिंह (RJD) को मैदान में उतारा है।

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

तरैया सीट पर इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार जनक सिंह (BJP) की जीत की संभावना अधिक (Slightly Higher) है, लेकिन यह मुकाबला बेहद कड़ा और कांटे का होगा। यह संभावना मौजूदा विधायक की पकड़ और 2020 में NDA की जीत के कारण स्थापित हुए नए जातीय समीकरण पर आधारित है।


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (NDA – जनक सिंह, BJP)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
वर्तमान विधायक की मजबूत पकड़ और निजी वोट बैंक जनक सिंह (BJP) इस सीट से तीन बार (2005, 2010 और 2020) विधायक रह चुके हैं। उनकी व्यक्तिगत अपील और क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति, साथ ही उनके कोर राजपूत वोट बैंक (लगभग 19.8%) का एकजुट होना, उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
सवर्ण मतों का एकजुट होना तरैया सीट पर राजपूत (19.8%), भूमिहार, और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। BJP उम्मीदवार होने के कारण उन्हें सवर्ण समुदाय का एकमुश्त और ठोस समर्थन मिलने की प्रबल संभावना है।
2020 के परिणामों का रुझान 2020 के चुनाव में, जनक सिंह ने RJD के सिपाही लाल महतो को 11,307 वोटों के अंतर से हराया था। यह जीत RJD के पारंपरिक यादव-मुस्लिम-अति पिछड़ा (M-Y-EBC) गठजोड़ के टूटने और सवर्ण-पिछड़ा (गैर-यादव) वोट के NDA के पक्ष में लामबंद होने का संकेत देती है।
NDA का संगठनात्मक आधार BJP का मजबूत संगठनात्मक ढांचा, केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ और ‘मोदी-मैजिक’ के नाम पर पड़ने वाला वोट NDA उम्मीदवार को एक महत्वपूर्ण बढ़त दिलाएगा।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (महागठबंधन – शैलेंद्र प्रताप सिंह, RJD)

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
उम्मीदवार बदलना और जातीय समीकरण में सेंधमारी RJD ने 2015 के विजेता मुद्रिका प्रसाद राय या 2020 के उपविजेता सिपाही लाल महतो की जगह इस बार शैलेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दिया है। उम्मीदवार बदलने से पुराने समर्थकों में असंतोष हो सकता है। RJD की पूरी निर्भरता उसके कोर यादव (Y) और मुस्लिम (M) वोट बैंक पर होगी।
2020 में M-Y-EBC समीकरण का विफल होना 2015 में यादव, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग के एकजुट समर्थन से RJD के मुद्रिका राय ने बड़ी जीत हासिल की थी (20,440 वोटों से)। लेकिन 2020 में यह समीकरण चरमरा गया, जिससे RJD हार गई। अगर इस बार भी अति पिछड़ा वर्ग और गैर-यादव पिछड़े मतदाताओं का झुकाव NDA की ओर रहा, तो RJD की हार निश्चित है।
कम वोट प्रतिशत की चिंता 2020 में जनक सिंह ने केवल 32.2% वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। इसका मतलब है कि बहुसंख्यक मतदाताओं ने उनके पक्ष में वोट नहीं दिया था। हालाँकि, यह जीत कई निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण वोट के बंटवारे से संभव हुई थी (2020 में 17 उम्मीदवार थे)। यदि महागठबंधन अपने उम्मीदवार को एकजुट रखने में विफल रहा और तीसरे उम्मीदवार ने वोट काटा, तो इसका सीधा फायदा NDA को होगा।
एंटी-इनकम्बेंसी का खतरा जनक सिंह के खिलाफ 15 साल (2005, 2010, 2020) की सत्ता विरोधी लहर भी एक फैक्टर हो सकती है, जिसका लाभ RJD तभी उठा पाएगी जब वह मजबूत स्थानीय मुद्दों और पूर्ण जातीय एकजुटता के साथ मैदान में उतरेगी। 2015 में उनकी हार इसी एंटी-इनकम्बेंसी का परिणाम थी।

यह विश्लेषण तरैया विधानसभा के हालिया चुनावी रुझानों, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत ताकत और जातीय समीकरणों पर आधारित है। यह सीट एक ‘टॉस-अप’ मानी जाती है, जहाँ अंतिम परिणाम पार्टियों के बूथ प्रबंधन और अंतिम समय के गठबंधन की एकजुटता पर निर्भर करेगा।

Exit mobile version