निर्मली विधानसभा (सीट संख्या 41) बिहार के सुपौल जिले में स्थित है और इसे जनता दल यूनाइटेड (JDU) का एक मज़बूत गढ़ माना जाता है, खासकर तब जब JDU राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा होती है।1 2008 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई और तब से हुए तीनों चुनावों (2010, 2015, 2020) में JDU ने जीत दर्ज की है।2
प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| अनिरुद्ध प्रसाद यादव (विजेता) | JDU (NDA) | 92,439 | 43,922 वोट |
| यदुवंश कुमार यादव | RJD (महागठबंधन) | 48,517 | – |
(टिप्पणी: 2020 में JDU ने RJD को रिकॉर्ड 43 हज़ार से अधिक वोटों के विशाल अंतर से हराया था।)3
अनिरुद्ध प्रसाद यादव / NDA (JDU) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| विशाल जीत का मार्जिन और व्यक्तिगत प्रभुत्व | 2020 में 43,922 वोटों का भारी अंतर यह दर्शाता है कि यह सीट JDU का मज़बूत गढ़ है। विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव इस सीट से 2010 से लगातार तीन बार जीत चुके हैं, जो उनके व्यक्तिगत प्रभाव और यादव समुदाय के एक वर्ग के समर्थन को दिखाता है। |
| यादव वोटों का विभाजन (JDU को लाभ) | निर्मली में यादव मतदाता (लगभग 12.50%) सबसे बड़ा समूह हैं। JDU के यादव उम्मीदवार होने से RJD के परंपरागत M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण में सेंध लगती है। JDU यादव वोटों के एक बड़े हिस्से के साथ-साथ EBC, महादलित और सवर्ण वोटों को एकजुट करने में सफल रहती है। |
| लोकसभा चुनाव का रुझान | 2024 के लोकसभा चुनाव में JDU ने निर्मली विधानसभा खंड में RJD पर 47,132 वोटों की बड़ी बढ़त दर्ज की, जो यह संकेत देता है कि NDA गठबंधन (JDU+BJP) का सामूहिक वोट बैंक क्षेत्र में बहुत मज़बूत है। |
| गठबंधन की ताकत (NDA) | JDU के आधार वोट (कुर्मी, अति पिछड़ा, महादलित) के साथ भाजपा (BJP) का सवर्ण और वैश्य वोट बैंक जुड़ जाता है, जिससे NDA को एक अपराजेय बढ़त मिलती है। |
| ग्रामीण मतदाता और सरकारी योजनाएं | निर्मली एक ग्रामीण क्षेत्र है (सिर्फ 4.62% शहरी मतदाता)। नीतीश कुमार की ‘हर घर नल का जल’, ‘पक्की गली-नाली’ और ‘जीविका’ जैसी योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में सीधा प्रभाव देखने को मिलता है, जिसका लाभ JDU को मिलता है। |
महागठबंधन (RJD) की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य और विश्लेषण
| प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) | विवरण |
| JDU उम्मीदवार का दबदबा | RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती JDU के अनिरुद्ध प्रसाद यादव का व्यक्तिगत और जातीय प्रभाव है, जिन्हें हराने में RJD 2010 से लगातार विफल रही है, यहाँ तक कि 2020 में भी उसके अपने यादव उम्मीदवार को करारी शिकस्त मिली। |
| एंटी-इनकंबेंसी वोटों का विभाजन | निर्मली की जनता में बार-बार बाढ़, सिंचाई की कमी, स्वास्थ्य व शिक्षा ढांचे में कमी और विधायक के दर्शन न होने की शिकायतें हैं। हालाँकि, यदि ये नाराज़गी महागठबंधन के पक्ष में एकजुट नहीं होती, या अन्य छोटे दलों में बंट जाती है, तो JDU फिर से जीत सकती है। |
| RJD के ‘M-Y’ बेस में सेंध | JDU के यादव उम्मीदवार के कारण RJD अपने यादव कोर वोट बैंक को पूरी तरह से एकजुट नहीं कर पाती है। इसके अलावा, मुस्लिम वोटों की संख्या (लगभग 8-10% अनुमानित) इतनी नहीं है कि वह यादव वोटों के विभाजन के नुकसान की भरपाई कर सके। |
| निर्दलीय/अन्य दलों की चुनौती | 2020 में RLSP (अब JDU का हिस्सा) के उम्मीदवार ने 19,000 से अधिक वोट हासिल किए थे। 2025 में भी यदि कोई मज़बूत तीसरा या चौथा उम्मीदवार मैदान में उतरता है, तो वह मुख्य रूप से महागठबंधन के विरोधी वोटों में सेंध लगाएगा, जिससे RJD को अधिक नुकसान होगा। |
| स्थानीय विकास के मुद्दे बनाम ब्रांड मोदी/नीतीश | स्थानीय विकास के मुद्दों पर असंतोष होने के बावजूद, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर ब्रांड मोदी और नीतीश कुमार की सामूहिक अपील RJD के स्थानीय विरोध को कमज़ोर कर देती है। |
निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):
निर्मली विधानसभा सीट पर NDA (JDU) की स्थिति बहुत मज़बूत है। अनिरुद्ध प्रसाद यादव का स्थानीय दबदबा, यादव वोटों में विभाजन, और लोकसभा चुनावों में NDA को मिली विशाल बढ़त यह सुनिश्चित करती है कि यह सीट गठबंधन के पास ही रहेगी।
महागठबंधन (RJD) को यह सीट जीतने के लिए एक ऐसे उम्मीदवार को उतारना होगा जो JDU के यादव वोट बैंक में प्रभावी सेंध लगा सके और साथ ही, एंटी-इनकंबेंसी और बाढ़ जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दों को एक आक्रामक चुनाव प्रचार में बदल सके।
संभावित विजेता: अनिरुद्ध प्रसाद यादव (JDU – NDA)
**(पिछले चुनाव में 43 हज़ार वोटों के अंतर और निरंतर जीत की हैट्रिक को देखते हुए JDU की जीत लगभग स्पष्ट है।)
