त्रिवेणीगंज (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) विधानसभा सीट सुपौल जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिस पर साल 2005 से लगातार जनता दल यूनाइटेड (JDU) का कब्ज़ा रहा है।1 JDU ने 2015 और 2020 में प्रत्याशी बदलकर भी जीत हासिल की, जो यह दर्शाता है कि यह सीट पार्टी की संगठनात्मक मज़बूती और नीतीश कुमार के नेतृत्व पर विश्वास का प्रतीक है।
पिछला चुनावी परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| वीणा भारती (विजेता) | JDU (NDA) | 79,458 | 3,031 वोट |
| संतोष कुमार | RJD (महागठबंधन) | 76,427 | – |
(2020 में जीत का अंतर बहुत कम (केवल 1.70%) था, जिससे यह सीट 2025 में कांटे की टक्कर वाली सीट बन गई है।)3
JDU/NDA उम्मीदवार की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
JDU ने 2025 के लिए निवर्तमान विधायक वीणा भारती का टिकट काटकर सोनम रानी (पार्टी कार्यकर्ता और जिला परिषद सदस्य) को टिकट दिया है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी सत्ता-विरोधी लहर (Anti-Incumbency) से बचने के लिए सक्रिय रूप से उम्मीदवार बदल रही है, न कि केवल व्यक्ति पर निर्भर है।
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| संगठनात्मक मज़बूती और ‘गढ़’ का इतिहास | 2005 से JDU का लगातार नियंत्रण (2009 उपचुनाव सहित) यह सिद्ध करता है कि पार्टी का स्थानीय संगठन बहुत मजबूत है और यह कोर वोट बैंक (अति पिछड़ा/EBC और महादलित) पर मज़बूत पकड़ रखती है। |
| उम्मीदवार बदलने की रणनीति | JDU ने 2015 में अमला देवी का और 2025 में वीणा भारती का टिकट काटकर यह संदेश दिया है कि पार्टी जीत को सुनिश्चित करने के लिए कठोर निर्णय लेने से नहीं हिचकेगी। नए चेहरे (सोनम रानी) को मैदान में उतारना युवा और नए मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है। |
| NDA का समग्र प्रभाव | सुपौल जिले की सभी 5 विधानसभा सीटें (2020 तक) NDA के कब्जे में थीं, जो यह दर्शाता है कि NDA गठबंधन का सामूहिक प्रभाव क्षेत्र में बहुत मज़बूत है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामूहिक प्रचार का लाभ मिलेगा। |
| महिला उम्मीदवार का लाभ | JDU ने एक बार फिर महिला उम्मीदवार को टिकट दिया है। नीतीश कुमार की महिला केंद्रित योजनाओं (साइकिल योजना, पंचायती राज में आरक्षण, जीविका) का लाभ इस महिला प्रत्याशी को मिल सकता है। |
RJD/महागठबंधन उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण
महागठबंधन की ओर से यह सीट पिछली बार की तरह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के खाते में जाने की प्रबल संभावना है, और संतोष कुमार (2020 के उपविजेता और स्थानीय नेता) फिर से मैदान में उतर सकते हैं।
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| कम अंतर से हार को जीत में न बदल पाना | 2020 में RJD के संतोष कुमार केवल 3,031 वोटों से हारे थे। यह बहुत कम अंतर था, लेकिन इसे जीत में न बदल पाना RJD की रणनीति और बूथ प्रबंधन की कमी को दर्शाता है। |
| RJD के ‘M-Y’ समीकरण की सीमा | त्रिवेणीगंज सुरक्षित सीट होने के कारण, RJD का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण सीधे तौर पर प्रभावी नहीं होता। दलित (आरक्षित) वोटों को आकर्षित करने के लिए RJD को M-Y से बाहर जाकर अन्य जातियों को जोड़ना होगा, जिसमें वे अक्सर पीछे रह जाते हैं। |
| LJP (रामविलास) की चुनौती | इस सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की भी नज़र है। यदि LJP (जो NDA का हिस्सा हो सकती है) इस सीट पर उम्मीदवार उतारती है, तो यह RJD के बजाय JDU के वोट बैंक (खासकर पासवान वोटों) को काट सकती है, लेकिन यदि LJP अकेले लड़ती है तो वह RJD के वोटों को भी प्रभावित कर सकती है। |
| स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय/राज्य लहर में न बदल पाना | त्रिवेणीगंज भी बाढ़ और जलजमाव की समस्या से जूझता है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की अपर्याप्तता भी बड़ा मुद्दा है। RJD को इन स्थानीय समस्याओं को सरकार-विरोधी लहर में बदलने के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय अभियान की आवश्यकता होगी। |
| RJD के उम्मीदवार का सीमित व्यक्तिगत प्रभाव | संतोष कुमार एक मजबूत दावेदार हैं, लेकिन JDU के संगठनात्मक किले को भेदने के लिए उन्हें पार्टी की लहर से परे एक व्यापक व्यक्तिगत आधार बनाने की आवश्यकता है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
त्रिवेणीगंज विधानसभा सीट पर 2025 का चुनाव कड़ी टक्कर वाला होगा, लेकिन JDU की संगठनात्मक मज़बूती और उम्मीदवार बदलने की सधी हुई रणनीति के कारण NDA का पलड़ा अब भी भारी दिखता है। RJD के पास 2020 में जीत के बहुत करीब आने का अनुभव है, और कम अंतर से जीत-हार होने की संभावना है।
संभावित विजेता: JDU (NDA) की सोनम रानी
(JDU का ट्रैक रिकॉर्ड और संगठनात्मक पकड़ इस मुश्किल मुकाबले में भी उन्हें बढ़त दिला सकती है।)
