पूर्वी चंपारण जिले की पिपरा विधानसभा सीट (Pipra Assembly Seat) पर 2025 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी (BJP) और महागठबंधन के बीच एक कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 2020 में यह सीट बीजेपी ने सीपीआईएम (महागठबंधन का हिस्सा) को हराकर जीती थी।1
प्रमुख संभावित उम्मीदवार (2025 के विश्लेषण के आधार पर):
- NDA (BJP): श्यामबाबू प्रसाद यादव (वर्तमान विधायक, 2020 के विजेता)2
- महागठबंधन (CPM/RJD): राजमंगल प्रसाद (2020 के उपविजेता, CPM) या महागठबंधन से कोई अन्य मजबूत चेहरा।
NDA उम्मीदवार श्यामबाबू प्रसाद यादव (BJP) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण
| अनुकूल तथ्य/विश्लेषण | विवरण |
| वर्तमान विधायक और मजबूत जीत | श्यामबाबू प्रसाद यादव ने 2020 में CPM के राजमंगल प्रसाद को 8,177 वोटों के अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर 4.20% था, जो पिछले कुछ चुनावों की तुलना में अच्छा मार्जिन है। |
| प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रवाद का प्रभाव | NDA को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का लाभ मिलता है। यह लहर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं को प्रभावित करती है, खासकर युवा वोटरों को। |
| उच्च और मध्यम वर्ग का समर्थन | पिपरा का क्षेत्र पारंपरिक रूप से BJP के कोर वोट बैंक (उच्च जाति, व्यापारिक वर्ग और कुछ अतिपिछड़ा वर्ग) के समर्थन वाला रहा है। 2020 में तीसरी पार्टी (निर्दलीय/अन्य) को मिले वोट BJP के पक्ष में मजबूत ध्रुवीकरण कर सकते हैं। |
| ग्रामीण विकास पर फोकस | यह सीट 90% से अधिक ग्रामीण है, जहाँ खेती, सड़क, जमीन और बिजली प्रमुख मुद्दे हैं। NDA सरकार की केंद्रीय और राज्य योजनाओं (जैसे सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति) का लाभ बीजेपी प्रत्याशी को मिल सकता है। |
महागठबंधन उम्मीदवार (CPM/RJD) के लिए संभावित प्रतिकूल तथ्य और आँकड़े
| प्रतिकूल तथ्य/आँकड़े | विवरण |
| करीबी हार और जीत का बढ़ता अंतर | 2020 में महागठबंधन के प्रत्याशी (CPM) ने कड़ा मुकाबला किया, लेकिन 8177 वोटों से हार गए। इस अंतर को पाटने के लिए उन्हें अपने पारंपरिक वोटों के अलावा नए वर्गों के वोटों को आकर्षित करना होगा। |
| M-Y समीकरण का बिखराव | अगर पिपरा में वाम दल (CPM) चुनाव लड़ता है, तो RJD का कोर यादव-मुस्लिम (M-Y) वोट बैंक विभाजित हो सकता है या वाम दलों के प्रत्याशी को पूरा ट्रांसफर नहीं हो सकता है, जबकि बीजेपी का वोट बैंक अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। |
| स्थानीय बनाम राष्ट्रीय मुद्दे | महागठबंधन अक्सर स्थानीय मुद्दों, बेरोजगारी और सरकार विरोधी लहर पर निर्भर करता है। यदि केंद्र और राज्य में NDA सरकार के खिलाफ मजबूत लहर नहीं बनती है, तो यह महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती होगी। |
| निर्दलीय/अन्य उम्मीदवारों की भूमिका | 2020 में निर्दलीय उम्मीदवार अवधेश प्रसाद कुशवाहा को भी अच्छा वोट मिला था। यदि इस बार भी किसी प्रभावशाली निर्दलीय उम्मीदवार ने यादव/अतिपिछड़ा वोट काटा, तो इसका सीधा लाभ NDA को मिल सकता है। |
निष्कर्ष (अनिश्चितता के कारण):
पिपरा (पूर्वी चंपारण) सीट पर NDA (BJP) की स्थिति मजबूत दिखती है, खासकर 2020 की जीत के मार्जिन को देखते हुए और लोकसभा चुनावों में NDA को मिलने वाली बढ़त के कारण।
- NDA की जीत की संभावना अधिक है, यदि वे अपने मौजूदा विधायक पर भरोसा करते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लाभ को भुना पाते हैं।
- महागठबंधन तभी जीत पाएगा, जब वह 2020 के वाम दल के वोट आधार में RJD के M-Y समीकरण को मजबूती से जोड़ पाएगा, और ग्रामीण गरीबों/किसानों के बीच स्थानीय मुद्दों पर मजबूत लहर पैदा कर पाएगा।
फिलहाल, वर्तमान विधायक श्यामबाबू प्रसाद यादव (BJP) की दावेदारी सबसे मजबूत है, लेकिन कड़ा संघर्ष निश्चित है।
