दरौंदा विधानसभा सीट सीवान जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण सामान्य सीट है, जिस पर वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP/NDA) का कब्जा है। यह सीट एक ‘कांटे के मुकाबले’ के लिए जानी जाती है, जहाँ मुख्य लड़ाई NDA और महागठबंधन (भाकपा माले) के बीच होती है।
जीत की संभावना (पूर्वानुमान)
वर्तमान राजनीतिक रुझानों, 2024 के लोकसभा प्रदर्शन और जातीय समीकरणों के आधार पर, कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह (BJP/NDA) की जीत की संभावना अधिक है। हालांकि, भाकपा माले से कड़ी टक्कर मिलनी तय है।
विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह – BJP / NDA)
| तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| 2024 लोकसभा चुनाव की प्रचंड बढ़त | 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA की उम्मीदवार (JDU) को दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में 27,462 वोटों की भारी बढ़त मिली थी। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राष्ट्रीय मुद्दों और गठबंधन की एकजुटता ने इस क्षेत्र में NDA के पक्ष में एक मजबूत लहर पैदा की है। |
| वर्तमान विधायक की पकड़ और जातिगत समीकरण | वर्तमान विधायक कर्णजीत सिंह (BJP) ‘व्यास सिंह’ के नाम से जाने जाते हैं और प्रभावशाली सवर्ण (राजपूत/भूमिहार) वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ है, जो BJP का कोर वोट बैंक है। इसके अलावा, JDU के अति पिछड़ा वर्ग और महादलित वोटों का समर्थन NDA को निर्णायक बढ़त दिलाता है। |
| पिछली जीत का आँकड़ा (2020) | 2020 के चुनाव में, कर्णजीत सिंह ने भाकपा माले के उम्मीदवार को 11,320 वोटों के अंतर से हराया था। 44.09% वोट शेयर के साथ उन्होंने अपनी व्यक्तिगत और पार्टी की ताकत को साबित किया। |
| महागठबंधन के वोट में संभावित बिखराव | महागठबंधन में RJD, कांग्रेस और भाकपा माले (CPI-ML) शामिल हैं। यदि RJD का ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) वोट पूरी तरह से CPI-ML को हस्तांतरित नहीं होता है, तो NDA के लिए जीत आसान हो जाएगी। |
अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (अमरनाथ यादव – CPI-ML / महागठबंधन)
| प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी | विश्लेषण एवं कारण |
| CPI-ML के लिए ‘M-Y’ का पूरा हस्तांतरण एक चुनौती | महागठबंधन के समीकरण के तहत, RJD का कोर ‘M-Y’ वोट CPI-ML को ट्रांसफर होना आवश्यक है। भाकपा माले की आधारभूत पकड़ मुख्य रूप से दलित, गरीब पिछड़ा और वामपंथी झुकाव वाले वर्गों में है। यादव (12%) और मुस्लिम (11.70%) वोटों का शत-प्रतिशत समर्थन मिलना हमेशा एक चुनौती होती है, खासकर जब RJD स्वयं मैदान में न हो। |
| 2024 लोकसभा चुनाव का भारी अंतर | लोकसभा चुनाव में NDA की 27,000+ वोटों की बढ़त महागठबंधन के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। इस बड़े अंतर को पाटना CPI-ML के लिए मुश्किल होगा, खासकर जब विधानसभा चुनाव में मतदान का पैटर्न अलग हो सकता है। |
| ‘एब्सेंट वोट’ (कम मतदान) का डर | 2020 में इस सीट पर केवल 50.2% मतदान हुआ था। यह पूरी तरह से ग्रामीण सीट है। यदि शहरी/उच्च वर्ग (NDA समर्थक) और अति पिछड़ा/दलित (NDA समर्थक) मतदाता अधिक संख्या में मतदान करते हैं, तो यह सीधे तौर पर CPI-ML के खिलाफ जा सकता है। |
| सवर्ण-अतिपिछड़ा-दलित वोटों का समीकरण | भाजपा ने यहाँ सवर्ण + अति पिछड़ा + महादलित वोटों के मजबूत गठजोड़ पर भरोसा किया है, जो महागठबंधन के M-Y-वामपंथी समीकरण को चुनौती देता है। CPI-ML को जीतने के लिए M-Y के साथ-साथ इन वर्गों के एक बड़े हिस्से को भी अपने पाले में लाना होगा, जो मुश्किल है। |
यह विश्लेषण उपलब्ध चुनावी डेटा और राजनीतिक रुझानों पर आधारित है। अंतिम परिणाम मतदाता के फैसले पर निर्भर करेगा।
