परिणाम की भविष्यवाणी:
नरकटिया विधानसभा सीट (पूर्वी चंपारण) एक मजबूत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का गढ़ रही है, जहां वर्तमान विधायक शमीम अहमद लगातार दो बार (2015 और 2020) भारी अंतर से जीत चुके हैं।1
$2025$ के चुनाव में, NDA की ओर से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विशाल साह मैदान में हैं, जो एक नए चेहरे हैं।
गहन विश्लेषण के आधार पर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के शमीम अहमद की जीत की संभावना अधिक है। हालांकि, $JDU$ के लिए $NDA$ गठबंधन की एकजुटता और युवा उम्मीदवार विशाल साह की नई ऊर्जा मुकाबला कड़ा बना सकती है।
I. आरजेडी (RJD) के शमीम अहमद की जीत के पक्ष में विश्लेषण (अनुकूल तथ्य)
शमीम अहमद (RJD) की जीत को मजबूती देने वाले प्रमुख विश्लेषणात्मक कारक निम्नलिखित हैं:
1. अजेय ‘MY’ समीकरण और भारी जीत का अंतर
- M-Y की अभेद्य दीवार: नरकटिया सीट मुस्लिम-यादव (M-Y) बहुल क्षेत्र है, जो RJD का कोर वोट बैंक है। शमीम अहमद मुस्लिम समुदाय से आते हैं, जिससे मुस्लिम वोट का लगभग $100\%$ ध्रुवीकरण उनके पक्ष में होता है।
- $2020$ का विशाल मार्जिन: पिछले चुनाव में शमीम अहमद ने JDU उम्मीदवार श्याम बिहारी प्रसाद को 2$27,791$ वोटों (लगभग 3$15.60\%$ के बड़े अंतर) से हराया था।4 यह अंतर दर्शाता है कि यह सीट RJD के लिए कितनी सुरक्षित मानी जाती है।
2. व्यक्तिगत पहचान और लगातार जीत
- जनता की पसंद: शमीम अहमद 5$2015$ से लगातार विधायक हैं।6 यह उनकी स्थानीय लोकप्रियता और जमीनी पकड़ को दर्शाता है। लगातार दो बार के विधायक होने के कारण उन्हें अपने आधार वोट को एकजुट करने में आसानी होगी।
- विकास बनाम जाति: $RJD$ को M-Y के साथ-साथ तेजस्वी यादव के ‘रोजगार/विकास’ के एजेंडे से मिलने वाला युवा और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का अतिरिक्त समर्थन उनकी जीत सुनिश्चित कर सकता है।
3. वोटों का $LJP$ विभाजन का लाभ
- $2020$ में, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के उम्मीदवार सोनू कुमार ने $20,494$ वोट प्राप्त करके $NDA$ के वोटों में सेंध लगाई थी। इस बार $JDU$ के उम्मीदवार होने के बावजूद, $NDA$ के पारंपरिक वोट बैंक (सवर्ण, वैश्य और अति पिछड़ा वर्ग) में चिराग पासवान की $LJP(R)$ की अनुपस्थिति में भी, विशाल साह (एक नए उम्मीदवार) के लिए सभी वोटों को $100\%$ एकजुट करना चुनौतीपूर्ण होगा।
II. एनडीए (JDU) के विशाल साह की हार के विपक्ष में विश्लेषण (प्रतिकूल तथ्य)
NDA (JDU) के उम्मीदवार विशाल साह की जीत की संभावनाओं को कम करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. नए चेहरे की चुनौती और $RJD$ का मजबूत किला
- नए उम्मीदवार का जोखिम: 7$JDU$ ने नरकटिया से एक नया चेहरा, विशाल साह को मैदान में उतारा है।8 $RJD$ के मजबूत, स्थापित विधायक के खिलाफ नए उम्मीदवार को उतारने से जमीनी स्तर पर पकड़ बनाने में कठिनाई आ सकती है।
- बनाम अनुभवी नेता: विशाल साह का मुकाबला लगातार दो बार के विधायक शमीम अहमद से है, जिनकी स्थानीय राजनीति में गहरी पैठ है, जिससे विशाल साह के लिए यह एक बहुत कठिन लड़ाई बन जाती है।
2. विशाल साह के लिए जातिगत गणित की जटिलता
- $M-Y$ के सामने चुनौती: विशाल साह, वैश्य समुदाय से आते हैं, जो $NDA$ का पारंपरिक वोट बैंक है। हालांकि, यह सीट $RJD$ के $M-Y$ कोर के कारण भारी है। विशाल साह को जीतने के लिए $JDU$ के अति पिछड़ा (EBC) और सवर्ण वोट बैंक के साथ-साथ $M-Y$ समीकरण में बड़ी सेंधमारी करनी होगी, जो $2020$ के परिणाम को देखते हुए मुश्किल है।
- पिछले 9$JDU$ उम्मीदवार की हार: 10$2020$ में 11$JDU$ के पुराने और स्थापित नेता श्याम बिहारी प्रसाद भी शमीम अहमद से भारी अंतर से हार गए थे।12 नया उम्मीदवार होने के नाते, विशाल साह के लिए उस अंतर को पाटना एक विशाल चुनौती है।
3. विकास बनाम $NDA$ की पिछली उपलब्धियां
- एंटी-इनकम्बेंसी का दबाव: $2010$ में $JDU$ ने यह सीट जीती थी, लेकिन $2015$ और $2020$ में उसे हार मिली। $JDU$ को अपनी पिछली हार के कारणों पर विचार करना होगा। यदि मतदाता स्थानीय विकास के मुद्दों पर $NDA$ की सरकार से असंतुष्ट हैं, तो $RJD$ उम्मीदवार को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
- पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का मुद्दा: शमीम अहमद पर उनके शपथ पत्र में आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने के आरोप लगे थे और उन्हें हाईकोर्ट का नोटिस भी मिला था। हालांकि, यदि ये आरोप चुनावी मुद्दा नहीं बन पाते हैं और मतदाता उन्हें दरकिनार कर देते हैं, तो $NDA$ को यह नैतिक आधार खोना पड़ सकता है।
निष्कर्ष: नरकटिया सीट पर $RJD$ के शमीम अहमद की पकड़ बहुत मजबूत है। $2020$ का $27,791$ वोटों का विशाल अंतर $NDA$ के लिए एक बड़ी चुनौती है। $JDU$ के विशाल साह एक युवा उम्मीदवार के रूप में $NDA$ के लिए नई उम्मीदें लेकर आए हैं, लेकिन $RJD$ के अजेय $M-Y$ गठबंधन और शमीम अहमद की व्यक्तिगत लोकप्रियता के सामने उनकी जीत की राह बेहद मुश्किल है। $RJD$ की जीत की संभावना अधिक है।
