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पीरपैंती (सुरक्षित) सीट 2025: क्या NDA का ‘मोदी फैक्टर’ RJD के MY समीकरण पर भारी पड़ेगा? जानिए संपूर्ण चुनावी गणित

पीरपैंती (अनुसूचित जाति सुरक्षित) विधानसभा सीट: एक विश्लेषणात्मक संभावना (2025)

पीरपैंती सीट पर मुकाबला हमेशा करीबी रहा है, जहाँ 2015 में RJD जीती थी, वहीं 2020 में BJP ने 27,019 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की।1 2025 के चुनाव में वर्तमान रुझानों और गठबंधनों के आधार पर, NDA गठबंधन के उम्मीदवार की जीत की अधिक संभावना है।

संभावित विजेता उम्मीदवार (NDA/BJP के ललन कुमार):

ललन कुमार (BJP), जो वर्तमान में विधायक हैं, उनके फिर से चुनाव जीतने की अधिक संभावना है।

जीत के पक्ष में मजबूत विश्लेषण और तथ्य
1. NDA का संयुक्त वोट बैंक: ललन कुमार को NDA (BJP+JDU+अन्य) का पूरा समर्थन प्राप्त होगा। NDA का वोट बैंक (सवर्ण, वैश्य, और अति पिछड़ा वर्ग का एक बड़ा हिस्सा) पीरपैंती जैसे ग्रामीण-बहुलता वाले क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखता है।
2. 2020 की बड़ी जीत का मनोबल: 2020 के विधानसभा चुनाव में ललन कुमार ने RJD के रामविलास पासवान को 27,019 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। यह जीत का अंतर पिछली हार (2015) और करीबी मुकाबलों के इतिहास को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
3. 2024 लोकसभा चुनाव का रुझान: 2024 के लोकसभा चुनाव में, भले ही भागलपुर सीट JDU ने जीती थी, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में दोनों गठबंधनों के बीच कड़ी टक्कर रही थी। यदि BJP अपने मुख्य वोट आधार (जिसमें वैश्य, कुर्मी-कोइरी का एक हिस्सा और सवर्ण शामिल हैं) को एकजुट रखने में सफल रहती है, तो RJD को चुनौती देना मुश्किल होगा।
4. राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व का प्रभाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और विकास कार्यों का सीधा लाभ NDA उम्मीदवार को मिलेगा। चूंकि यह सीट भाजपा के कोटे में है, इसलिए ‘मोदी फैक्टर’ और राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों का प्रभाव दलित और अन्य पिछड़े समुदायों के एक हिस्से पर पड़ सकता है।

अन्य उम्मीदवार (RJD) के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी:

मुख्य प्रतिद्वंद्वी RJD उम्मीदवार (संभावित रामविलास पासवान या कोई नया चेहरा) के लिए जीत हासिल करना एक कड़ी चुनौती होगी।

RJD उम्मीदवार के लिए प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी
1. 2020 में बड़ा हार का अंतर: RJD के लिए सबसे बड़ी चुनौती 2020 के चुनाव में 27,019 वोटों से मिली हार को पाटना है। इतना बड़ा अंतर केवल अपने कोर मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक से भरना मुश्किल होगा।
2. MY समीकरण के साथ अतिरिक्त वोट की आवश्यकता: पीरपैंती में मुस्लिम, अनुसूचित जाति (आरक्षित सीट होने के कारण), अनुसूचित जनजाति, वैश्य, कुर्मी-कोइरी और धानुक वोटरों की अच्छी तादाद है। RJD को जीत के लिए अपने MY आधार (जो लगभग 11.7% मुस्लिम और यादव का बड़ा हिस्सा है) के अलावा SC/ST और अति पिछड़े वर्गों से महत्वपूर्ण सेंधमारी की आवश्यकता होगी, जिसमें वह 2020 में सफल नहीं हो पाए थे।
3. अनुसूचित जाति में विभाजन: चूंकि यह सीट SC के लिए आरक्षित है, इसलिए दोनों प्रमुख दलों (BJP और RJD) से SC समुदाय के ही उम्मीदवार होंगे। SC वोट बैंक किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट होने के बजाय दोनों गठबंधनों के बीच बँट जाता है, जिससे केवल MY आधार पर RJD की जीत अनिश्चित हो जाती है।
4. स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ का अभाव: यदि RJD उम्मीदवार स्थानीय विकास या विधायक के खिलाफ कोई बड़ा प्रभावी मुद्दा नहीं उठा पाते हैं, तो मतदाता गठबंधन की व्यापक राजनीतिक लहर के साथ जा सकते हैं।

निष्कर्ष:

पीरपैंती (सुरक्षित) सीट पर एक बार फिर BJP और RJD के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। हालाँकि, NDA गठबंधन की संयुक्त शक्ति, 2020 का बड़ा जीत का अंतर और राष्ट्रीय नेतृत्व (मोदी) के प्रभाव को देखते हुए, BJP के ललन कुमार को बढ़त मिल सकती है। RJD की जीत पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वे अपने मुस्लिम-यादव आधार को SC और EBC समुदायों के एक बड़े हिस्से के साथ जोड़कर 2020 की हार के बड़े अंतर को पाट पाते हैं या नहीं।

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