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तेजस्वी का ‘मास्टरस्ट्रोक’: जीविका दीदियों को ₹30,000 मासिक वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा—महिला वोट बैंक पर आरजेडी का सबसे बड़ा दाँव

पटना, 23 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में कूद चुके राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस बार महिला मतदाताओं को साधने के लिए एक अभूतपूर्व और गेम-चेंजिंग चुनावी वादा किया है।3 उन्होंने घोषणा की है कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है, तो राज्य की लाखों ‘जीविका दीदियों’ (सामुदायिक उत्प्रेरक/Community Mobilizers) को स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाएगा और उनका मासिक वेतन बढ़ाकर ₹30,000 कर दिया जाएगा।4

यह वादा बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक तूफान लेकर आया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे मज़बूत वोट बैंक—महिला स्वयं सहायता समूह की कार्यकर्ताओं—को लक्षित करता है।

1. तेजस्वी का ‘जीविका दीदी पैकेज’: वादा और उसका विस्तार

तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल स्थायी नौकरी और ₹30,000 वेतन का वादा ही नहीं किया, बल्कि जीविका दीदियों के लिए एक व्यापक पैकेज की घोषणा की है, जो उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।5

वादा (Promise) विवरण (Detail) चुनावी प्रभाव (Electoral Impact)
सरकारी कर्मचारी का दर्जा जीविका दीदियों (विशेषकर सामुदायिक उत्प्रेरकों – CM दीदियों) को स्थायी सरकारी कर्मचारी बनाया जाएगा। सुरक्षा की भावना पैदा करना और दशकों पुरानी मांग को पूरा करना।
मासिक वेतन ₹30,000 उन्हें ₹30,000 प्रति माह का निर्धारित वेतनमान दिया जाएगा। वर्तमान मानदेय (जो कि बहुत कम है) से सीधा और बड़ा वित्तीय लाभ।
अतिरिक्त भत्ता उन्हें सरकारी कार्यों के लिए हर महीने ₹2,000 का अतिरिक्त मासिक भत्ता दिया जाएगा। प्रोत्साहन राशि देकर उनकी सेवाओं को मान्यता प्रदान करना।
लोन पर ब्याज माफ़ जीविका दीदियों द्वारा लिए गए सभी मौजूदा ऋणों का ब्याज माफ़ किया जाएगा। आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें ‘कर्ज मुक्त’ होने का संदेश देना।
ब्याज मुक्त ऋण उन्हें 2 वर्षों तक ब्याज मुक्त नया ऋण (Interest-Free Loan) प्रदान किया जाएगा। उन्हें नए आजीविका के अवसरों के लिए पूंजी उपलब्ध कराना।
बीमा कवर उन्हें ₹5 लाख तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कवर सुनिश्चित करना।

 

2. ‘जीविका दीदी’: बिहार की महिला शक्ति का आधार

तेजस्वी के इस वादे को समझने के लिए ‘जीविका दीदी’ की राजनीतिक और सामाजिक महत्ता को समझना ज़रूरी है।

जीविका योजना क्या है?

‘जीविका’ (Bihar Rural Livelihoods Project – BRLP) बिहार सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से 2006 में शुरू किया गया था।6 इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण करना है।7 इस योजना के तहत, 10 से 15 महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) बनाए जाते हैं।

जीविका दीदियों की संख्या और भूमिका:

3. राजनीतिक गणित: यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ क्यों है?

तेजस्वी का यह वादा केवल एक लोकलुभावन घोषणा नहीं है, बल्कि एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है:

4. विरोधियों की प्रतिक्रिया और वादे की व्यवहार्यता पर सवाल

तेजस्वी यादव के इस विशालकाय वादे पर NDA के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसकी आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं।10

NDA की आलोचना:

आर्थिक चुनौती (The Fiscal Challenge):

5. तेजस्वी के अन्य प्रमुख चुनावी वादे

जीविका दीदियों के अलावा, तेजस्वी यादव ने अन्य महत्वपूर्ण चुनावी घोषणाएं भी की हैं, जो ‘पढ़ाई, कमाई, सिंचाई, दवाई’ के उनके एजेंडे को मज़बूत करती हैं:

  1. हर परिवार को नौकरी: प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी (20 महीनों में लागू)।12
  2. संविदा कर्मियों का नियमितीकरण: राज्य के लगभग 2 लाख संविदा (Contractual) कर्मचारियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी बनाया जाएगा।
  3. ‘माई-बहन मान योजना’ (MAA Yojna): गरीबी रेखा से नीचे (BPL) की महिला मुखिया को ₹2,500 प्रति माह (5 साल में ₹1.5 लाख) की आर्थिक सहायता।13
  4. उच्च शिक्षा सहायता: स्नातक और स्नातकोत्तर छात्राओं को आर्थिक सहायता, साथ ही मेडिकल और इंजीनियरिंग में 75% तक की फीस सब्सिडी।14
  5. छात्राओं के लिए निःशुल्क यात्रा: छात्राओं के लिए बस और ट्रेन पास की सुविधा।

निष्कर्ष

तेजस्वी यादव का जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30,000 मासिक वेतन का वादा बिहार के चुनावी विमर्श को पूरी तरह से ‘जाति से कल्याण’ और ‘रोज़गार’ की ओर ले जाने का एक साहसिक प्रयास है।15 यह वादे की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाता है, लेकिन इसमें ज़मीनी स्तर पर एक बड़े वोट बैंक को भावनात्मक रूप से प्रेरित करने की जबरदस्त क्षमता है।

जीविका दीदियाँ, जो वर्षों से कम मानदेय और अनिश्चित नौकरी की शिकायत कर रही हैं, के लिए यह घोषणा एक बड़ा उम्मीद की किरण हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार के दशकों के भरोसे का ताला तेजस्वी की इस महत्वाकांक्षी ‘गरीब कल्याण’ की चाबी से खुल पाता है, और क्या महिला मतदाताओं का झुकाव एनडीए के सुरक्षित वादों से हटकर आरजेडी के बड़े और साहसी वित्तीय आश्वासन की ओर होता है। यह वादा इस चुनाव का सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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