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नाथनगर का गढ़: क्या RJD दोहराएगी 2020 का उलटफेर, या JDU-LJP(R) का ‘मंडल दांव’ फिर पलट देगा बाज़ी?

नाथनगर विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

नाथनगर विधानसभा सीट पर 2025 में मुकाबला मुख्य रूप से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और NDA गठबंधन (जहाँ यह सीट गठबंधन के तहत लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) या JDU को मिल सकती है) के बीच होने की संभावना है। 2020 में यह सीट RJD ने जीती थी, इसलिए उस जीत को बरकरार रखना RJD के लिए बड़ी चुनौती होगी।

वर्तमान विश्लेषण के आधार पर, यह सीट RJD के लिए थोड़ी अधिक अनुकूल दिखती है, लेकिन NDA की मजबूत दावेदारी से यह मुकाबला अत्यंत करीबी रहेगा।

संभावित विजेता उम्मीदवार: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार (शेख जियाउल हसन/पुराने उम्मीदवार)

RJD के उम्मीदवार (संभवतः शेख जियाउल हसन या कोई अन्य नया चेहरा) की जीत की मजबूत संभावना है, लेकिन मुकाबला बेहद करीबी होगा।

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण की निर्णायक शक्ति: नाथनगर सीट पर मुस्लिम (लगभग 22.3%) और यादव मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है, जो RJD का मुख्य आधार हैं। 2020 में RJD की जीत का मुख्य कारण MY समीकरण का प्रभावी ध्रुवीकरण था, और 2025 में भी यह RJD की सबसे बड़ी ताकत रहेगी।
2. पिछली जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ (2020 का आँकड़ा): 2020 में RJD के अली अशरफ सिद्दिकी ने JDU के लक्ष्मीकांत मंडल को 7,756 वोटों (4.00% अंतर) से हराया था। इस जीत ने नाथनगर को JDU के गढ़ से निकालकर RJD के खाते में डाल दिया है, जिससे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में आत्मविश्वास बढ़ा है।
3. नए उम्मीदवार का प्रशासनिक अनुभव (यदि शेख जियाउल हसन): RJD ने 2025 के लिए शेख जियाउल हसन (जिया भाई) को मैदान में उतारा है, जो एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी (बीडीओ) हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव पद से इस्तीफा देकर राजनीति में आना मतदाताओं के बीच विकास और बदलाव की छवि बना सकता है।
4. तेजस्वी यादव का प्रभाव: तेजस्वी यादव की ओर से किए गए रोजगार और विकास के वादे युवा मतदाताओं के बीच RJD की अपील को बढ़ाते हैं, जो इस करीबी मुकाबले में निर्णायक हो सकते हैं।

विपक्षी उम्मीदवार (NDA – JDU/LJP(R)) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

NDA उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. JDU के गढ़ का टूटना (2020 की हार): यह सीट एक समय JDU (सुधा श्रीवास्तव 3 बार, अजय मंडल 2 बार) का मजबूत गढ़ थी, लेकिन 2020 में 7,756 वोटों से हार ने इस पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यह हार दर्शाती है कि JDU के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी हुई है।
2. NDA में सीटों का जटिल समीकरण: अगर यह सीट गठबंधन में LJP (रामविलास) (संभावित उम्मीदवार: मिथुन कुमार) को जाती है, तो JDU के कुछ पारंपरिक वोट LJP(R) को ट्रांसफर होंगे। LJP(R) यादव और दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश करेगी। NDA के वोटों का विभाजन (JDU के ईबीसी आधार, सवर्णों का बीजेपी/LJP पर भरोसा) RJD को लाभ पहुँचा सकता है।
3. सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): JDU के लगातार लंबे शासन (2005 से 2020 तक) के कारण स्थानीय विधायक के खिलाफ एक सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का प्रभाव 2020 में दिखा था, जिसका लाभ RJD को मिला। 2025 में भी यह लहर RJD के लिए अनुकूल स्थिति बना सकती है।
4. जातीय विभाजन की चुनौती: NDA की जीत मुख्यतः कुर्मी-कोइरी-सवर्ण-दलित वोटों के एकजुट होने पर निर्भर करती है। RJD के सामने AIMIM (मो. इस्माइला) भी मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करेगा, लेकिन यह RJD की अपेक्षा NDA के वोट बैंक पर कम असर डालेगा।

निष्कर्ष:

नाथनगर विधानसभा सीट पर 2025 में RJD की बढ़त है, क्योंकि उसके पास मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण की मजबूत नींव और 2020 की जीत का मनोवैज्ञानिक समर्थन है। NDA गठबंधन के वोटों (विशेष रूप से JDU के EBC और LJP(R) के दलित) में बँटवारे की थोड़ी भी संभावना RJD की जीत को सुनिश्चित कर सकती है। NDA उम्मीदवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती JDU के गढ़ को वापस पाना और RJD के एकजुट MY समीकरण को भेदना होगा, जो एक कठिन काम है। यह मुकाबला बिहार चुनाव 2025 के सबसे रोमांचक और करीबी मुकाबलों में से एक होने की उम्मीद है।

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