Site icon winapoll.com

दरौली का ‘लाल’ दुर्ग: क्या सत्यदेव राम लगा पाएंगे जीत की हैट्रिक या NDA का ‘राम’ समीकरण करेगा उलटफेर?

दरौली विधानसभा सीट, जो 2010 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, सीवान जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है। यह क्षेत्र वामपंथी राजनीति (CPI(ML)L) का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। इस सीट पर मुख्य मुकाबला महागठबंधन और NDA के बीच ही केंद्रित रहेगा।

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

वर्तमान विधायक और CPI(ML)L के सत्यदेव राम लगातार दो बार (2015 और 2020) जीत हासिल कर चुके हैं। दरौली में CPI(ML)L की मजबूत सामाजिक और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए, सत्यदेव राम (CPI(ML)L / महागठबंधन) को इस सीट पर एक बार फिर से आगे माना जा सकता है।


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (सत्यदेव राम – CPI(ML)L / महागठबंधन)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
लगातार दो बार की जीत (हैट्रिक की ओर) सत्यदेव राम ने 2015 और 2020 में लगातार दो बार जीत हासिल की है। यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और वामपंथी दल के प्रति स्थानीय दलित, गरीब और अति-पिछड़ा वर्ग के एक बड़े हिस्से के भरोसे को दर्शाता है।
मजबूत ‘M-Y-दलित’ आधार यह सीट CPI(ML)L के कब्जे में है, जो महागठबंधन (RJD के साथ) का हिस्सा है। RJD के पारंपरिक यादव और मुस्लिम वोट बैंक के साथ CPI(ML)L को दलित (आरक्षित सीट) और भूमिहीन गरीबों का समर्थन मिलता है। यह संयुक्त वोट आधार उन्हें एक निर्णायक बढ़त देता है।
2020 का प्रदर्शन 2020 में सत्यदेव राम ने BJP के रामायण मांझी को 12,119 वोटों (7.80% अंतर) से हराया था। 50.5% वोट शेयर यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने गठबंधन और कोर मतदाताओं को एकजुट करने में सफलता प्राप्त की थी।
जमीनी संगठन और वर्ग संघर्ष की राजनीति CPI(ML)L अपनी मजबूत ‘ग्राउंड पॉलिटिक्स’, किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर सक्रियता के लिए जानी जाती है। यह संगठनात्मक सक्रियता उन्हें गरीब और वंचित मतदाताओं के बीच गहरी पैठ बनाने में मदद करती है।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (NDA उम्मीदवार – संभावित BJP/LJP(RV))

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
2024 लोकसभा चुनाव की लीड (NDA) 2024 के लोकसभा चुनाव में, NDA (JDU/BJP) को दरौली विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन पर बढ़त मिली थी। यह सबसे बड़ी चुनौती है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय मुद्दों और बड़े गठबंधन की एकजुटता होने पर NDA उच्च जाति, अति-पिछड़ा और अन्य दलित वोटों को लामबंद कर सकती है।
विधायक के प्रति ‘आक्रोश’ (Anti-Incumbency) कुछ स्थानीय रिपोर्टों और सोशल मीडिया क्लिप्स (उदा. दोन बाजार) में विधायक के प्रति सड़क, जलजमाव और विकास कार्यों की अनदेखी को लेकर जनता में असंतोष की बात सामने आई है। यह सत्ता विरोधी लहर सत्यदेव राम के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
NDA का ‘राम’ समीकरण NDA, विशेषकर BJP, का पारंपरिक उच्च-जाति का वोट बैंक मजबूत है। इसके अलावा, NDA ने दलित वोट बैंक (आरक्षित सीट) में सेंध लगाने के लिए प्रयास किए हैं (जैसे 2025 चुनाव में LJP(RV) से विष्णु देव पासवान को टिकट)। यदि गैर-पासवान दलित और उच्च-जाति के वोट एकजुट हो जाते हैं, तो मुकाबला करीबी हो जाएगा।
कम मतदान प्रतिशत दरौली में मतदान प्रतिशत 2020 में 50.4% रहा, जो तुलनात्मक रूप से कम है। यदि NDA अपने उदासीन उच्च-जाति और अन्य कोर मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक लाने में सफल रहती है, तो 2020 के अंतर को आसानी से पाटा जा सकता है।

निष्कर्ष:

दरौली की लड़ाई सीधे तौर पर वामपंथी विचारधारा के जमीनी आधार (सत्यदेव राम) और NDA के मजबूत जातीय एवं राष्ट्रीय समीकरणों के बीच है। वर्तमान में, महागठबंधन का M-Y-दलित कॉम्बिनेशन और सत्यदेव राम की व्यक्तिगत पकड़ उन्हें बढ़त दिलाती है। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव का रुझान और स्थानीय एंटी-इंकम्बेंसी का संभावित असर NDA के लिए अवसर पैदा करता है। यह एक ऐसी सीट है जहां CPI(ML)L को अपनी हैट्रिक पूरी करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, और NDA को स्थानीय असंतोष को वोटों में बदलना होगा। यह चुनाव सत्यदेव राम के लिए उनके ‘लाल दुर्ग’ को बचाने की कड़ी परीक्षा होगा।

Exit mobile version