1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला

 

गठबंधन/पार्टी संभावित उम्मीदवार स्थिति और पृष्ठभूमि
NDA (JD(U)) श्रवण कुमार (वर्तमान विधायक और मंत्री) लगातार 7 बार (समता पार्टी/JD(U) से) चुनाव जीत चुके हैं। मजबूत कुर्मी समुदाय से आते हैं और नीतीश कुमार के करीबी हैं।
महागठबंधन (RJD/अन्य) संभावित नए/पुराने चेहरे (2020 में JVP के कौशलेंद्र कुमार उपविजेता थे) RJD इस सीट पर कभी नहीं जीत पाई है। मजबूत यादव उम्मीदवार या भूमिहार उम्मीदवार उतारने की संभावना।

 

2️⃣ 🏆 श्रवण कुमार (JD(U)/NDA) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)

श्रवण कुमार (JD(U)) के पक्ष में निम्नलिखित निर्णायक कारक हैं:

  • नीतीश कुमार का ‘गृह जिला’ फैक्टर: नालंदा सीट सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है। यह उनकी कर्मभूमि है, जहाँ विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। यहाँ के मतदाता स्थानीय समीकरणों से ऊपर उठकर मुख्यमंत्री की साख के लिए वोट करते आए हैं।
  • अजेय रिकॉर्ड और राजनीतिक विरासत: श्रवण कुमार का लगातार 7 बार चुनाव जीतना उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता, स्थानीय पकड़ और JD(U) के गढ़ पर उनकी मजबूत दावेदारी को दर्शाता है।
  • कुर्मी-कोइरी और EBC समीकरण: नालंदा सीट कुर्मी बहुल है (जिससे श्रवण कुमार आते हैं)। साथ ही, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दलितों का एक बड़ा हिस्सा नीतीश कुमार के सामाजिक न्याय के एजेंडे और उनके द्वारा किए गए कार्यों के कारण JD(U) के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।
  • विकास पर फोकस: नालंदा में सड़कों, बिजली और जल आपूर्ति (गंगाजल आपूर्ति योजना) जैसे विकास कार्यों को NDA मुख्य चुनावी मुद्दा बनाएगी, जो शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाताओं को प्रभावित करता है।

 

3️⃣ ❌ महागठबंधन (RJD) की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)

महागठबंधन (RJD) के लिए इस सीट पर जीत हासिल करना मुश्किल है क्योंकि:

  • RJD का ‘जीरो’ रिकॉर्ड: RJD इस सीट पर आज तक कभी नहीं जीत पाई है। यह ऐतिहासिक तथ्य RJD के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक अवरोध है।
  • यादव वोट का अपर्याप्त होना: नालंदा में यादवों की बड़ी संख्या है, जो RJD का आधार है। हालांकि, यह संख्या अकेले चुनाव जीतने के लिए काफी नहीं है। जब तक RJD अन्य महत्वपूर्ण जातियों (जैसे कुर्मी, सवर्ण या EBC) में बड़ी सेंध नहीं लगाती, जीत संभव नहीं है।
  • कमजोर विपक्ष का चेहरा: 2020 में, RJD ने सीधे तौर पर यह सीट नहीं लड़ी थी, और उपविजेता एक छोटी पार्टी के उम्मीदवार थे। एक मजबूत, सर्वमान्य, और स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय विपक्षी चेहरे की कमी RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
  • नीतीश कुमार के खिलाफ भावनात्मक वोट की कमी: यह सीट सीधे नीतीश कुमार से जुड़ी होने के कारण, यहाँ के मतदाताओं में उस स्तर की एंटी-इनकम्बेंसी देखने को नहीं मिलती है जो राज्य के अन्य हिस्सों में हो सकती है। लोग स्थानीय विधायक से नाराज़ हो सकते हैं, लेकिन CM के नाम पर NDA को वोट दे सकते हैं।

 

4️⃣ निर्णायक फैक्टर: कुर्मी वोट में बँटवारा और तेजस्वी का करिश्मा

  • कुर्मी वोट का बँटवारा: यदि RJD या कोई अन्य पार्टी कुर्मी समुदाय से ही किसी मजबूत बागी या असंतुष्ट उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो JD(U) के कोर वोट में सेंध लग सकती है, जिससे मुकाबला कड़ा हो सकता है। 2020 में यह सेंध अन्य उम्मीदवार ने लगाई थी।
  • तेजस्वी का प्रभाव: यदि बिहार में तेजस्वी यादव के पक्ष में एक मजबूत युवा लहर और रोजगार के मुद्दों का व्यापक प्रभाव दिखता है, तो यह पारंपरिक जातीय समीकरणों को तोड़ सकता है और RJD को जीत के लिए आवश्यक अतिरिक्त वोट दिला सकता है।

निष्कर्ष:

नालंदा सीट NDA (JD(U)) का सबसे मजबूत गढ़ बनी हुई है। श्रवण कुमार का व्यक्तिगत जनाधार, नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा और मजबूत कुर्मी-EBC समीकरण इसे JD(U) की जीत के लिए सबसे सुरक्षित सीट बनाते हैं।

महागठबंधन (RJD) को इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए कुर्मी-सवर्ण-EBC वोटों में बड़ी सेंध लगाने के लिए एक असाधारण उम्मीदवार और राज्यव्यापी प्रचंड लहर की आवश्यकता होगी। इसलिए, 2025 में भी इस सीट पर NDA की जीत की संभावनाएँ प्रबल हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *