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पूर्णिया सदर का ‘वैश्य गढ़’: क्या भाजपा लगाएगी छठी जीत की हैट्रिक या पप्पू यादव तोड़ेंगे 25 साल का तिलिस्म?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूर्णिया सदर विधानसभा सीट एक दिलचस्प मुकाबला प्रस्तुत करती है। यह सीट पिछले 25 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गढ़ रही है, और वर्तमान में विजय कुमार खेमका (BJP) यहाँ के विधायक हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक आँकड़ों और वर्तमान राजनीतिक विश्लेषण के आधार पर, विजय कुमार खेमका (BJP/NDA) की जीत की संभावनाएँ अत्यधिक प्रबल हैं।


विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA – विजय कुमार खेमका)

संभावित विजेता: विजय कुमार खेमका (BJP)

1. भाजपा का अभेद्य किला और वैश्य समुदाय का एकमुश्त समर्थन:

2. बड़े अंतर से जीत का इतिहास:

3. ‘मोदी-नीतीश’ फैक्टर और कैडर वोट का स्थायित्व:

4. 2024 लोकसभा चुनाव के बावजूद दबदबा:


अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – कांग्रेस/RJD)

संभावित उपविजेता: महागठबंधन का उम्मीदवार (संभवतः कांग्रेस)

1. MY समीकरण का सीमित प्रभाव:

2. पप्पू यादव का सीधा असर नगण्य:

3. कमजोर और परिवर्तनशील उम्मीदवार:

4. जातीय समीकरण को तोड़ने में असमर्थता:


निष्कर्ष

पूर्णिया सदर विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (NDA) के लिए एक सुरक्षित सीट बनी हुई है। विधायक विजय कुमार खेमका की व्यक्तिगत छवि, वैश्य समुदाय का एकमुश्त और अटूट समर्थन, और भाजपा के मजबूत संगठनात्मक आधार के कारण 2025 के चुनाव में उनकी जीत की संभावनाएँ सबसे अधिक हैं। महागठबंधन को यह सीट जीतने के लिए एक चमत्कारी उम्मीदवार की आवश्यकता होगी जो भाजपा के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सके, जिसकी संभावना कम है।

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