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बरारी विधानसभा: ‘निषाद किंग’ की सत्ता बरकरार या ‘MY’ समीकरण की धमाकेदार वापसी? 2025 का जातीय महायुद्ध!

कटिहार जिले की बरारी विधानसभा सीट बिहार चुनाव 2025 में कांटे की टक्कर के लिए तैयार है। यह सीट अपने अत्यधिक जटिल जातिगत समीकरणों और हर चुनाव में बदलती जीत के लिए जानी जाती है।

गहन विश्लेषण के आधार पर, यह चुनाव पिछली बार की तरह ही बेहद करीबी होगा, लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए महागठबंधन (तौकीर आलम, कांग्रेस) के उम्मीदवार के जीतने की संभावना थोड़ी अधिक है।


विजेता की संभावित जीत के पक्ष में विश्लेषण (महागठबंधन – तौकीर आलम, कांग्रेस)

संभावित विजेता: तौकीर आलम (कांग्रेस) (या महागठबंधन का कोई अन्य मुस्लिम उम्मीदवार)

1. “MY” (मुस्लिम-यादव) वोट का ध्रुवीकरण:

2. 2020 में कांग्रेस का चुनावी गणित:

3. सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency):


अन्य उम्मीदवार की संभावित हार के प्रतिकूल तथ्य (NDA – बिजय सिंह, JDU)

मुख्य चुनौती/संभावित उपविजेता: बिजय सिंह (JDU)

1. जीत का बहुत छोटा अंतर (2020):

2. NDA के सवर्ण और EBC वोटों का गणित:

3. जातीय विभाजन की जटिलता:


निष्कर्ष

बरारी विधानसभा सीट पर महागठबंधन (कांग्रेस) के उम्मीदवार तौकीर आलम की जीत की संभावना अधिक है। इसका मुख्य कारण मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक की विशाल संख्या और उनका एक तरफा झुकाव है।

JDU के बिजय सिंह के लिए यह सीट बचाना एक बड़ी चुनौती होगी। उनकी जीत तभी संभव है जब वह LJP के बागी वोटों को पूरी तरह से NDA गठबंधन में वापस ला पाएं और EBC/निषाद वोट को एकजुट रखते हुए सत्ता विरोधी लहर को नियंत्रित कर सकें। 2020 के परिणामों को देखते हुए, यह मुकाबला कांटे का होगा, लेकिन संख्यात्मक लाभ महागठबंधन के पक्ष में है।

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