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नरपतगंज का ‘जाति-अभेद्य दुर्ग’: क्या BJP के ‘यादव’ विधायक दोहरा पाएंगे इतिहास या RJD करेगा मज़बूत वापसी?

अररिया जिले की नरपतगंज विधानसभा सीट बिहार की सबसे अनूठी सीटों में से एक है, जहाँ 15 में से 14 बार जीत केवल यादव प्रत्याशी को ही मिली है, भले ही पार्टी कोई भी रही हो।1 2020 में इस सीट पर भाजपा (NDA) के जय प्रकाश यादव ने भारी मतों से जीत हासिल की थी।

पिछला चुनावी परिणाम (2020) – बड़ी जीत:

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट जीत का अंतर
जय प्रकाश यादव (विजेता) BJP (NDA) 98,397 28,610 वोट
अनिल कुमार यादव RJD (महागठबंधन) 69,787

(यह जीत का अंतर 14.30% था, जो सीमांचल की इस सीट पर एक बड़ी सफलता थी।)


BJP/NDA उम्मीदवार (जय प्रकाश यादव) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

वर्तमान विधायक जय प्रकाश यादव ने 2020 में बड़ी जीत दर्ज की थी और 2025 में भी वह प्रमुख दावेदार होंगे।4 उनकी जीत के प्रमुख कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
यादव होने का ‘अभेद्य’ फायदा नरपतगंज सीट पर यादव समुदाय (लगभग 30%) का प्रभुत्व है। इस सीट का इतिहास रहा है कि यादव प्रत्याशी ही जीतते हैं। जय प्रकाश यादव यादव समुदाय से आते हैं, जिससे उन्हें इस बड़े वोट बैंक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मिलता है।
BJP का मजबूत संगठन और राष्ट्रीय लहर NDA गठबंधन, खासकर भाजपा का मजबूत संगठनात्मक ढांचा, बूथ स्तर तक पकड़ और प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर पड़ने वाला सवर्ण, वैश्य, और कुछ अति-पिछड़ा वोट बैंक उन्हें भारी बढ़त दिलाता है।
2020 का बड़ा जीत का अंतर 2020 में 28,610 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल करना उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और विपक्षी लहर को काटने की क्षमता को दर्शाता है। इस अंतर को पाटना RJD के लिए बहुत मुश्किल होगा।
‘गैर-RJD यादव’ का ध्रुवीकरण RJD का यादव वोट बैंक अनिल यादव के साथ था, लेकिन जय प्रकाश यादव एक गैर-RJD यादव नेता के रूप में यादवों के एक वर्ग को अपनी ओर खींचने और NDA के पारंपरिक वोटों को एकजुट करने में सफल रहे।
मुस्लिम वोटों का बिखराव सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता (लगभग 25%) निर्णायक हैं। यदि AIMIM जैसी पार्टियाँ 2025 में भी चुनाव लड़ती हैं और मुस्लिम वोटों में बिखराव होता है, तो इसका सीधा लाभ NDA को मिलेगा।

RJD/महागठबंधन उम्मीदवार (संभावित अनिल कुमार यादव) की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण

महागठबंधन की ओर से पिछली बार के उपविजेता अनिल कुमार यादव (RJD) प्रमुख उम्मीदवार हो सकते हैं। उनकी हार के संभावित कारण:

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) विवरण
RJD के ‘MY’ समीकरण में सेंध RJD का आधार यादव (M-Y) और मुस्लिम (M-Y) वोटों पर निर्भर करता है। नरपतगंज में यादव प्रत्याशी ही जीतता है, लेकिन 2020 में RJD अपने यादव उम्मीदवार के बावजूद हार गई। इसका मतलब है कि यादव वोट बैंक में बड़ा विभाजन हुआ है।
स्थानीय मुद्दों पर विधायक की निष्क्रियता का लाभ न मिलना नरपतगंज में बाढ़, बेरोजगारी, पलायन और ख़राब सड़कों जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता के बीच नहीं भुना पाया। यदि RJD 2025 में भी केवल जातीय समीकरण पर निर्भर रही और स्थानीय समस्याओं को उजागर नहीं किया, तो हार सुनिश्चित है।
मुस्लिम वोटों को एकजुट न कर पाना मुस्लिम मतदाता यहाँ की आबादी का लगभग 25% हैं। RJD को यह सीट जीतने के लिए पूरे मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करना होगा और साथ ही यादवों के एक बड़े वर्ग को भी। 2020 में AIMIM जैसी पार्टियों के कारण मुस्लिम वोटों का बिखराव हुआ था।
कमज़ोर संगठनात्मक ताकत 2020 में 28 हज़ार वोटों से हारना RJD की कमजोर बूथ प्रबंधन और चुनावी मशीनरी को दर्शाता है। भाजपा के मजबूत संगठन के सामने RJD को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मज़बूत करनी होगी।
‘पार्टी से ऊपर जाति’ का सिद्धांत नरपतगंज का इतिहास रहा है कि यहाँ मतदाता पार्टी से ज़्यादा जाति (यादव उम्मीदवार) को प्राथमिकता देते हैं। भाजपा ने भी यादव उम्मीदवार देकर RJD के कोर वोट बैंक में सेंध लगा दी है, जिससे RJD का पलड़ा हल्का हो गया।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

नरपतगंज सीट पर सीधा मुकाबला BJP के जय प्रकाश यादव और RJD के अनिल कुमार यादव (संभावित) के बीच होने की संभावना है।

जय प्रकाश यादव (BJP) की स्थिति मजबूत दिखती है। उन्हें मज़बूत व्यक्तिगत यादव जनाधार, NDA का संगठनात्मक बल, 2020 की बड़ी जीत का आत्मविश्वास और मुस्लिम वोटों के संभावित बिखराव का लाभ मिल सकता है। RJD को यह सीट जीतने के लिए यादव-मुस्लिम समीकरण को 2015 की तरह पूरी तरह से एकजुट करना होगा और स्थानीय मुद्दों पर एक विश्वसनीय चेहरा पेश करना होगा।

संभावित विजेता: जय प्रकाश यादव (BJP – NDA)

(सीट जीतने की प्रबल संभावना, बशर्ते RJD यादव-मुस्लिम गठजोड़ को पूरी तरह एकजुट न कर पाए।)

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