समस्तीपुर/पटना, 24 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने प्रचार अभियान की कमान अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दी है।2 प्रधानमंत्री मोदी आज, 24 अक्टूबर को, समस्तीपुर की धरती से बीजेपी और एनडीए के लिए चुनावी बिगुल फूंकेंगे।3 यह रैली न केवल इस चरण के लिए एनडीए के प्रचार की औपचारिक शुरुआत है, बल्कि यह ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर की विरासत को अपने पाले में लाने की बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का भी हिस्सा है।
प्रधानमंत्री आज समस्तीपुर में अपनी पहली विशाल जनसभा को संबोधित करने से पहले, सीधे जननायक कर्पूरी ठाकुर के पैतृक गांव कर्पूरीग्राम जाएंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस प्रतीकात्मक शुरुआत के बाद वे समस्तीपुर के दुधपुरा हवाई अड्डा मैदान और उसके बाद बेगूसराय में दूसरी जनसभा को संबोधित करेंगे।
1. समस्तीपुर से ही क्यों? कर्पूरीग्राम के दौरे का राजनीतिक अर्थ
पीएम मोदी के बिहार अभियान की शुरुआत के लिए समस्तीपुर का चयन महज संयोग नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक दाँव है, जिसका सीधा निशाना बिहार के अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोट बैंक पर है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत पर फोकस:
- अति-पिछड़ों को साधने का प्रयास: कर्पूरी ठाकुर को बिहार में सामाजिक न्याय और अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। बिहार की आबादी में EBC की हिस्सेदारी लगभग 36 प्रतिशत है, जो किसी भी चुनावी नतीजे को पलटने की क्षमता रखती है। पीएम मोदी का कर्पूरी ग्राम का दौरा और उन्हें नमन करना, इस विशाल वर्ग को सीधा संदेश देता है कि एनडीए ही कर्पूरी ठाकुर के सपनों और सिद्धांतों का असली वाहक है।
- भारत रत्न का असर: इसी वर्ष केंद्र की मोदी सरकार ने कर्पूरी ठाकुर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से मरणोपरांत सम्मानित किया था। समस्तीपुर से चुनावी अभियान की शुरुआत करके पीएम मोदी इस सम्मान को अति-पिछड़ा वर्ग के सामने भुनाने की कोशिश करेंगे, यह दावा करते हुए कि जिस जननायक को दशकों तक राजनीतिक दलों ने अनदेखा किया, उन्हें सच्चा सम्मान बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दिया।
- विकास बनाम जाति: पीएम मोदी की इस रैली का मुख्य संदेश ‘विकास, विरासत और नेतृत्व’ को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत करना होगा। वे कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों को याद करते हुए बताएंगे कि किस तरह डबल इंजन की सरकार (केंद्र और राज्य में एनडीए सरकार) ने बिहार में विकास के गड्ढों को भरा है, जो पिछले ‘लठबंधन’ (विपक्ष) के शासनकाल में बने थे।
मिथिलांचल की 30 सीटों पर निशाना:
समस्तीपुर मिथिलांचल क्षेत्र का केंद्र है, जो लगभग 30 विधानसभा सीटों को प्रभावित करता है (समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी के आसपास)।5 इस क्षेत्र में एनडीए की पकड़ को और मजबूत करने के लिए पीएम मोदी की रैली एक बड़ी संजीवनी साबित होगी। स्थानीय नेताओं के अनुसार, पीएम मोदी इस रैली के माध्यम से पूरे मिथिलांचल में एनडीए के पक्ष में एक मजबूत लहर बनाने की कोशिश करेंगे।
2. पीएम मोदी का चुनावी एजेंडा: विकास, गारंटी और विपक्ष पर सीधा हमला
प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों का मुख्य एजेंडा स्पष्ट है: केन्द्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का हिसाब देना और विपक्षी ‘महागठबंधन’ पर सीधा हमला करना।
मुख्य चुनावी मुद्दे (NDA की ओर से):
- डबल इंजन का विकास: पीएम मोदी अपनी रैली में सबसे ज्यादा जोर पिछले 10 वर्षों में केंद्र और पिछले 20 वर्षों में (कुछ समय को छोड़कर) राज्य में एनडीए सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों पर देंगे। वे दरभंगा एयरपोर्ट, गंगा पर बने पुलों, सड़कों के विस्तार, और गरीब कल्याण योजनाओं (जैसे मुफ्त राशन, पक्का मकान, शौचालय, आयुष्मान भारत) की उपलब्धियां गिनाएंगे।
- युवाओं को ‘गारंटी’: महागठबंधन, खासकर तेजस्वी यादव, ने ‘नौकरी’ को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है। इसके जवाब में पीएम मोदी युवाओं के लिए अपनी सरकार की ‘गारंटी’ पेश करेंगे, जिसमें स्टार्टअप्स, मुद्रा लोन, कौशल विकास, और बिहार में निवेश आकर्षित करने की योजनाओं को शामिल किया जाएगा। वे तेजस्वी के नौकरी के वादों को ‘अव्यवहारिक’ और ‘खर्चीला’ बताकर खारिज करेंगे, जैसा कि बीजेपी के अन्य नेताओं ने पहले ही करना शुरू कर दिया है।
- ‘जंगलराज’ पर वार: पीएम मोदी अपने भाषणों में विपक्ष, खासकर आरजेडी को, उनके पुराने शासनकाल के दौरान ‘जंगलराज’, ‘भ्रष्टाचार’ और ‘अपराध’ के मुद्दों पर घेरेंगे। यह एनडीए की पुरानी और सफल रणनीति रही है कि वह सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर महागठबंधन पर दबाव बनाए रखे।
- ‘परिवारवाद’ बनाम ‘विकासवाद’: वे विपक्ष पर ‘परिवारवाद’ का आरोप लगाते हुए एनडीए को ‘विकासवाद’ की राजनीति करने वाली पार्टी के रूप में पेश करेंगे।
3. चुनावी शेड्यूल: ताबड़तोड़ रैलियों का मेगा प्लान
प्रधानमंत्री मोदी का 24 अक्टूबर से शुरू होने वाला बिहार दौरा सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे चुनाव के लिए एक मेगा कैंपेन प्लान का हिस्सा है। बीजेपी ने प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों की एक लंबी श्रृंखला तैयार की है:7
| चरण | तारीख | प्रस्तावित रैलियां (स्थान) | रणनीतिक महत्त्व |
| पहला चरण (शुभारंभ) | 24 अक्टूबर | समस्तीपुर (कर्पूरीग्राम से आगाज) और बेगूसराय | मिथिलांचल और भूमिहार/ओबीसी बहुल सीटों को साधना। |
| दूसरा चरण | 30 अक्टूबर | मुजफ्फरपुर और छपरा | उत्तर बिहार और सारण क्षेत्र को कवर करना। |
| अगले चरण | 2, 3, 6, 7 नवंबर | (स्थानों की अंतिम घोषणा बाकी) | शेष प्रमुख क्षेत्रों जैसे मगध, सीमांचल और कोसी को कवर करना। |
बीजेपी का लक्ष्य इन रैलियों के माध्यम से कम से कम एक दर्जन से अधिक जिलों और 100 से अधिक विधानसभा सीटों को सीधे प्रभावित करना है।
4. एनडीए में जोश और महागठबंधन पर दबाव
प्रधानमंत्री मोदी के अभियान की शुरुआत से एनडीए गठबंधन में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।8
- एनडीए की एकजुटता: सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिए जाने के ठीक बाद पीएम मोदी का आना, एनडीए की ‘चट्टानी एकता’ को दर्शाता है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और जेडीयू के नेता लगातार कह रहे हैं कि पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाएगा। केंद्रीय मंत्री और कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर ने पीएम मोदी के आने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके गांव के लिए “सबसे गौरवशाली पल” है।
- महागठबंधन की चुनौती: पीएम मोदी के अभियान का आगाज ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी महागठबंधन में अभी भी सीटों के तालमेल को लेकर गतिरोध बना हुआ है। महागठबंधन के नेता आपसी खींचतान में उलझे हैं, जबकि एनडीए प्रचार के मैदान में उतर चुका है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लगातार ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ और ‘रोजगार’ के मुद्दों पर एनडीए को घेर रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी की उपस्थिति इन स्थानीय मुद्दों पर राष्ट्रीय और भावनात्मक मुद्दों को हावी कर सकती है।
5. सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां
प्रधानमंत्री की रैली को लेकर समस्तीपुर जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट पर हैं।
- कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: पीएम की सुरक्षा के लिए एसपीजी (SPG) ने दुधपुरा मैदान और कर्पूरीग्राम में मोर्चा संभाल लिया है। जिला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। दुधपुरा हवाई अड्डा मैदान में हजारों की भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिसके लिए विशेष सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।
- तैयारियां अंतिम चरण में: रैली स्थल पर विशाल पंडाल, मंच और मीडिया दीर्घा तैयार कर ली गई है। बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता इस रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए जी-जान से जुटे हैं, ताकि यह साबित हो सके कि बिहार की जनता का अटूट विश्वास नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के डबल इंजन पर ही है।
निष्कर्ष
24 अक्टूबर को समस्तीपुर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान की शुरुआत बिहार की चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न, अति-पिछड़ा वर्ग को साधने का प्रतीकात्मक कदम, और ताबड़तोड़ रैलियों का मेगा प्लान— ये सब मिलकर यह दर्शाते हैं कि एनडीए ने 2025 के चुनाव को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।9 यह अभियान न केवल एनडीए उम्मीदवारों को नई ऊर्जा देगा, बल्कि महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश करेगा कि वह पीएम मोदी के ‘विकासवाद’ और ‘विरासत’ के दांव का मुकाबला किस तरह करती है। चुनावी रण अब पूरी तरह से राष्ट्रीय नेतृत्व के हाथों में आ चुका है।
