1️⃣ प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला
| गठबंधन/पार्टी | संभावित/वर्तमान उम्मीदवार | स्थिति और पृष्ठभूमि |
| NDA (BJP) | ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ‘ज्ञानू’ | वर्तमान विधायक। लगातार 4 बार इस सीट से जीत चुके हैं (2 बार JD(U) और 2 बार BJP से)। क्षेत्र में एक मजबूत व्यक्तिगत पकड़ है। |
| महागठबंधन (RJD/INC) | सत्येंद्र बहादुर सिंह (INC-2020 में उपविजेता) या RJD का मजबूत उम्मीदवार। | 2020 में कांग्रेस के सत्येंद्र बहादुर सिंह ने ज्ञानू को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन 10,240 वोटों से हार गए थे। RJD यहां यादव-मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों के वोटों के सहारे जीत की उम्मीद करेगा। |
2️⃣ 🌟 ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ‘ज्ञानू’ (NDA/BJP) की जीत के कारण (अनुकूल तथ्य)
ज्ञानेंद्र सिंह ‘ज्ञानू’ और NDA के पक्ष में उनकी संभावित जीत के निम्नलिखित निर्णायक कारक हैं:
- ‘मिनी चित्तौड़गढ़’ समीकरण (राजपूत प्रभुत्व): बाढ़ विधानसभा सीट पर राजपूत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, और ऐतिहासिक रूप से यह सीट राजपूत उम्मीदवार ही जीतते आए हैं। ज्ञानेंद्र सिंह ‘ज्ञानू’ का इस समुदाय में अडिग समर्थन उनकी जीत का सबसे बड़ा आधार है।
- लगातार जीत का रिकॉर्ड और स्थानीय पकड़: वह लगातार 4 बार विधायक रहे हैं, जो क्षेत्र पर उनके मजबूत व्यक्तिगत नियंत्रण और जनता के एक बड़े हिस्से में उनकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।
- NDA का मजबूत आधार: BJP के साथ होने से उन्हें उच्च जातियों (ब्राह्मण, भूमिहार), वैश्य, और NDA के पारंपरिक अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का बड़ा वोट शेयर मिलता है, जो महागठबंधन के MY समीकरण को चुनौती देता है।
- विकास कार्यों का समर्थन: हालांकि कुछ क्षेत्रों में विकास की कमी एक मुद्दा है, लेकिन उनके समर्थक स्थानीय स्तर पर हुए सड़क, बिजली और अन्य योजनाओं के कार्यान्वयन का श्रेय उन्हें देते हैं।
3️⃣ 📉 महागठबंधन उम्मीदवार की हार के कारण (प्रतिकूल तथ्य)
महागठबंधन (संभावित RJD/INC उम्मीदवार) की हार के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
- जातीय समीकरण का गणित: महागठबंधन का आधार यादव और मुस्लिम (MY) वोटों पर टिका है। हालांकि इनकी संख्या अच्छी है, लेकिन यह राजपूत वोटों के केंद्रीकरण के सामने अक्सर कम पड़ जाता है, जब तक कि वह एक बड़ा विभाजन न कर दे।
- एंटी-इनकम्बेंसी का बंटवारा: 20 सालों से एक ही व्यक्ति विधायक है, इसलिए कुछ हद तक सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) मौजूद है। हालांकि, 2020 में भी निर्दलीय उम्मीदवार कर्णवीर सिंह यादव (लल्लू मुखिया) ने 38,369 वोट काटकर महागठबंधन की मदद करने के बजाय, राजपूत वोटों में सेंध लगाई थी, जिससे ज्ञानू की जीत हुई।
- विकास के प्रमुख मुद्दे: स्थानीय लोगों में जल-जमाव (बाढ़) और स्थानीय विकास की कमी को लेकर नाराजगी है, लेकिन यह नाराजगी व्यक्तिगत ज्ञानू के खिलाफ कम और स्थानीय सरकारी तंत्र के खिलाफ अधिक दिखाई देती है।
- उम्मीदवार की निर्भरता: महागठबंधन उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत साख से ज़्यादा RJD के MY समीकरण और तेजस्वी यादव की ‘रोजगार’ की छवि पर निर्भर रहना पड़ता है, जो बाढ़ के राजपूत बहुल क्षेत्र में निर्णायक साबित नहीं होता।
निष्कर्ष:
बाढ़ विधानसभा सीट का चुनाव मुख्यतः ज्ञानेंद्र सिंह ‘ज्ञानू’ के व्यक्तिगत दबदबे और क्षेत्र के राजपूत-बहुलता के इर्द-गिर्द घूमता है। NDA गठबंधन के साथ उनकी मजबूत स्थिति उन्हें फिर से विजयी बना सकती है।
बाढ़ में NDA (BJP) के उम्मीदवार ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ‘ज्ञानू’ की जीत की संभावनाएँ अधिक हैं। महागठबंधन को जीतने के लिए एक ऐसे राजपूत/अन्य मजबूत उम्मीदवार को उतारना होगा जो ज्ञानू के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सके।