बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दरभंगा जिले की बहादुरपुर सीट हमेशा से ही एक कांटेदार और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबला रही है। यह सीट वर्तमान में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कब्जे में है, जिनके उम्मीदवार बिहार सरकार में मंत्री मदन सहनी हैं। पिछले दो चुनावों (2010 और 2020) में उनकी जीत का अंतर बहुत कम रहा है, जो इस बार मुकाबला रोमांचक बनाता है।

वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और 2024 के लोकसभा चुनाव के रुझान को देखते हुए, NDA गठबंधन (JDU) के उम्मीदवार की जीत की मजबूत संभावना है।

संभावित विजेता: मदन सहनी (जनता दल यूनाइटेड – JDU) – NDA (यदि NDA उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाती है)


मदन सहनी (JDU) की जीत के पक्ष में विस्तृत विश्लेषण और तथ्य:

  1. व्यक्तिगत और जातिगत आधार (सहनी वोट बैंक):
    • मदन सहनी स्वयं अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से आते हैं, जिसकी इस क्षेत्र में बड़ी आबादी है। सहनी (मल्लाह) समुदाय का वोट पारंपरिक रूप से उनका व्यक्तिगत और JDU का मजबूत आधार रहा है।
    • EBC (अति पिछड़ा वर्ग) मतदाता, जो नीतीश कुमार के शासन की योजनाओं के मुख्य लाभार्थी रहे हैं, NDA के लिए एक निर्णायक फैक्टर होते हैं।
  2. छोटे अंतर से जीत का अनुभव (2020):
    • 2020 के चुनाव में, मदन सहनी ने RJD के रमेश चौधरी को सिर्फ 2,629 वोटों (1.50%) के बहुत कम अंतर से हराया था। 2010 में भी उनकी जीत का अंतर मात्र 643 वोट था। हालांकि अंतर कम है, यह दर्शाता है कि मदन सहनी कड़ी टक्कर के बावजूद अपनी सीट बचाने में सक्षम रहे हैं।
  3. विकास कार्य और मंत्री पद का लाभ:
    • मंत्री होने के नाते, मदन सहनी ने क्षेत्र में कई विकास कार्यों को हरी झंडी दिलाई है (जैसे एम्स निर्माण, आईटी पार्क, हाईस्कूलों का उन्नयन, पुल निर्माण)। यह ‘विकास बनाम जाति’ की लड़ाई में उन्हें बढ़त दे सकता है।
  4. NDA की एकजुटता और लोकसभा रुझान:
    • 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA ने बहादुरपुर विधानसभा खंड में 37,374 वोटों की अच्छी बढ़त हासिल की थी। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि बड़े गठबंधन के रूप में NDA को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है।
    • RJD के 2020 के उपविजेता रमेश चौधरी का अब भाजपा (NDA) में शामिल होना, JDU के लिए और भी अनुकूल माहौल बनाता है, क्योंकि इससे RJD का एक मजबूत दावेदार और उसके साथ जुड़ा वोट बैंक अब NDA के पाले में आ सकता है।

महागठबंधन/RJD उम्मीदवार की हार के प्रतिकूल तथ्य और आंकड़े:

यदि महागठबंधन RJD के भोला यादव को (जो 2015 में जीते थे और अब शायद दूसरी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं) या माकपा के श्याम भारती को (जिन्होंने दावेदारी की है) अपना उम्मीदवार बनाता है, तो उनके सामने निम्नलिखित चुनौतियाँ होंगी:

  1. महागठबंधन में टिकट को लेकर भ्रम:
    • बहादुरपुर सीट पर RJD (भोला यादव) और माकपा (श्याम भारती) दोनों ही 2025 के लिए महागठबंधन की तरफ से टिकट की दावेदारी कर चुके हैं। यह आंतरिक खींचतान कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करती है और चुनाव से पहले ही महागठबंधन के आधार को कमजोर करती है।
  2. RJD के उपविजेता का NDA में जाना:
    • 2020 में RJD के उपविजेता रमेश चौधरी अब NDA (भाजपा) में शामिल हो चुके हैं। उनके जाने से RJD के यादव या गैर-यादव ओबीसी वोटों का एक हिस्सा NDA की ओर खिसक सकता है, जिससे RJD की स्थिति कमजोर होगी।
  3. जातीय समीकरण का जटिल होना:
    • RJD का मुख्य आधार मुस्लिम-यादव (‘MY’) समीकरण है। बहादुरपुर में मुस्लिम (20%+) और यादव (15%+) मतदाताओं की संख्या अच्छी है। हालांकि, EBC, सहनी समुदाय (EBC) और पासवान (SC) मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 10%+) NDA के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।
  4. लोजपा (रामविलास) का प्रभाव:
    • 2020 में लोजपा (जो तब NDA से बाहर थी) के उम्मीदवार देवेंद्र कुमार झा को 16,873 वोट (9.69%) मिले थे। ये वोट मुख्य रूप से पासवान और NDA समर्थक माने जाते हैं। 2025 में लोजपा के NDA का हिस्सा होने से ये वोट सीधे JDU उम्मीदवार के खाते में जा सकते हैं, जिससे RJD के लिए अंतर को पाटना लगभग असंभव हो जाएगा।

निष्कर्ष और पूर्वानुमान:

बहादुरपुर विधानसभा सीट पर मदन सहनी (JDU-NDA) के सामने 2025 में भी कड़ी चुनौती होगी, लेकिन इस बार NDA की मजबूत एकजुटता, रमेश चौधरी का भाजपा में जाना, और लोजपा के वोटों का सीधा लाभ उन्हें निर्णायक बढ़त दिला सकता है। वहीं, महागठबंधन के लिए उम्मीदवार को लेकर असमंजस और वोटों का संभावित बिखराव उनकी राह कठिन करेगा।

पूर्वानुमान: मदन सहनी (JDU-NDA) एक बार फिर कड़े मुकाबले के बाद बहादुरपुर सीट पर जीत दर्ज करेंगे।

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