Site icon winapoll.com

बाजपट्टी: ‘M-Y’ की लहर रोकेगी NDA? सबसे कम अंतर वाली इस सीट पर किसका पलड़ा भारी!

बाजपट्टी विधानसभा (सीट क्रम संख्या 27) सीतामढ़ी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जिसका गठन 2008 में हुआ था।1 यह सीट पूरी तरह से ग्रामीण है और 2020 में यह बिहार की सबसे कम अंतर वाली सीटों में से एक थी, जिसने इसे हाई-प्रोफाइल बना दिया है।2

प्रमुख दावेदार और पिछला परिणाम (2020):

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट जीत का अंतर
मुकेश कुमार यादव (विजेता) RJD (महागठबंधन) 71,483 2,704 वोट
डॉ. रंजू गीता (उपविजेता) JDU (NDA) 68,779

मुकेश कुमार यादव/महागठबंधन (RJD) की जीत के संभावित अनुकूल तथ्य और विश्लेषण

अनुकूल तथ्य/विश्लेषण विवरण
M-Y (मुस्लिम-यादव) फैक्टर बाजपट्टी में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या (लगभग 30.60% या 97,000 से अधिक) बहुत अधिक है। यह एक मुस्लिम-बहुल क्षेत्र है। RJD का पारंपरिक M-Y समीकरण इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि यह समीकरण एकजुट रहता है, तो RJD की जीत लगभग सुनिश्चित हो जाती है।
मौजूदा विधायक की मज़बूत पकड़ मुकेश कुमार यादव वर्तमान विधायक हैं। 2020 में एक मजबूत उम्मीदवार (डॉ. रंजू गीता) के खिलाफ जीत हासिल करना उनकी स्थानीय लोकप्रियता और संगठन पर पकड़ को दर्शाता है। सीटिंग MLA होने के नाते उन्हें अपने कार्य और संपर्क का लाभ मिलेगा।
कड़े मुकाबले की आदत 2020 में मुकेश यादव ने बहुत कम अंतर से जीत हासिल की थी, जिससे इस बार उनके और RJD संगठन के बीच अपनी सीट बचाने की ललक अधिक होगी। RJD ने उन्हें 2025 के लिए संभावित उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जो उनकी स्थिति को मजबूत करता है।
युवा और रोज़गार का मुद्दा यह ग्रामीण क्षेत्र बाढ़ और पलायन से त्रस्त है। RJD के नेता तेजस्वी यादव द्वारा बार-बार उठाए जा रहे रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे स्थानीय युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं।

डॉ. रंजू गीता/NDA (JDU) की जीत की राह और RJD उम्मीदवार की हार के संभावित प्रतिकूल तथ्य

प्रतिकूल तथ्य/विश्लेषण (RJD की हार के संभावित कारण) विवरण
M-Y समीकरण में सेंधमारी की संभावना इस सीट पर मुस्लिम और यादव वोटों का विभाजन ही RJD की हार का मुख्य कारण बन सकता है। AIMIM या अन्य मुस्लिम दलों की एंट्री से मुस्लिम वोट बँट सकते हैं, जिसका सीधा फायदा NDA को होगा (जैसा कि अन्य सीमांचल सीटों पर देखा गया है)।
JDU का ऐतिहासिक दबदबा बाजपट्टी सीट पर 2010 और 2015 में JDU की रंजू गीता ने जीत हासिल की थी, जो इस क्षेत्र में JDU के लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) और अतिपिछड़ा वोट बैंक के मजबूत आधार को दर्शाता है। NDA इस पारंपरिक आधार को फिर से एकजुट करने का प्रयास करेगा।
वैश्य और सवर्ण वोट का ध्रुवीकरण बाजपट्टी में वैश्य, ब्राह्मण और अन्य सवर्ण मतदाताओं की संख्या भी अच्छी है। ये मतदाता सामान्यतः NDA के समर्थक होते हैं। यदि NDA M-Y के खिलाफ गैर-M-Y वोटों का मजबूत ध्रुवीकरण करने में सफल रहता है, तो रंजू गीता की वापसी की संभावना बढ़ जाएगी।
स्थानीय विकास का मुद्दा हालांकि क्षेत्र में बाढ़ और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, लेकिन JDU यह दावा कर सकता है कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने सड़क और बुनियादी ढाँचे के अन्य कार्य किए हैं। यदि मतदाता विकास के मुद्दों पर वोट करते हैं तो यह RJD के लिए प्रतिकूल होगा।

निष्कर्ष और चुनावी संभावना (2025):

बाजपट्टी विधानसभा सीट 2025 में भी RJD और JDU के बीच सबसे कांटेदार और दिलचस्प मुकाबला प्रस्तुत करेगी।

RJD के पास M-Y समीकरण की संख्यात्मक श्रेष्ठता और मौजूदा विधायक की पकड़ का लाभ है, जो उनकी जीत का मुख्य आधार बनेगा। वहीं, JDU के पास गैर-M-Y वोटों का मजबूत आधार और पूर्व विधायक रंजू गीता का व्यक्तिगत प्रभाव है।

विश्लेषण के आधार पर, यह सीट RJD के लिए बनाए रखना आसान नहीं होगा क्योंकि जीत का अंतर बहुत कम था, लेकिन M-Y समीकरण की ताकत को देखते हुए RJD के मुकेश कुमार यादव अब भी इस मुकाबले में मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। जीत का फैसला पूरी तरह से मुस्लिम वोटों के विभाजन और NDA के गैर-M-Y वोट बैंक के एकजुट होने पर निर्भर करेगा।

संभावित विजेता: RJD के मुकेश कुमार यादव, लेकिन जीत का अंतर फिर से 3,000 वोटों से कम हो सकता है।

Exit mobile version