Site icon winapoll.com

बरहरिया का ‘बाहुबली’ बनाम ‘बच्चा’ संग्राम: 2025 में ‘M-Y’ समीकरण या पूर्व विधायक का वर्चस्व?

बरहरिया विधानसभा सीट सीवान जिले की एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सीट है। यह सीट एक कांटेदार मुकाबले के लिए जानी जाती है, जहाँ जीत का अंतर हमेशा बहुत कम रहा है। 2020 में, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दिग्गज नेता को बहुत कम अंतर से हराकर यह सीट जीती थी।1

जीत की संभावना (पूर्वानुमान)

वर्तमान राजनीतिक माहौल और 2020 के परिणामों की नजदीकी को देखते हुए, बच्चा पाण्डेय (RJD / महागठबंधन) के लिए अपनी सीट बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन महागठबंधन के मजबूत कोर वोट बैंक के कारण उनके जीतने की संभावना थोड़ी अधिक (Slightly Higher) है। यह सीट पूरी तरह से कांटे के मुकाबले में है।


विजेता उम्मीदवार के जीतने के मुख्य कारण और विश्लेषण (बच्चा पाण्डेय – RJD / महागठबंधन)

तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
मजबूत ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) कोर वोट बैंक बरहरिया सीट पर मुस्लिम मतदाता (लगभग 24.7%) और यादव मतदाताओं का निर्णायक प्रभाव है। यह दोनों वर्ग RJD का सबसे मजबूत कोर वोट बैंक हैं। RJD उम्मीदवार को इन दोनों समुदायों का लगभग 80-90% एकमुश्त समर्थन मिलने की प्रबल संभावना है, जो उन्हें शुरुआती बढ़त दिलाता है।
पिछली जीत का मनोबल 2020 में, बच्चा पाण्डेय ने JDU के तत्कालीन विधायक श्याम बहादुर सिंह को 3,559 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया था। यह जीत महागठबंधन के कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखेगी और उन्हें अपनी जीत दोहराने के लिए प्रेरित करेगी।
सत्ता विरोधी लहर का लाभ भले ही RJD 2020 में विपक्ष में था, लेकिन 2025 में NDA (BJP-JDU) के खिलाफ अगर कोई राज्यव्यापी ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-Incumbency) होती है, तो उसका सीधा फायदा RJD उम्मीदवार को मिलेगा।
RJD का स्थानीय समीकरण RJD ने बरहरिया सीट से अरुण गुप्ता को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है (जैसा कि कुछ सूची में है, हालाँकि 2020 में बच्चा पाण्डेय जीते थे)। यदि वर्तमान विधायक बच्चा पाण्डेय या कोई अन्य RJD उम्मीदवार लड़ता है, तो RJD का संगठनात्मक आधार, जो सीवान में हमेशा मजबूत रहा है, निर्णायक साबित हो सकता है।

अन्य उम्मीदवार के न जीतने के प्रतिकूल तथ्य और सांख्यिकी (श्याम बहादुर सिंह – JDU / NDA)

प्रतिकूल तथ्य एवं सांख्यिकी विश्लेषण एवं कारण
व्यक्तिगत बनाम जातीय गणित JDU के उम्मीदवार श्याम बहादुर सिंह एक अनुभवी नेता हैं। वह 2010 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनकी हार का मुख्य कारण RJD का मजबूत M-Y एकजुटता है। केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता, RJD के निर्णायक वोट बैंक को तोड़ना कठिन है।
2024 लोकसभा चुनाव में निर्दलीय का प्रभाव 2024 के लोकसभा चुनाव में, निर्दलीय उम्मीदवार हिना शहाब (शहाबुद्दीन की पत्नी) ने इस विधानसभा क्षेत्र में JDU से भी बेहतर प्रदर्शन किया था और RJD को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था। यदि हिना शहाब गुट का प्रभाव या कोई अन्य मुस्लिम/सवर्ण निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत होता है, तो यह JDU/NDA को नहीं, बल्कि सीधे RJD के कोर मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएगा, जिससे NDA की वापसी की संभावना बनेगी। लेकिन अगर यह वोट JDU को मिलता, तो उनकी जीत निश्चित थी।
सीट का ‘कांटे का मुकाबला’ इतिहास 2020 में हार का अंतर मात्र 2.10% था, जो दर्शाता है कि NDA के कोर वोट (सवर्ण, अति पिछड़ा, महादलित) में पर्याप्त समर्थन था, लेकिन जीत के लिए यह पर्याप्त नहीं था। NDA को RJD को हराने के लिए M-Y समीकरण में सेंध लगाने की आवश्यकता है, जो मुश्किल है।
वोटों के बिखराव का खतरा इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज जैसी पार्टियों की संभावित एंट्री RJD और JDU दोनों के वोटों में सेंध लगा सकती है। यदि JDU के पारंपरिक सवर्ण या अति पिछड़ा वर्ग का वोट थोड़ा सा भी बंटता है, तो RJD की मामूली बढ़त निर्णायक बन जाएगी।

यह विश्लेषण उपलब्ध चुनावी डेटा, जातीय समीकरणों और हालिया राजनीतिक रुझानों पर आधारित है। यह सीट एक ‘टॉस-अप’ (कांटे का मुकाबला) है और अंतिम परिणाम दोनों गठबंधनों की संगठनात्मक क्षमता और अंतिम क्षणों के मतदाता रुझान पर निर्भर करेगा।

Exit mobile version