पारू विधानसभा सीट मुजफ्फरपुर जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो पिछले दो दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। हालांकि, के चुनाव में टिकट बंटवारे के कारण यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिसने यहाँ के चुनावी समीकरण को पूरी तरह से बदल दिया है।
वर्तमान स्थिति: यह सीट अशोक कुमार सिंह (तत्कालीन ) के पास है, जिन्होंने लगातार चार बार (अक्टूबर , , , ) जीत दर्ज की है।
संभावित विजेता: महागठबंधन () उम्मीदवार या निर्दलीय अशोक कुमार सिंह
() उम्मीदवार (शंकर प्रसाद) की जीत के पक्ष में विश्लेषण और तथ्य:
का चुनाव के लिए इस सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा अवसर है, जिसकी मुख्य वजह में हुई फूट है।
- में हुई निर्णायक फूट (सबसे बड़ा फैक्टर):
- ने यह सीट अपने सहयोगी दल रालोमो () को दे दी, जिसके कारण मौजूदा बार के विधायक अशोक कुमार सिंह का टिकट कट गया।
- अशोक कुमार सिंह ने भाजपा के खिलाफ जाकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
- विश्लेषण: अशोक कुमार सिंह के पास एक बड़ा व्यक्तिगत वोट बैंक है। उनके निर्दलीय लड़ने से भाजपा का पारंपरिक सवर्ण वोट (राजपूत/भूमिहार) और वोट (कुर्मी, कोईरी, आदि) बँट जाएगा, जिसका सीधा लाभ को मिलेगा।
- उम्मीदवार की बढ़ी ताकत:
- ने इस बार शंकर प्रसाद को टिकट दिया है, जो में निर्दलीय लड़कर दूसरे स्थान पर रहे थे।
- में शंकर प्रसाद को वोट मिले थे, जबकि के अशोक सिंह को वोट मिले थे। हार का अंतर केवल था।
- विश्लेषण: इस बार शंकर प्रसाद को का () कोर वोट ( में कांग्रेस को मिले वोट भी के खाते में जाने की उम्मीद) मिलेगा, साथ ही के वोट बँटने से वह आसानी से जीत दर्ज कर सकते हैं।
- स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई:
- अशोक सिंह के निर्दलीय उतरने के कारण यह लड़ाई उनके और के बीच केंद्रित हो जाएगी। उम्मीदवार के लिए यह सीट जीतना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि उन्हें के कोर वोट का बड़ा हिस्सा अशोक सिंह को जाते हुए देखना पड़ेगा।
(रालोमो/भाजपा) और निर्दलीय उम्मीदवार (अशोक सिंह) की हार के प्रतिकूल तथ्य:
- (रालोमो) के लिए सबसे प्रतिकूल तथ्य (वोटों का बँटवारा):
- सीटिंग विधायक अशोक कुमार सिंह के निर्दलीय उतरने से को सबसे बड़ा झटका लगेगा। समर्थक वोटर अब (रालोमो) और अशोक सिंह (निर्दलीय) के बीच बँट जाएँगे।
- आंकड़े: में को वोट मिले थे। यदि इसमें से एक बड़ा हिस्सा ( से +) अशोक सिंह को जाता है, तो रालोमो उम्मीदवार दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
- निर्दलीय अशोक कुमार सिंह के लिए प्रतिकूल तथ्य:
- लगातार बार जीतने के बावजूद, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतना आसान नहीं होता। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे बड़े नेताओं के गठबंधन सहयोग का समर्थन नहीं मिलेगा।
- उनकी जीत उनके व्यक्तिगत जनाधार और से नाराज वोटों पर निर्भर करेगी। यदि किसी तरह अपने कोर वोट बैंक को उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट करने में सफल रहा, तो अशोक सिंह का मुकाबला कठिन हो जाएगा।
निष्कर्ष और अंतिम पूर्वानुमान:
पारू सीट पर का चुनाव की अंदरूनी कलह का सीधा परिणाम होगा।
- यदि का सवर्ण/समर्थक वोट बैंक (गठबंधन) उम्मीदवार और अशोक सिंह (निर्दलीय) के बीच विभाजित होता है, तो उम्मीदवार शंकर प्रसाद की जीत लगभग तय है।
- यदि अशोक सिंह अपने बार के कार्यकाल के व्यक्तिगत जनाधार को पूरी तरह से भुनाने में सफल होते हैं और के कोर वोट को अपने पक्ष में मोड़ लेते हैं, तो वह फिर से जीत सकते हैं, लेकिन इस स्थिति में भी कड़ी टक्कर देगी।
चूंकि का कोर वोट बँटने जा रहा है और एक मजबूत उम्मीदवार के साथ अपने समीकरण पर टिकी है, इसलिए महागठबंधन () के उम्मीदवार के जीतने की सबसे अधिक संभावना है।
