कटिहार जिले की प्राणपुर विधानसभा सीट बिहार चुनाव 2025 में सबसे कांटे की टक्कर वाली सीटों में से एक होगी। यह सीट पिछले चुनावों में बेहद कम अंतर से जीती गई है, जो इसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला बनाता है। वर्तमान में यह सीट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की निशा सिंह (BJP) के पास है।
गहन विश्लेषण के आधार पर, यह सीट BJP की निशा सिंह के पक्ष में जा सकती है, लेकिन यह मुकाबला पिछली बार की तरह बेहद करीबी रहने की प्रबल संभावना है।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA – निशा सिंह, BJP)
संभावित विजेता: निशा सिंह (BJP)
1. मजबूत पारिवारिक/व्यक्तिगत आधार और सहानुभूति लहर:
- राजनीतिक विरासत: निशा सिंह पूर्व मंत्री और तीन बार के विधायक रहे विनोद कुमार सिंह की पत्नी हैं, जिनका निधन 2020 के चुनाव से ठीक पहले हुआ था। 2020 में उन्हें सहानुभूति लहर का बड़ा फायदा मिला, जिससे उन्होंने कांग्रेस के तौकीर आलम को हराया।
- पारंपरिक वोट बैंक पर पकड़: दिवंगत विनोद सिंह की व्यक्तिगत पकड़ और बीजेपी का मजबूत उच्च जाति (राजपूत) और ओबीसी/EBC का कोर वोट बैंक इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
- सीमित मुस्लिम समर्थन: बीजेपी को इस मुस्लिम बहुल सीट पर भी एक वर्ग का समर्थन मिलता रहा है, जो उनकी जीत के लिए महत्वपूर्ण है।
2. महागठबंधन के मुस्लिम वोट का बिखराव:
- कोर समस्या: प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता लगभग 47% हैं, जो जीत के लिए निर्णायक हैं। 2020 में भी, महागठबंधन (कांग्रेस के तौकीर आलम) के अलावा, AIMIM और निर्दलीय इशरत परवीन भी मैदान में थीं।
- फायदा NDA को: मुस्लिम मतों के इस बिखराव का सीधा फायदा BJP को मिलता है। 2020 में, निशा सिंह ने मात्र 2,972 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, क्योंकि विपक्ष का वोट तौकीर आलम (कांग्रेस) और इशरत परवीन (निर्दलीय/NCP) के बीच बँट गया था। यदि 2025 में भी मुस्लिम समुदाय के कई उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो यह NDA की राह को आसान बना देगा।
3. संगठन की शक्ति:
- BJP अपने मजबूत बूथ-स्तरीय संगठन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय लोकप्रियता का लाभ उठाने में सफल रही है, जो कांटे की टक्कर में जीत का अंतर पैदा करता है।
अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – तौकीर आलम/INC)
संभावित उपविजेता/मुख्य चुनौती: तौकीर आलम (कांग्रेस/महागठबंधन)
1. लोकसभा 2024 का रुझान महागठबंधन के पक्ष में:
- विधानसभा खंड में बढ़त: 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार तारिक अनवर ने NDA उम्मीदवार (JDU के दुलाल चंद्र गोस्वामी) पर प्राणपुर विधानसभा खंड में 11,383 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की थी। यह आंकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि यदि मुस्लिम और यादव वोट एकजुट होते हैं, तो महागठबंधन की जीत निश्चित है।
- हार का सबसे बड़ा कारण: 2020 में कांग्रेस के तौकीर आलम की हार का सबसे बड़ा कारण निर्दलीय इशरत परवीन का 19,746 वोट हासिल करना था, जिसने महागठबंधन के पक्ष में पड़ने वाले वोटों को काट दिया।
2. वोटों के ध्रुवीकरण की चुनौती:
- सीट की प्रकृति: प्राणपुर एक मुस्लिम बहुल सीट है (लगभग 47% मतदाता), लेकिन यहाँ से अब तक केवल एक बार (1980 में) ही कोई मुस्लिम विधायक बना है। BJP की लगातार जीत यह दर्शाती है कि यहाँ हिंदू वोट (उच्च जाति, ओबीसी, EBC) NDA के पक्ष में एकजुट होते हैं, जिससे वोटों का ध्रुवीकरण हो जाता है।
- महागठबंधन की जिम्मेदारी: महागठबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस के तौकीर आलम के पक्ष में एकजुट हों और कोई तीसरा/चौथा मुस्लिम उम्मीदवार उनके वोट बैंक में सेंध न लगा पाए।
3. स्थानीय मुद्दे और पलायन:
- स्थानीय समस्याएँ: बाढ़, कटाव और बड़े पैमाने पर पलायन इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे हैं। महागठबंधन इन मुद्दों को उठाकर सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का लाभ उठा सकता है, लेकिन अगर वे उम्मीदवार के चयन में गलती करते हैं या वोट बिखरते हैं, तो ये मुद्दे भी उन्हें जीत नहीं दिला पाएंगे।
निष्कर्ष
प्राणपुर सीट पर निशा सिंह (BJP) की संभावित जीत मुख्य रूप से महागठबंधन के मुस्लिम वोटों के बिखराव और NDA के पारंपरिक वोट बैंक की मजबूत एकजुटता पर निर्भर करती है। यदि महागठबंधन (कांग्रेस के तौकीर आलम या अन्य उम्मीदवार) पिछली बार की गलतियों से सीखते हुए मुस्लिम और यादव वोटों को एकजुट करने में सफल हो जाता है और निर्दलीय/AIMIM वोटों को रोकता है, तो यह सीट NDA के हाथ से निकल सकती है। अन्यथा, BJP एक बार फिर कांटे की टक्कर में यह सीट जीत सकती है।
