बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूर्णिया जिले की बनमनखी (Banmankhi) (SC) सुरक्षित सीट पर मुकाबला एक बार फिर NDA (BJP) और महागठबंधन (RJD) के बीच कड़ा होने की संभावना है।
पिछले डेढ़ दशक से इस सीट पर NDA (BJP) का कब्जा रहा है, और मौजूदा समीकरणों को देखते हुए NDA (BJP) उम्मीदवार के जीतने की संभावना अधिक है।
विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (NDA – BJP)
संभावित विजेता: कृष्ण कुमार ऋषि (BJP) या NDA का कोई अन्य मजबूत उम्मीदवार
1. बीजेपी का अभेद्य गढ़ और ऐतिहासिक प्रभुत्व:
- लगातार जीत की परंपरा: बनमनखी विधानसभा सीट को 2000 से BJP का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2005 से वर्तमान विधायक कृष्ण कुमार ऋषि लगातार चार बार (2005, 2010, 2015, 2020) जीत चुके हैं। यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता, संगठन पर पकड़ और पार्टी के कोर वोट बैंक पर मजबूत नियंत्रण को दर्शाता है।
- 2020 की बड़ी जीत: 2020 के चुनाव में, कृष्ण कुमार ऋषि (BJP) ने RJD के उपेंद्र शर्मा को 27,743 वोटों के बड़े अंतर से हराया था, जो 15.80% का महत्वपूर्ण मार्जिन था। यह एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को प्रभावी ढंग से बेअसर करने की उनकी क्षमता को दिखाता है।
2. मजबूत सामाजिक समीकरण (सवर्ण + SC/ST + BC):
- यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। बीजेपी को सवर्ण जातियों (जैसे ब्राह्मण, राजपूत, जो पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में अच्छी संख्या में हैं) का पारंपरिक और मजबूत समर्थन प्राप्त है, जो उनके आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को भी मजबूती प्रदान करता है।
- केंद्र और राज्य सरकार का प्रदर्शन: NDA, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर, एससी/एसटी, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं के बीच अपनी कल्याणकारी योजनाओं और छवि के कारण मजबूत पकड़ बनाए रखता है।
3. व्यक्तिगत छवि और राजनीतिक अनुभव:
- मंत्री पद का अनुभव: कृष्ण कुमार ऋषि का मंत्री (कला, संस्कृति एवं युवा विभाग और पर्यटन विभाग) के रूप में काम करने का अनुभव उन्हें क्षेत्र में एक बड़ा कद देता है, जिसका लाभ उन्हें चुनाव में मिलेगा। उन्होंने अपनी सीट पर व्यक्तिगत पकड़ बनाए रखी है, जिससे पार्टी की लहर के बिना भी वह 2015 का कड़ा मुकाबला जीत पाए थे।
अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (महागठबंधन – RJD)
संभावित उपविजेता: RJD उम्मीदवार (जैसे उपेंद्र शर्मा)
1. RJD के कोर MY समीकरण की सीमाएं:
- यादव मतदाता: बनमनखी में यादव मतदाता सर्वाधिक संख्या में हैं, जिससे RJD को मजबूत आधार मिलता है।
- SC वोट में सेंध: यह सीट SC के लिए आरक्षित है। RJD का पारंपरिक कोर MY समीकरण (मुस्लिम-यादव) इस आरक्षित सीट पर केवल 50% से अधिक वोट सुनिश्चित नहीं कर पाता। RJD को जीतने के लिए एससी/एसटी (रिषिदेव आदि) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटों में बड़ी सेंध लगाने की जरूरत है, जो भाजपा के मजबूत गढ़ और प्रधानमंत्री मोदी की अपील के चलते मुश्किल हो जाता है।
2. 2020 का बड़ा अंतर (27,743 वोट):
- 2020 में RJD उम्मीदवार को BJP के सामने एक बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। यह अंतर दर्शाता है कि महागठबंधन को इस सीट पर NDA को हराने के लिए अपने प्रदर्शन में नाटकीय सुधार करने की आवश्यकता है।
3. स्थानीय बनाम राष्ट्रीय/क्षेत्रीय चेहरा:
- महागठबंधन के उम्मीदवार को जहां तेजस्वी यादव की युवा अपील और बेरोजगारी के मुद्दे का लाभ मिलेगा, वहीं उन्हें कृष्ण कुमार ऋषि जैसे चार बार के स्थानीय दिग्गज और प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय अपील की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। बनमनखी जैसे भाजपा के गढ़ में, राष्ट्रीय और व्यक्तिगत प्रभाव को तोड़ना बहुत मुश्किल है।
4. अन्य ‘वोटकटवा’ की भूमिका:
- 2020 में, निर्दलीय और छोटी पार्टियों को भी कई हजार वोट मिले थे (जैसे श्याम देव पासवान को 3,845 और संजीव कुमार पासवान को 3,600)। यदि ये वोट महागठबंधन के पक्ष में चले भी जाते, तो भी 2020 का अंतर पाटना मुश्किल था। 2025 में भी छोटे दलों/निर्दलियों की मौजूदगी से वोटों का थोड़ा-बहुत बँटवारा होगा, जिसका सीधा फायदा स्थापित उम्मीदवार (BJP) को मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष
बनमनखी विधानसभा सीट पर NDA (BJP) का पलड़ा भारी है। कृष्ण कुमार ऋषि या BJP का कोई अन्य उम्मीदवार अपनी चार बार की जीत की परंपरा, मजबूत संगठनात्मक आधार और कोर SC, EBC और सवर्ण वोटों के प्रभावी ध्रुवीकरण के कारण यह सीट जीत सकते हैं। RJD के लिए यह सीट जीतना तब तक लगभग असंभव होगा जब तक कि वह एससी वोटों के एक बड़े हिस्से और गैर-यादव ओबीसी वोटों में महत्वपूर्ण सेंध न लगा पाए।
